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उलझन प्रतिकूल परिस्थितियों में सामाजिक सरोकारों का निर्वहन कैसे करें?

सुलझन                                                                                  कोरोना और लॉकडाउन के समय हमने देखा कि कुछ लोगों के रोजगार चले गए, कुछ लोग घरों में कैद होकर बस समय गुजर जाने का इंतजार कर रहे थे और कुछ लोग इस आपदा को अवसर में बदलकर जमकर पैसा कमा रहे थे, लेकिन एक श्रेणी ऐसे लोगों की भी थी, जो आगे बढ़कर लोगों की मदद कर रहे थे। उनके लिए भोजन, दवाई, आक्सीजन सिलेंडर और परिवहन आदि की व्यवस्था करने वाले यहाँ तक कि अंतिम संस्कार में मदद करने वाले लोग भी कम ना थे। परिस्थितियाँ वाकई प्रतिकूल थीं, लेकिन बावजूद इसके बहुत सारे लोग अपने सामाजिक सरोकारों से पीछे नहीं हटे।                    यहाँ यह समझने की जरूरत है कि हमें जितना कुछ मिलता है, उसकी एक छोटी- सी कीमत हैं हमारे सामाजिक सरोकार। सरोकार यानि हमारी प्राथमिकताएँ। हम अपने ज...