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मैं अभी आता हूं!

मैं ग्रामीण पृष्ठभूमि से हूं, लेकिन जन्म और शिक्षा नगर में होने की वजह से मुझे वहां के प्यार से अनभिज्ञ रहना पड़ा, लेकिन उस प्यार की कमी पूरी की मेरे ताऊजी ने। वे जब भी गांव से शहर आते तो उनके स्नेह में मुझे उस प्यार की छाप मिलती। उम्र हो जाने की वजह से ताऊजी का शहर आना जाना  कम हो गया। ऐसे में मैंने खुद को गांव से जोड़ दिया और मैं कृषि के कामों के चलते गांव जाने लगा। मुझे गांव पहुंचा देख मेरे ताऊजी बेहद खुश हो जाते थे। उनके और मेरे बीच एक बात तय हुई थी कि मैं जब भी गांव आऊंगा-जाऊंगा तो उनसे जरूर मिलूंगा और अपने पूरे प्रोग्राम से उनको अवगत कराऊंगा। मैंने लम्बे अरसे तक इस वादे का पालन भी किया, लेकिन एक दिन ताऊजी की तबियत खराब सुन मैं अपने मामा जी के साथ अलसुबह अपने गांव आ गया। ताऊजी की तबियत नाजुक थी।  उनसे मिलने के बाद मैं उनसे आज्ञा लेकर मामा जी को उनके गांव छोड़ने और अपने किसी जरूरी काम से 'अभी आता हूं' कहकर निकल आया। ताऊजी की तबियत बिगड़ती गई और वह अंत समय तक मुझको यादकर यही कहते हुए चल बसे कि वह बस आने ही वाला है। आज भी जब इस बात का ध्यान आता है तो मुझे आत्मग्ल...