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रूप कुरूप

भौगोलिक और भौतिक क्षेत्र में रंग सबसे सुंदर पहलुओं में से एक है। हम चारों तरफ रंगों से घिरे हुए हैं, लेकिन कितनी ही बार हम असंख्य रंगों  में मौजूद कई बारीकियों को नहीं देख पाते हैं?  हम सभी  दैनिक उपयोग के आधार पर रंगों को पसंद करते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ तब जब मेरे बच्चों ने मेरे लिए एक विशेष अवसर पर कुर्ता और पायजामा सैट खरीदा। कुर्ता चटख नयनाभिराम रंग लिए हुए था और एक स्थापित प्रतिष्ठान के द्वारा निर्मित। कुर्ता एक ही रंग के विविध शेड्स से सुसज्जित था और प्रथम नजर में तुरंत आकर्षित करने वाला भी। एक दो विशेष मौकों पर उसको धारण करने के बाद जब उसकी धुलाई की जरूरत महसूस की गई तो धोने के साथ ही उसके रंग और कड़कपन समाप्त हो गया और वह कुर्ता एक ओर तो अपना आकर्षण खो बैठा और साथ ही साथ धोते समय अपना रंग साथ धुलने वाले पायजामे पर छोड़ गया। यानि कि अत्यधिक मुद्रा से विक्रीत वेशभूषा ने दो बार जहां चटख रंगों से व्यक्तित्व को निखार दिया वहीं उसके बाद दु:स्वप्न के रूप में बदरूप कुर्ता और उसके अक्स वाला पायजामा भी। कभी का चित्ताकर्षक पर आज का बदरूप वस्त्र यह उदाहरण है कलुषित विचार के सा...