धर्म नहीं है धर्मग्रन्थ का पढ़ना, सुनना माला नर्तन। धर्म नहीं है केवल पूजन, अर्चन और ईश का वन्दन। धर्म-क्षेत्र है सबसे उत्तम इसकी नहीं सीमा है कोई। धर्म गुणों की गुणवत्ता का कर नहीं सकता वर्णन कोई। करे आत्मा की जो शुद्धि ज्ञान ध्यान आनन्द मनोहर। हो विकास शक्ति का जिससे धर्म लेत पर पीड़ा को हर! धर्म कर्म ये ही सब ऐसे मानव मन को करते चन्दन! धर्म नहीं है केवल पूजन, अर्चन और ईश का वन्दन।।१।। हीन भावना की मनोवृत्ति, घृणा, लोभ, क्रोध, भय, माया। कहलाते हैं अधर्म सभी ये लिपटा इनसे हर जन पाया। क्षमाशीलता मन की शक्ति, पावन समता अभय भावना। धर्म सभी ये कहलाते हैं, मन में पर की भली कामना। सन्तोष, सरलता, क्रोध न करना कर्म करे जीवन को कुन्दन। धर्म नहीं है केवल पूजन, अर्चन और ईश का वन्दन।।२।। विकास मित्रता का करना भी पावन धर्म सदा कहलाता। खुद को और दूजों को सुख दे जीने की ये कला दिखाता। सदा विकारों से मुक्ति की राह धर्म ही है बतलाता। निर्मलता, आचरण, शांति धर्म हृदय में ला हर्षाता। पर सेवा उपकार धर्म है सदा हरण करता पर क्रन्दन। धर्म नहीं है केवल पूजन, अर्चन और ईश का वन्...
जीवन में परस्पर संबंधों के पोषण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है अंतर्संबंध। एक प्रयास और जनता के जागरूकता मिशन को समझने का संवाद। जब किसी जागरूकता मिशन के लिए प्रयास किए जाते हैं, तो जनता के साथ संवाद बहुत महत्वपूर्ण है। यह प्रक्रिया जनता को मिशन के उद्देश्यों और उसकी महत्ता से जोड़ने का काम करती है। इसके लिए प्रयास और जनता के बीच स्वस्थ बातचीत की आवश्यकता होती है, ताकि संदेश सही तरीके से पहुंच सके।