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UPSC-ISS टॉपर हैं कशिश

 🎤 विशेष साक्षात्कार : UPSC-ISS टॉपर कशिश कसाना (मेरठ की गौरवशाली बेटी से बातचीत) प्रस्तावना   मेरठ की अंसल कॉलोनी की बेटी कशिश कसाना ने UPSC के इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विसेज़ (ISS) परीक्षा में देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। KL इंटरनेशनल स्कूल से शिक्षा की शुरुआत करने वाली कशिश ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से B.Sc. और M.Sc. (Statistics) में स्वर्ण पदक अर्जित कर यह साबित कर दिया कि लगन और मेहनत से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। हमारी ओर से उन्हें ढेरों बधाइयाँ और शुभकामनाएँ। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत— बातचीत प्रश्न 1: कशिश जी, सबसे पहले आपको हमारी ओर से हार्दिक बधाई। आपको कैसा लग रहा है यह मुकाम हासिल करके? कशिश : बहुत धन्यवाद। सच कहूँ तो यह पल मेरे और मेरे परिवार के लिए अविस्मरणीय है। मेहनत का फल मिलने पर आत्मविश्वास और बढ़ जाता है। प्रश्न 2: इस सफलता के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा किसे मानती हैं? कशिश : मेरे माता-पिता ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। पापा ने हमेशा अनुशासन और परिश्रम का महत्व समझाया और माँ ने निरंतर प्रोत्साहित किया। उनके सहयोग के बिना यह संभ...

उलझन को सुलझाने का स्वप्रयास

भूमिका आलेख आखिर इसकी वजह क्या है कि हम और आप अपने स्वाभाविक रूप से विकसित कौशल के अनुसार जीवन जीने में विफल रह जाते हैं और ऐसा उन सब के विषय में भी कहा जा सकता है जो कि उच्च कोटि के उदाहरण हैं? आखिर क्या कारण है कि समाज में फुसलाने वाले लोग अपने कार्य में इतने माहिर हो गए हैं कि जीवन मूल्यों को लेकर अपने जीवन को बिखरने से बचा लेने वाले भी उनके झांसों में आ जाते हैं? मुझको स्मरण हो आता है एक अपुष्ट पर बहुत तेजी से समाज में फैला समाचार कि एक शिक्षक महोदय शिक्षा में उल्लेखनीय करने के बाद अब राजनीति में पदार्पण करेंगे। शिक्षक महोदय के संपर्क के लोगों में से कुछ ने उनको राजनीति में आने को निरंतर उकसाकर प्रयास करने के लिए प्रेरित किया तो उन्हीं के सहयोगियों में से ही एक धडे ने उनको टिकट ना मिल पाए इस दिशा में प्रयास किए। अब यह विचार का विषय है कि ऐसा आखिर हुआ तो हुआ क्यों? हो सकता है कि इसके मूल में कई कारण हों लेकिन इसके बाद अफवाहों का बाजार आलोचनाओं, समीक्षाओं एवं आरोपों के रूप में 3अवश्य गर्म हो गया, जबकि फुसलाने वालों का शिकार हो शिक्षक महोदय अवश्य सकते में रहे। आइए! इसकी कुछ वजहों को स...

चौधरी चरण सिंह का स्मरण

भूमिका यह वीडियो हमारे पूर्वज चौधरी चरण सिंह जी की कुछ भावनाओं और कामनाओं तथा उनके समाज की मानव संपदाओं के अनुसरण भाव को समेटे है जिसको उन्होंने कभी कल्पनाओं के रूप में समझकर अपनी मानव संपदा को समझाने का यथासंभव प्रयास किया। अवसर जनपद जाट महासभा मुजफ्फरनगर के तत्वाधान में भारत रत्न स्व. चरण सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री, भारत सरकार) की 112वीं जयन्ती को एक विचार गोष्ठी "समाज देश को उनके विचारों एवं कार्यों से लाभान्वित कैसे किया जाये?" विषय पर विमर्श कर मनाया गया। इसको लेकर होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जड़ौदा, मुजफ्फरनगर में एक भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। विषय इस अवसर पर जाट महासभा मुजफ्फरनगर द्वारा बुजुर्गों का सम्मान भी किया गया। आज बढते भौतिकतावाद के कारण बुजुर्गों को बच्चों की उपेक्षा का शिकार होना पड रहा है जिससे समाज के बुजुर्गों के हालात बहुत खराब हैं। इसके पीछे कारण समाज में कुछ बुराई आ जाना है जिसको लेकर जनपद जाट महासभा का नारा है-  ‘‘चलो! गाँव की ओर।’’  जिससे कि जिस विभूति की जयंती पर हम एकत्र हुए हैं उसके समाज को जागरूक कर उनके स्वप्नों को साकार किया जा सके ...

शिक्षक दिवस ( कुछ बातें जो जरूरी हैं )

भूमिका भारत में 'शिक्षक दिवस' प्रति वर्ष डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के रूप में 5 सितंबर को मनाया जाता है। यह महान शिक्षाविद, दार्शनिक और भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे। उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और अपने जीवन को शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और योगदान के लिए समर्पित किया। यह दिन उन शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए है, जो विद्यार्थियों के जीवन में मार्गदर्शक, प्रेरक और शिक्षण के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक समाज का आधार होते हैं, जो नई पीढ़ी को ज्ञान और मूल्य प्रदान करते हैं। शिक्षक दिवस यह स्मरण कराता है कि शिक्षा किसी भी समाज की प्रगति और विकास का मूल आधार है। शिक्षकों के योगदान को मान्यता देकर हम शिक्षा के महत्व को भी स्वीकारते हैं। शिक्षक दिवस हमें यह सिखाता है कि एक अच्छा शिक्षक सिर्फ विषय का ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि छात्रों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक शिक्षिका की कलम से शिक्षक दिवस पर न जाने क्यों अपने आप ही ज़हन में उन शिक्षकों के चित्र उभर आते हैं जिन्होंने मुझे बहुत स्नेह से पढ़ाया, सीखने में मेरी...

इस पहल की भांति कुछ करके तो देखिए

भूमिका साथियो, दुनिया में सकारात्मक तरीकों से नवाचार करने वालों की कमी नहीं है और वो नवाचारी बधाई के पात्र हैं हो हद दर्जे के नकारात्मक हो चुके माहौल में भी बेहतर करने के लिए सदैव उत्सुक रहते हैं। आइए एक ऐसे ही उच्च कोटि के प्रयास से रूबरू होते हैं जिसके केंद्र में एक शिक्षक संदीप जोशी जी हैं। अच्छी पहल बच्चे नवाचार करें और उस से कुछ सीखें, यह सोच राजस्थान के जालोर में शिक्षक संदीप जोशी ने एक पुस्तकालय बनाया जिसके लिए तीन सौ से से अधिक पुस्तकों का संग्रहण किया। अब देखिए यह कैसे उपलब्ध संसाधनों ही को व्यवस्थित करके किया गया। रेवत स्कूल के वरांडे में पुस्तकालय की कल्पना को साकार किया गया। वहां पर बच्चे नि:शुल्क पढ़ते हैं व पुस्तकें घर भी ले जा सकते हैं। दिनेश जांगिड़ | जालोर आज यदि आप अवलोकन करें तो पाएंगे कि आजकल पढ़ाई से बच्चों का मोहभंग सा हो रहा है। फलतः स्कूल और कॉलेज में पुस्तकालय सूने दिखते हैं। ऐसे में जालोर जनपद के एक स्कूल ने एक अनुकरणीय मिसाल कायम की है जहां कि पुस्तकालय ही बच्चों के बीच आ गया है। बच्चों की जब इच्छा हो, कोई भी पुस्तक किसी भी समय लेकर पढ़ सकते हैं, कक्...

अद्भुत मिशन, अद्भुत प्रयास (अपडेटेड)

भूमिका "भारत: एक पुस्तकालयों का देश" बनाने का मिशन भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और ज्ञान के प्रसार का एक अनूठा प्रयास है। इस मिशन का उद्देश्य है कि हर गाँव और कस्बे में पुस्तकालयों की स्थापना की जाए, ताकि समाज के हर वर्ग, विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों, को शिक्षा और जानकारी तक पहुँचने का अवसर मिले। ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालय स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि वहाँ के बच्चों, युवाओं, और वयस्कों को पढ़ने-लिखने का माहौल मिले, जिससे उनकी शिक्षा और बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिले। यह पुस्तकालय सिर्फ पढ़ाई के लिए ही नहीं होंगे, बल्कि यह एक सामुदायिक केंद्र के रूप में कार्य करेंगे जहाँ लोग एकत्रित होकर विचारों का आदान-प्रदान कर सकें। इस मिशन के अंतर्गत, विभिन्न संगठनों और सरकारी योजनाओं की सहायता से पुस्तकालयों का निर्माण किया जाएगा। इन पुस्तकालयों में विविध प्रकार की पुस्तकें, अखबार, और डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए भी सामग्री का संकलन किया जाएगा। यह पहल न केवल साक्षरता दर को बढ़ाएगी, बल्कि ग्राम...

Dedicated and Experienced Dr. Mahendra Ji

Introduction Friends, today we will meet Dr. Mahendra Kumar Sharma, who after done adequate teaching in Mechanical Engineering branch, is now retired from the post of Professor and HOD of Mechanical Engineering IIT, ISM Dhanbad and leading a normal life. Most of Dr. Sharma's teaching career was spent in government service in Dhanbad from the year 1977 onwards and after that for many years he also served in private engineering educational institutions in Meerut as Director of the institutes. Conversation  Question 1. Sir, did you have the idea of making a career in the field of teaching since you were young? Answer. Yes, but after completing diploma in Mechanical Engineering in the year 1964 from the Board of Technical Education I got a job in UP. Irrigation Department and Hydel Department. I joined the Irrigation Department in Uttar Pradesh, but due to unaccounted money in the working of department, my father advised me to look into other options and so I shifted to K.L. Polytechni...

An Educational Tour

Visit of Narayan Vidyapeeth, Mandaura, Meerut to the educational and historical city of Hastinapur."  Children and teachers of Narayan Vidyapeeth, Mandaura Meerut visited the historical city of Hastinapur on 5th November. On this educational tour, the children not only enjoyed the environment outside the school but also saw the natural beauty of a historical place like Hastinapur. Visited the fort of Pandavas in Hastinapur which today is just a mound. In Hastinapur, due to the research being conducted by the Archeology Department of the Government, we could not see the entire mound till the top, but after seeing it as far as possible, the children lost in the memories of history asked a lot of questions. The teachers satisfied the children's hunger for knowledge by giving as many answers as possible.  The children were overwhelmed to see the wall of the ancient fort of the Pandavas. The students inspected the ancient well adjacent to the fort and got lost in the Mahabhara...

प्राकृतिक अनुग्रह

मई 2023 का मध्यान्ह था जब हमारे मुहल्ले के वयोवृद्ध श्री मधुसूदन शर्मा जी का सान्निध्य मुझको पुनः प्राप्त हुआ। वे एक निश्छल व्यक्ति हैं। धार्मिक इंसान जिसके पेटपाप कुछ नहीं। उन्होंने मुझसे धार्मिक चर्चा आरंभ कर दी। मेरे अनुग्रह पर श्री कृष्णदत्त शर्मा कृष्ण की इस भजन की अब तक वो दो सौ से ज्यादा रंगीन प्रतियां वे अपने व्यय से वितरित कर चुके हैं। इसके उपरांत शर्मा साब ने मुझको हनुमत शाश्वत सत्य की कुछ प्रतियाँ वितरित कराने हेतु तैयार कराने को कहा। जो इस रूप में प्रकाशित होकर सामने आई। इसके उपरांत अब उर्दू में प्रकाशित सुदामा चरित का हिंदी अनुवाद कर उसको संशोधित करने का टास्क उनके द्वारा मुझको दिया गया है। इस सारी प्रक्रिया के माध्यम से सामान्य नागरिक पर प्रभु कृपा को साक्षात महसूस किया जा रहा है। राजीव

आंकड़े

आँकड़े आज हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुके हैं। प्रौद्योगिकी के आगे बढ़ने के साथ साथ इनकी भूमिका बढ़ने की संभावना बनी रहेगी और ये किसी की प्रगति की स्पष्ट अभिव्यक्ति भी होंगे। आँकड़े कई तरीकों से व्यक्तियों की मानसिक स्थिति को स्पष्ट करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं - आत्म-जागरूकता: आँकड़े संग्रह व्यक्तियों को अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहारों को ट्रैक और विश्लेषण करने की अनुमति देते हैं। मूड ट्रैकर्स, जर्नलिंग ऐप या पहनने योग्य डिवाइस जैसे उपकरण नींद के पैटर्न, शारीरिक गतिविधि और तनाव के स्तर पर आँकड़े एकत्र करने में मदद कर सकते हैं। इनकी समीक्षा करके, व्यक्ति अपनी मानसिक स्थिति और बाहरी कारकों के बीच पैटर्न, ट्रिगर्स और सहसंबंधों में अंतर्दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं। पैटर्न और प्रवृत्तियों की पहचान करना: समय के साथ एकत्र किए गए आँकड़े का विश्लेषण मानसिक स्वास्थ्य में पैटर्न और प्रवृत्तियों को प्रकट कर सकता है। उदाहरण के लिए, कोई यह देख सकता है कि सप्ताह के कुछ दिनों में उनका मूड खराब हो जाता है या विशिष्ट घटनाओं या स्थितियों के दौर...