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दो शिक्षाविद् और एक मंच

दो शिक्षाविद् और एक मंच 

विचारों, सादगी और समाजबोध का संगम

शिक्षा और साहित्य का संसार केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह व्यक्तित्वों के माध्यम से समाज में अपने प्रभाव की गहरी छाप छोड़ता है। ऐसे ही एक आत्मीय अवसर पर राजस्थान के जोधपुर से स्थापित वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् प्रोफेसर सत्य नारायण जी तथा समाजशास्त्र के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय और चिंतनशील युवा शिक्षाविद् प्रो. राकेश राणा जी का स्नेहिल मिलन हुआ। इस अवसर पर उलझन सुलझन का प्रतिनिधि भी उपस्थित रहा, जिसने इस संवाद और संगति को निकट से अनुभव किया।

प्रोफेसर सत्य नारायण जी का व्यक्तित्व जितना विद्वतापूर्ण है, उतना ही सहज और सरल भी। वर्षों की साहित्यिक साधना, अध्यापन और सामाजिक अनुभव के बावजूद उनके व्यवहार में विनम्रता का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। उनसे मिलते हुए ऐसा प्रतीत होता है मानो ज्ञान का विशाल वृक्ष अपनी छाया में बैठने वालों को बिना किसी आडंबर के शीतलता प्रदान कर रहा हो। उनकी सीधी-सादी जीवनशैली, आत्मीय संवाद शैली और सहज उपलब्धता उन्हें विशिष्ट बनाती है। साहित्य और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

दूसरी ओर प्रो. राकेश राणा समाजशास्त्र के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय चिंतक और कर्मशील शिक्षाविद् के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं। समाज के बदलते स्वरूप, सामाजिक चुनौतियों और मानवीय संबंधों पर उनकी गहरी दृष्टि उन्हें समकालीन समाजशास्त्रीय विमर्शों में महत्वपूर्ण बनाती है। वे केवल अकादमिक अध्ययन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज को समझने और बेहतर बनाने के प्रयासों में भी निरंतर संलग्न दिखाई देते हैं। युवा ऊर्जा, शोधपरक दृष्टिकोण और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें नई पीढ़ी के शिक्षकों में अलग पहचान प्रदान करती है।

इन दोनों शिक्षाविदों की उपस्थिति में *उलझन सुलझन* के प्रतिनिधि ने यह अनुभव किया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान का हस्तांतरण नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, सामाजिक चेतना और सरलता को जीवन में उतारना भी है। एक ओर अनुभव और सादगी से परिपूर्ण वरिष्ठता थी, तो दूसरी ओर नवचिंतन और सामाजिक सक्रियता से ओतप्रोत युवाशक्ति।

यह मिलन केवल तीन व्यक्तियों का साथ नहीं था, बल्कि शिक्षा, साहित्य, समाज और संवेदनशील चिंतन के तीन आयामों का संगम था। ऐसे संवाद और मुलाकातें ही समाज को दिशा देने वाले विचारों की नींव को और अधिक मजबूत बनाती हैं।

साथ-संग

                          विभूति श्री जगराम सिंह के साथ
                        विभूति समागम को संबोधित करते
                   विभूति उलझन सुलझन के प्रतिनिधि के साथ
सूचना स्रोत

उलझन सुलझन परिवार

"उलझनों को समझने और सुलझनों की ओर बढ़ने का साझा प्रयास"।

पाठ्य विस्तार और प्रस्तुति







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