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सीखने के लिए एक हादसा ज़रूरी है

 सीखने के लिए एक हादसा ज़रूरी है

— विजया डालमिया

"कौन सीखता है सिर्फ़ बातों से,
सीखने के लिए एक हादसा ज़रूरी है।"

जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक उपदेश नहीं, अनुभव होता है। दूसरों की कही हुई बातें हमें कुछ समय के लिए प्रभावित अवश्य करती हैं, परंतु जो सीख किसी ठोकर, किसी असफलता, किसी बिछड़न या किसी अप्रत्याशित घटना से मिलती है, वह जीवनभर हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है।

मनुष्य प्रायः कल की चिंता में आज को खो देता है। भविष्य की अनिश्चितताओं का बोझ इतना बढ़ जाता है कि वही चिंता धीरे-धीरे उसकी चिता बनने लगती है। वह वर्तमान की सुंदरता, अपने संबंधों की ऊष्मा और जीवन की सहजता से दूर होता जाता है। जब तक कोई घटना उसे झकझोरती नहीं, तब तक उसे यह एहसास नहीं होता कि जीवन केवल भविष्य की तैयारी नहीं, वर्तमान का उत्सव भी है।

भविष्य को सँवारने के लिए केवल योजनाएँ ही नहीं, कुछ तजुर्बे भी आवश्यक होते हैं। अनुभव ही वह स्याही है जिससे जीवन अपनी सबसे सच्ची कहानी लिखता है। कई बार वे अनुभव दर्द से भरे होते हैं, पर वही हमारे भीतर छिपे सत्य को उजागर करते हैं और हमें स्वयं से परिचित कराते हैं।

हादसे हमेशा हमें तोड़ने नहीं आते। अनेक बार वे हमारी झूठी धारणाओं, अहंकार और भ्रम को तोड़ते हैं, ताकि हम अपने वास्तविक स्वरूप से जुड़ सकें। कभी वे हमें ईश्वर की शरण में ले जाते हैं, तो कभी हमारे भीतर छिपी शक्ति से हमारा परिचय कराते हैं। इस दृष्टि से हर कठिनाई अपने भीतर एक नई शुरुआत का बीज लेकर आती है।

कभी सवाल बनकर, कभी जवाब बनकर,
जाने कितने ही रूप बदलकर।
मिलते हैं हादसे बनकर,
सिखाते हैं जीवन का सबक बनकर।

अतः जीवन में आने वाली प्रत्येक चुनौती को केवल पीड़ा न समझें। संभव है, वही घटना आपको उस ऊँचाई तक पहुँचा दे जहाँ केवल सलाहें कभी नहीं पहुँचा सकती थीं। क्योंकि सच यही है—जो सीख अनुभव देता है, वह शब्द नहीं दे पाते।

सृजक


श्रीमती विजया डालमिया

 
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