कुदरती व्यवस्था में स्त्री और पुरुष दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, एक दूसरे के पूरक हैं , सहयोगी हैं, विरोधी नहीं। फलतः एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते। प्रकृति ने दोनों ही को एक खास मकसद से सृष्टि और जीवन की निरंतरता हेतु बनाया है, दोनों एक दूसरे के लिए अति आवश्यक हैं, क्योंकि भावों और संवेग की उत्पत्ति के ये दोनों वाहक हैं, एक दूसरे के लिए और अन्य के लिए अनुपयोगी तो कतई भी नहीं। दोनों एक दूसरे के मित्र हैं, शत्रु नहीं। इन दोनों को जोड़ता है स्नेह, प्रेम और प्यार और इसके पर्याय। स्नेह एक ऐसा खूबसूरत एहसास है, जो हर आयु वर्ग के इंसान के दिल के किसी न किसी कोने में बसा होता है। इस एहसास के जागते ही कायनात में जैसे चारों ओर हजारों फूल खिल उठते हैं और जिंदगी को जीने का नया बहाना मिल जाता है। एक स्त्री के जीवन में प्यार बहुत महत्वपूर्ण एवं अर्थपूर्ण होता है और यह बहुत मायने रखता है। प्यार उसकी सासों में फूलों की खुशबू की तरह रचा-बसा होता है, जिसे वह ताउम्र भूल नहीं पाती। लगता है कि जब सृष्टि की रचना हुई होगी और धरती पर पहली बार आदम और हौवा ने धरती पर कदम रखा होगा, तभी से स्त्री ने पुरुष ...
जीवन में परस्पर संबंधों के पोषण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है अंतर्संबंध। एक प्रयास और जनता के जागरूकता मिशन को समझने का संवाद। जब किसी जागरूकता मिशन के लिए प्रयास किए जाते हैं, तो जनता के साथ संवाद बहुत महत्वपूर्ण है। यह प्रक्रिया जनता को मिशन के उद्देश्यों और उसकी महत्ता से जोड़ने का काम करती है। इसके लिए प्रयास और जनता के बीच स्वस्थ बातचीत की आवश्यकता होती है, ताकि संदेश सही तरीके से पहुंच सके।