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शोध उन्नयन का विमोचन

आंखों देखा हाल 

शोध उन्नयन का विमोचन

एक अकादमिक उत्सव का सजीव क्षण

17 अप्रैल 2026 की वह सुबह मेरे लिए केवल एक तारीख नहीं थी, बल्कि ज्ञान और शोध की नई दिशा का साक्षी बनने का अवसर थी। जैसे ही मैं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के प्रशासनिक भवन की ओर बढ़ा, भीतर एक अलग ही उत्साह था—एक ऐसा उत्साह, जो शब्दों से नहीं, बल्कि वातावरण से महसूस हो रहा था।

वीसी चैंबर में प्रवेश करते ही एक गरिमामय शांति और बौद्धिक ऊर्जा का संगम दिखाई दिया। सामने कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत विराजमान थे—उनकी उपस्थिति ही कार्यक्रम की गंभीरता और महत्व को रेखांकित कर रही थी। थोड़ी ही देर में औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ हुई, और वह क्षण आया जब “इंटरनेशनल रिसर्च जर्नल ‘शोध उन्नयन’” के दूसरे अंक के चतुर्थ इशू का विमोचन हुआ।

जैसे ही कुलगुरु महोदय ने जर्नल की प्रति को अपने हाथों में लेकर उसका उद्घाटन किया, उस क्षण में एक अद्भुत संतोष और उपलब्धि की झलक थी—मानो वर्षों की मेहनत, शोध और समर्पण एक साथ आकार ले रहे हों। मेरे लिए यह दृश्य केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि शोध संस्कृति के विस्तार का प्रतीक था।

मैंने, बतौर संस्थान अध्यक्ष और प्रधान संपादक, जब इस जर्नल के प्रकाशन की प्रक्रिया और उद्देश्य पर प्रकाश डाला, तो भीतर एक गर्व का अनुभव था। “शोध उन्नयन” केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि उन शोधकर्ताओं के सपनों का मंच है, जो अपने विचारों से समाज और ज्ञान की सीमाओं को विस्तारित करना चाहते हैं।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों—श्री मुकेश बारबर (उप-कुलसचिव), श्री अविनाश पंवार (निदेशक, कंप्यूटर सेंटर), प्रो. सी.पी. जैन (अधिष्ठाता, विज्ञान महाविद्यालय), प्रो. नीरज शर्मा (विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग), प्रो. आनंद पालीवाल (अधिष्ठाता, विधि महाविद्यालय) एवं श्री प्रवीण सिंह सारंगदेवत—सभी के चेहरे पर इस उपलब्धि की खुशी स्पष्ट झलक रही थी। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक गरिमा प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान वातावरण में केवल शब्द नहीं थे, बल्कि एक साझा संकल्प था—शोध को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का, युवा प्रतिभाओं को मंच देने का, और अकादमिक जगत में सार्थक योगदान करने का।

जब कार्यक्रम समाप्ति की ओर बढ़ा, तो मेरे मन में एक ही विचार बार-बार उभर रहा था—यह तो बस शुरुआत है। “शोध उन्नयन” का यह अंक आने वाले समय में शोध के क्षेत्र में एक नई दिशा और ऊर्जा का संचार करेगा।

उस दिन मैं केवल एक सहभागी नहीं था, बल्कि एक ऐसे पल का साक्षी था, जो आने वाले समय में अनेक शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

झलकी

सूचना स्रोत 

डॉ शैलेंद्र मौर्य 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 









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