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एक परिवार, चार वर्दियां

एक परिवार, चार वर्दियां


किसान परिवार के बच्चों ने बढ़ाया मान

चंडीगढ़ पुलिस, रेलवे पुलिस, दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस में सेवाएं दे रहे भाई-बहन, संघर्ष और शिक्षा की मिसाल बना सांढवा गांव

संवाददाता, तोशाम (भिवानी)।

उपमंडल के गांव सांढवा का एक साधारण किसान परिवार आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है। खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले किसान अतर सिंह के चार बच्चों ने अलग-अलग सुरक्षा सेवाओं में चयनित होकर खाकी वर्दी पहनने का सपना साकार किया है। हाल ही में जब चारों भाई-बहन पहली बार अपनी-अपनी वर्दी में एक साथ परिवार के बीच पहुंचे तो यह पल पूरे परिवार के लिए भावुक कर देने वाला था। गांव में इस उपलब्धि की चर्चा हर जुबान पर है और लोग इसे मेहनत, अनुशासन तथा शिक्षा की जीत बता रहे हैं।

अतर सिंह ने बताया कि उनके पांच बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटियां और दो बेटे शामिल हैं। बड़े बेटे श्याम सुंदर राजस्थान के सीकर स्थित प्रिंस स्कूल में शिक्षक हैं। इसके साथ ही वे ऑनलाइन माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी करते हैं।

परिवार की बड़ी बेटी सुदेश कुमारी वर्ष 2010 में चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती हुईं। इसके बाद दूसरी बेटी उर्मिला वर्ष 2021 में रेलवे पुलिस में चयनित हुईं। वर्ष 2024 में तीसरी बेटी मोनिका दिल्ली पुलिस में भर्ती हुईं, जबकि सबसे छोटे बेटे अंकित ने हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं।

शिक्षा को बनाया सबसे बड़ा निवेश

किसान अतर सिंह ने बताया कि वे और उनकी पत्नी अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। खेती से होने वाली सीमित आय के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। जरूरत पड़ने पर अन्य खर्चों में कटौती की, लेकिन शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया।

उन्होंने कहा, "हमारे पास धन-दौलत भले ही कम थी, लेकिन हमने बच्चों को शिक्षा का धन देने का संकल्प लिया था। आज वो ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी बन गया है।"

सरकारी स्कूल से शुरू हुआ सफलता का सफर

बड़े भाई श्याम सुंदर ने बताया कि सभी भाई-बहनों ने गांव के सरकारी विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। नियमित अध्ययन, अनुशासन और सही रणनीति के बल पर सभी ने अपने-अपने लक्ष्य हासिल किए।

श्याम सुंदर का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है।

उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा, "संसाधनों की कमी कभी सफलता में बाधा नहीं बनती। यदि समय का सदुपयोग किया जाए और निरंतर प्रयास जारी रहें तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।"

गांव में खुशी का माहौल

चारों भाई-बहनों की सफलता से पूरे सांढवा गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि इस परिवार ने साबित कर दिया कि मेहनत और संस्कार के बल पर गांव के बच्चे भी देश की प्रतिष्ठित सेवाओं में अपनी पहचान बना सकते हैं। गांव के कई युवा अब इन्हें अपना आदर्श मानकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गए हैं।

परिवार के तीन बच्चों का विवाह हो चुका है, जबकि मोनिका और अंकित अभी अविवाहित हैं। परिवार की यह उपलब्धि आज पूरे तोशाम क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।


प्रमुख उपलब्धियां

  • किसान अत्तर सिंह के चार बच्चे खाकी वर्दी में देश सेवा कर रहे हैं।

  • बड़ी बेटी सुदेश कुमारी वर्ष 2010 से चंडीगढ़ पुलिस में कार्यरत हैं।

  • उर्मिला वर्ष 2021 में रेलवे पुलिस में चयनित हुईं।

  • मोनिका वर्ष 2024 में दिल्ली पुलिस में भर्ती हुईं।

  • सबसे छोटे बेटे अंकित वर्ष 2024 से हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल हैं।

  • बड़े भाई श्याम सुंदर शिक्षक होने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की ऑनलाइन तैयारी भी करवाते हैं।


प्रेरक संदेश

"बच्चों को संपत्ति नहीं, अच्छी शिक्षा दीजिए। शिक्षा ऐसा धन है जो हर परिस्थिति में उनका भविष्य संवार देता है।" 

किसान अतर सिंह

सूचना स्रोत

संवाददाता, दैनिक जागरण

 
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