बाइक सवार युगल लॉन्ग ड्राइव पर था और कब वह भावनाओं के ज्वार में उन्मत्त हो गया था, उसको इसका अहसास तक ना था।
अंतरंग वार्ता में आकंठ डूबा युवक बाइक चला रहा था और भावावेशित युवती का कमर तक हवा में उड़ चुका कुर्ता उसको अर्धनग्न कर चुका था। उसको भी इसका कतई भी अहसास ना था। राहगीरों की कामुक निगाहें युवती की नग्न हो चुकी कमर को तक रही थीं। कोई मनचला उसे देखने के लिए कभी आगे तो कभी पीछे निकल जाता।
अधेड़ मोटरसाइकिल सवार जब उनके निकट पहुंचा तो युवती को इस दशा में देखकर उससे रहा न गया और उसने तत्काल युवती को उसके अस्त व्यस्त हो चुके कपड़ों की बाबत बताया। शर्मसार हो चुकी युवती ने अपने कुरते को हड़बड़ी में ठीक किया और अधेड़ का आंखों ही आंखों में आभार व्यक्त किया। पर बराबर से गुजरती वागन R में बैठे दंपत्ति ने मोटरसाइकिल सवार अधेड़ की ओर मुस्कराते हुवे व्यंगपूर्ण और हेय दृष्टि से देखा। अधेड़ को अजीब तो लगा पर उसके मुखमंडल पर संतुष्टि का भाव था, क्यूं की उसने अपनी पुत्रीवत युवती को भावावेग के उस भंवर से झटके से बाहर खींच लिया था, जिसके वशीभूत हो वह युवती परोक्ष अपरोक्ष रूप से राहगीरों की कामुक निगाहों का शिकार हो रही थी। बाइक सवार युगल अब संयत सहज था, जबकि अधेड़ दायित्वपूर्ति के बोध से गौरव की अनुभूति कर रहा था और उसके चेहरे पर संतोष का भाव साफ झलक रहा था।
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