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शिक्षा ही उज्ज्वल भविष्य का साधन

मानव जीवन में जितना महत्त्व भोजन-पानी वायु और अन्य चीजों का है, उससे कहीं अधिक शिक्षा का है। शिक्षा अर्जित करके ही मनुष्य का मानसिक विकास हो पाता है, जो उसके जीवन नियमन में समय-समय पर सहायक होता है। शिक्षा ऐसा साधन है जिसे अर्जित कर कोई इन्सान अपनी क्षमता के अनुसार तकनीक का अन्वेषण और उपयोग करने में सक्षम और किसी पुरस्कार प्राप्ति का अधिकारी हो जाता है। ऐसे ही पुरस्कारों से विभूषित मानव सम्पदाओं के राष्ट्रीय पटल पर आने के कुछ उदाहरण यहाँ दिए जा रहे हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र में अपने अर्जित ज्ञान का उपयोग करके कुछ ऐसा कर दिखाया जो नजीर बन गया। इन प्रतिभाओं में कृषि और शिक्षा के प्रसार के लिए पुरस्कृत श्री ओमप्रकाश गांधी जी (देवघर, यमुनानगर, हरियाणा) और श्री सेठपाल सिंह जी (नन्दी फिरोजपुर, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) का मुख्य रूप से उल्लेख किया जा सकता है, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उपलब्धियाँ अर्जित करके जनसामान्य का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

श्री ओमप्रकाश गाँधी जी का स्मरण बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण को लेकर इसलिए किया जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने एकल प्रयासों के द्वारा एक महिला शिक्षण संस्थान को अनन्त ऊँचाइयों पर पहुंचा दिया है। इस समस्त प्रक्रिया में उनका समर्पण अप्रतिम रहा है। उनके चमत्कृत व्यक्तित्व ने सभी को इतना प्रभावित किया कि जनमानस ने उनकी योजनाओं के वित्तीय व्यवस्थापन करने में तनिक-सी भी बाधा न आने दी। जितनी उम्मीद के साथ उन्होंने जिससे भी वित्तीय सहायता के लिए सम्पर्क किया, उसने उनकी भरपूर मदद की। भौतिकविज्ञान में पारंगत यह मानव सम्पदा एक शिक्षण संस्थान की सेवा छोड़कर देवधर में महिला शिक्षण संस्थान को उच्चीकृत करने के लिए प्राण-पण से लग गई। अन्ततः श्री ओमप्रकाश जी अपने मिशन में सफल हुए तथा अपनी इस अनथक तपस्या के लिए पुरस्कृत भी किए गए। अत्यन्त सादा जीवन व्यतीत कर रहे श्री ओमप्रकाश जी के परिश्रम का ही फल है कि आज उनके द्वारा पुष्पित पल्लवित शिक्षण संस्थान में हजारों बच्चियाँ अध्ययन कर लाभान्वित हो रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों में अपने ज्ञान का उपयोग कर पा रही है।

इसी क्रम में सहारनपुर के छोटे से ग्राम नन्दी फिरोजपुर का उल्लेख भी जरूरी हो जाता है। इस गाँव के श्री सेठपाल सिंह को कृषि क्षेत्र में अपने ही स्तर पर निरन्तर शोध कर कृषि क्षेत्र को आय का उत्तम जरिया बना देने के लिए जिला, मण्डल, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कारों से विभूषित किया जा चुका है, जिनमें पद्मश्री पुरस्कार भी एक है। निरक्षर दम्पति श्री बारू सिंह जी व श्रीमती अत्री देवी जी की आठ सन्तानों में चौथे नम्बर के श्री सेठपाल सिंह जी ने विज्ञान- गणित में स्नातक स्तर की शिक्षा अर्जित की है। उनके सभी बड़े और छोटे भाई स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षित हैं और सभी समाज में प्रतिष्ठित पदों को सुशोभित कर रहे हैं। निरक्षर अभिभावकों की सीमितताओं को महसूस कर उनके बालकों ने शिक्षा के महत्व को जाना समझा और यथोचित शिक्षा अर्जित की। श्री सेठपाल जी का एकमात्र पुत्र निखिल चौधरी हॉर्टिकल्चर में स्नातकोत्तर है। जीवन में शिक्षा अर्जित करके उन्होंने जाना कि शिक्षा मानव जीवन की एक महत्त्वपूर्ण इकाई है। हाल ही में श्री सेठपाल सिंह को दो बार श्री लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकादमी ऑफ एड्मिनिस्ट्रेशन में नए प्रशिक्षु आई.ए.एस. अधिकारियों के साथ समय साझा करने का अवसर मिला और उन्होंने अधिकारियों को तथा अधिकारियों ने उनके मनोभावों को समझा। इसके अतिरिक्त उनको गत स्वतन्त्रता दिवस 26 जनवरी को लोकसभा से भी आमंत्रण मिला और उनको समस्त सांसदों से मिलने का अवसर मिला। ऐसे में उन्होंने सांसदों को अपने मंतव्य से अवगत कराया।

शिक्षा जीवन में सफलता अर्जित करने और कुछ अलग करने के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण साधन है। यह जीवन के कठिन समय में चुनौतियों से सामना करने में हमारी सहायता करती है। ऐसा किसी क्षेत्र का चयन करके या फिर उसकी पर्याम जानकारी अर्जित करके किया जा सकता सम्भव है। शहरों में शिक्षा अर्जित करना आसान है, लेकिन क्या आपने कभी ग्रामीण क्षेत्रों की उन नन्हीं बेटियों के बारे में सोचा है, जो कम उम्र में ही शिक्षा से वंचित कर दी जाती है? भारत के ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा बहुत से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इनसे समाज में सभी व्यक्तियों में समानता की भावना आती है और देश के विकास को भी बढ़ावा मिलता है। शिक्षा के जरिए ही भावी राष्ट्र का निर्माण होता है।

शिक्षा पढ़ने, सीखने और लिखने की क्षमता सिखाती है। पढ़ना-लिखना ही शिक्षा की पहली सीढ़ी है। ध्यान रहे कि यदि आपमें शिक्षा का अभाव है या लेखन कौशल की कमी है तो आप समाज से और समाज में होने वाली गतिविधियों से दूर हैं। शिक्षा लोगों को साक्षर बनाती है। रोजगार के लिए भी शिक्षा अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यह निश्चित रूप से सभ्य जीवन जीने का एक शानदार अवसर है। जब नौकरी की बात आती है तो अशिक्षित लोगों को पर्याप्त जानकारी होने के बाद भी शायद भारी नुकसान होता है। बेहतर संचार शिक्षा का एक और महत्व है। शिक्षा व्यक्ति की वाणी को सुधारतों और परिष्कृत करती है। इसके अलावा, व्यक्ति शिक्षा के साथ संचार के अन्य साधनों में भी सुधार करते हैं। शिक्षा निश्चित रूप से प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल प्रदान कर व्यक्ति को प्रौद्योगिकी का बेहतर उपयोगकर्ता बनाती है। इसलिए शिक्षा के बिना आधुनिक मशीनों को संभालना शायद बहुत मुश्किल होगा।

आज शिक्षा का महत्व काफी बढ़ चुका है। शिक्षा के उपयोग तो अनेक हैं परन्तु उसे नई दिशा देने की जरूरत है। शिक्षा ऐसी हो कि व्यक्ति अपने परिवेश से परिचित हो सके। शिक्षा हम सबके उज्ज्वल भविष्य के लिए एक बहुत ही आवश्यक साधन है। हम अपने जीवन में शिक्षा रूपी साधन का उपयोग करके कुछ भी अच्छा स्वमेव अर्जित कर सकते हैं। शिक्षा का उच्च स्तर लोगों का सामाजिक और पारिवारिक सम्मान तथा एक अलग पहचान बनाने में मदद करता है। 

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