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प्रकृति में हस्तक्षेप

कृत्रिमता या मिलावट को यदि एक मानकर समझने का प्रयास करें तो इस क्षेत्र में हुई प्रगति विस्मित करने वाली है। वर्तमान में औषधीय गुणों वाले समस्त खाद्य पदार्थों का स्थान बिना गुण वाली वैकल्पिक किस्मों ने ले लिया है। दुग्ध, घी समेत देशी गुणों वाले समस्त खाद्य ठिकाने लगा दिये जाने के बाद मानवीय और कृषिगत औषधियों का नंबर आया। अब प्रयास मानवीय भावनाओं को लेकर है। असंख्य टी.वी. श्रृंखलाओं समेत ओ.टी. टी. और फिल्मों में अब भावनाओं का इस कदर दोहन किया जा रहा है कि धीरे धीरे ही सही पर मजबूत तरीके से कृत्रिमता में भी कृत्रिमता ने प्रवेश कर लिया है। भावुक दृश्यों पर भी दर्शक भावुक नहीं हो पाता। कुछ भी समझ नहीं आता कि हम जा किधर रहे हैं। कोई नहीं चलते जाओ धीरे-धीरे।