अंधकार को दूर भगा दो।
आशा का इक दीप जलाकर।।
जुगनू जैसी चमक दिखाकर।
आलस्य को फिर दूर हटा कर।। कर्तव्यों से गलबहियां करके।
दिल में अपने इक गांठ लगाकर।।
घृणा किसी से भी ना करके।
चहुं ओर प्रेम के पुष्प खिलाकर।।
जनहित में सब काम करें तो।
मन में सबके इक ज्योति जगे जो।।
देश से ही हम सब हैं सुरक्षित।
देश-प्रेम की ज्वाला जला दो।। विलुप्त हो रही संस्कृति को फिर। पुनः गरिमामय स्थान दिला दो।।
जन-जन को अपने इस प्रयास से। आज और अभी अवगत करा दो।।
जहां दिखे अन्याय तभी तुम।
न्याय के लिए वहां अलख जगा दो।।
अत्याचार ना सहन करो कभी।
उसके विरुद्ध इंकलाब ला दो।।
अंधकार को दूर भगा दो।
आशा का इक दीप जलाकर।।
अज्ञात रचनाकार की रचना संशोधित रूप में......
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