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विवेक

विवेक जीवन में लिए गए समस्त निर्णयों में प्रमुख भूमिका निभाता है। विवेक ही से समझा जा सकता है कि प्यार का केवल एक ही रूप नहीं है। समस्त जीवों को बचपन से बुढ़ापे तक प्यार की विविध रूपों में जरूरत होती है और बचपन में किसी भी जीव को मिले स्नेह को वह जीवन भर विस्मृत नहीं कर पाता व ऐसा उसके विवेक के कारण होता है। किसी भी जीवात्मा के लिए स्नेह और पीर दो बिलकुल स्पष्ट और गहरे तक असर करने वाली क्रियाएं हैं। इस ही क्रम में उसको मिलने वाली पीर कष्टदाई होती है और द्वंद्व का कारण बन सकती है तो ठीक उसी तरह उसे किसी का स्नेह, ममता और प्यार पाना मनोहारी लगता है। स्नेह, ममता और प्यार एक प्राकृतिक और अनुशासित स्थिति है, जिनकी अपनी मर्यादा और बाध्यताएं हैं। यह  केवल विपरीत लिंगी का मामला नहीं है, बल्कि हर रिश्ते में इस भाव का महत्व है। भाई-बहन, माता-पिता, दादा-दादी हों या फिर पति-पत्नी सबका भाव अपनी-अपनी जगह होता है। सामान्यतः यह भाव प्रत्येक रिश्ते में कुदरती होता है और हमारा विवेक ही जंतुओं में इसकी प्रतिशतता में विविधता पैदा कर देता है और भाव के प्रति दृढ़ता भी। भाव इंसान को जरूरत है और यह व्यवस्...