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शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य का साधन

मानव जीवन में जितना महत्त्व भोजन-पानी वायु और अन्य चीजों का है, उससे कहीं अधिक शिक्षा का है। शिक्षा अर्जित करके ही मनुष्य का मानसिक विकास हो पाता है, जो उसके जीवन नियमन में समय-समय पर सहायक होता है। शिक्षा ऐसा साधन है जिसे अर्जित कर कोई इन्सान अपनी क्षमता के अनुसार तकनीक का अन्वेषण और उपयोग करने में सक्षम और किसी पुरस्कार प्राप्ति का अधिकारी हो जाता है। ऐसे ही पुरस्कारों से विभूषित मानव सम्पदाओं के राष्ट्रीय पटल पर आने के कुछ उदाहरण यहाँ दिए जा रहे हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र में अपने अर्जित ज्ञान का उपयोग करके कुछ ऐसा कर दिखाया जो नजीर बन गया। इन प्रतिभाओं में कृषि और शिक्षा के प्रसार के लिए पुरस्कृत श्री ओमप्रकाश गांधी जी (देवघर, यमुनानगर, हरियाणा) और श्री सेठपाल सिंह जी (नन्दी फिरोजपुर, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) का मुख्य रूप से उल्लेख किया जा सकता है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उपलब्धियाँ अर्जित करके जनसामान्य का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। श्री ओमप्रकाश गाँधी जी का स्मरण बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण को लेकर इसलिए किया जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने एकल प्रयासों के द्वारा ए...