"कोई किसी का नहीं, इंसान अकेले दुनिया में आता है।" और! अपने जीवन को आनंदित करने व सुखद बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है, रिश्ते नाते बनते हैं तथा विविध किस्म की गतिविधियां होती हैं। फिर, अंततः वह अकेले ही दुनिया से चला जाता है। हमारे लिये यह जानना भी बहुत जरूरी है कि हमारे जीवन में रिश्तों की मुख्य भूमिका होती है और एक उल्लसित जीवन के पीछे हमारे रिश्ते नाते ही बड़े कारक होते है। वे रिश्ते ही हैं, जो दुःख में हमारे साथ होते हैं और मुश्किल समय को समझने और उसको सरल करने में हमारी मदद करते हैं और हमारी खुशियों को दोगुना कर देते हैं। समझिए कि यदि आपके रिश्ते आपके करीबी के साथ बहुत अच्छे हैं, तो आप हमेशा जीवन में खुशहाल और सफल होते जाएंगे पर इसके विपरीत यदि आपका करीबी रिश्ता सही नहीं है तो आपको जीवन में हमेशा दुःख ही का सामना करना पड़ सकता है। उसके आने से लेकर जाने तक की समग्र गाथा ही हमारे जीवन का कड़वा सच है जिसको सब जानबूझकर भी तेरे मेरे में उलझे हैं, जबकि ऐसे अनंत उदाहरण हैं कि लोगों ने विपरीत विचारधारा का होने और रिश्ते नातों से कहीं दूर रहते हुए भी अपने अपने फ़र्ज़ को समझा और जाना एवं एक और एक ग्यारह की भांति काम किया। जीवन कितना जटिल है लेकिन ऐसे लोग उसको सरल सुगम सिद्ध कर सकने में सक्षम होते हैं।
निसंदेह दुनियावी रिश्ते और नाते आभासी होते हैं और मतलब से जुड़े होते हैं, लेकिन कुछ ऐसी विभूतियां भी हैं जो शायद इस दुनिया में सिर्फ और सिर्फ उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए ही जन्मी हैं और वो निरंतर अपने मिशन में संलग्न हैं। उम्र के आखिरी पड़ाव तक आते आते इंसान विविध किस्म के अनुभव कर चुका होता है तथा जीवन का कटु सत्य क्या है? यह भी वह जान चुका होता है।
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