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"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"


 मां की गोद से ऊंचाइयों तक 

गिरिराज की आत्मकथा

"मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."  

यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।  

जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।  

मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।" 

यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।  

लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1998 में स्नातक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की और मेरिट आधारित “नीड बेस्ड स्कॉलरशिप” प्राप्त हुई।  

जयपुर में रहते हुए मैंने मां का बोझ हल्का करने के लिए टिफिन बांटे, कैटरिंग का कार्य किया, ट्यूशन पढ़ाई — ताकि मां की आंखों के सपने अधूरे न रह जाएं।  

2003 में दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड से बतौर अध्यापक चयन हुआ और 2004 में व्याख्याता पद प्राप्त किया। पहली पोस्टिंग राहोली, टोंक में मिली। वहां से शुरू हुआ एक ऐसा सफर, जिसमें बच्चों के जीवन को दिशा देना ही मेरा धर्म बन गया।  

2008 से 2016 तक मैं निवाई के इसी विद्यालय — राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, निवाई — में व्याख्याता के पद पर कार्यरत रहा। इसी विद्यालय से मेरा गहरा नाता है, क्योंकि यहीं से मैंने विद्यार्थी के रूप में 12वीं पास की थी।  

2016 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ और मैंने बूंदी जिले के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में प्रवर्तन निरीक्षक के रूप में 18 माह तक सेवा दी। परंतु प्रशासनिक कार्यों की अपेक्षा बच्चों के बीच रहकर शिक्षा देना मुझे अधिक सुकून देता था। अतः मैंने पुनः शिक्षा सेवा में वापसी की और 1 जनवरी 2018 को भरथला, निवाई के सरकारी विद्यालय में प्रधानाचार्य बना। वहां मेरी टीम के प्रयासों से विद्यालय को टोंक जिले के बेस्ट स्कूल का दर्जा मिला।  

वर्तमान में मैं प्रधानाचार्य, पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, निवाई के पद पर कार्यरत हूं। यह वही विद्यालय है, जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की थी। 23 सितंबर 2025 से मैं यहां प्रधानाचार्य के रूप में सेवारत हूं।  

मेरी हार्दिक इच्छा है कि जिस प्रकार भरथला विद्यालय ने उत्कृष्टता की मिसाल कायम की, उसी प्रकार पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, निवाई भी शैक्षिक और सह-शैक्षिक गतिविधियों, विद्यालय सौंदर्यकरण, अनुशासन और नवाचारों का एक प्रेरक हब बन सके।  

आज भी जब मैं मां को याद करता हूं, तो महसूस होता है —  

उनकी आंखों के सपनों से ही मेरी सफलता की रेखाएं खिंची हैं।  

मेरी हर उपलब्धि, हर मुस्कान, हर प्रेरणा — सब उनके आंचल की छांव से जन्मी है।  

यह कहानी केवल मेरी नहीं, हर उस बेटे की है जो मां के आशीर्वाद से अपने संघर्ष को साधना बनाता है।






सूचना प्रेषक

गिरिराज प्रसाद गुर्जर, प्रधानाचार्य  

पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, निवाई

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