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उलझन वाहवाही लूटने के लिए दिए गए उत्तर, जो अपनी संस्कृति की झूठी प्रशंसा करते हैं, उनका क्या इलाज है ? ऐसे उत्तर लोकप्रिय भी हो जाते हैं तो कैसे?

सुलझन बड़ा दिलचस्प प्रश्न है। मानव जीवन के तीन स्तम्भ, आचार, विचार और व्यवहार, हैं। इनके साथ विवेक भी आ जाए तो जीवन में फिर आनंद ही आनंद एवं प्रशंसा ही प्रशंसा है। आचार, विचार और व्यवहार में विचार का महत्त्व इसलिए अधिक है, क्योंकि अन्य दो बातें आचार और व्यवहार इसी विचार पर निर्भर करती हैं। सद्विचार होगा तो आध्यात्मिक एवं भौतिक उन्नति भी जीवन में होगी और विचार यदि कुत्सित हुआ तो आध्यात्मिक एवं भौतिक अवनति जीवन में होगी। विचार से आशय मनन से है – मनन से हम चिंतन समझ सकते हैं। चिंतन से आशय चिंता के साथ सोचने से है, पर गपशप का अर्थ चिंतन नहीं होता है। गपशप से केवल और केवल समय की बर्बादी होती है। इसको भी ध्यान में रखिए कि विचार में हमेशा निरीक्षण की प्रवृत्ति रखनी होगी। खान-पान, वस्त्र, पड़ोस आदि सांस्कृतिक कारकों पर जीवन भर गंभीरतापूर्वक सूक्ष्म निरीक्षण करना पड़ेगा। यदि हम सूक्ष्म निरीक्षण उपरोक्त बातों पर नहीं करेंगे तो हम सामाजिक जीवन में पिछड़ जायेंगे, क्योंकि उपरोक्त वर्णित बातों में परिवर्तन हमेशा होता रहता है। कौन सा परिवर्तन उपयुक्त है या नहीं, उसका विचार हमें करना पड़ेगा। हमारे ऋषि–मुन...