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नौसेना के जनक और मराठा का गौरव....

 नौसेना के जनक और मराठा का गौरव....

भूमिका

नौसेना के जनक और मराठा गौरव के रूप में विख्यात छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन केवल ऐतिहासिक गाथा नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और स्वाभिमान का अद्वितीय प्रतीक है। उनका व्यक्तित्व हमें यह सिखाता है कि दृढ़ संकल्प, मातृभूमि के प्रति समर्पण और दूरदर्शिता के बल पर कोई भी साधारण बालक असाधारण नायक बन सकता है। बाल्यकाल से ही उनके भीतर नेतृत्व, पराक्रम और स्वतंत्रता की ज्वाला प्रज्वलित थी, जिसे उनकी माता राजमाता जीजाबाई के संस्कारों ने और भी प्रखर बनाया। यही कारण है कि शिवाजी का जीवन केवल मराठा इतिहास का गौरव नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। प्रस्तुत आलेख में उनके जीवन, संघर्ष, कूटनीति, सैन्य कौशल तथा राष्ट्रनिर्माण में उनके अमूल्य योगदान का संक्षिप्त, किंतु प्रभावपूर्ण चित्रण किया गया है।

आलेख

नवजात शिशु का रुदन भविष्य में कब नव सृजन बन जाए कोई नहीं जानता। धरती पर कुछ ऐसी हस्तियाँ जन्म लेती है जिनके कर्म लोगों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं और वे सदियों तक याद किए जाते हैं।

गणराज्य के महानायक... हिंदू हृदय सम्राट और मराठा गौरव के नाम से पहचाने जाने वाले छत्रपति शिवाजी बचपन से ही नायक का भाव लिए अपने दोस्तों के साथ युद्ध करके किले जीतने वाला खेल खेला करते थे। जब वे बड़े हुए तब उन्होंने इसे अंजाम दिया और कर्म शत्रु बनकर शत्रुओं के किले जीते। शिवाजी को एक शक्तिशाली योद्धा बनाने में उनकी मां जीजाबाई का सबसे बड़ा योगदान रहा। सिंहगढ़ के किले पर मुगलों के झंडे को देखकर जीजाबाई दु:खी हो जाती थीं। तब उन्होंने ललकारते हुए अपने शिव से कहा.... "जब तुम इस गढ़ पर अपना झंडा फहरा लोगे तभी तुम मेरे पुत्र हो ऐसा मैं समझूंगी"। 

शिवाजी एक आज्ञाकारी पुत्र थे। उन्होंने माता की आज्ञा का पालन किया और सिंहगढ के किले को जीतने के लिए अपने अजीज दोस्त तानाजी को खो दिया। बहुत दु:खी होते हुए तब उन्होंने कहा.. "गढ़ आला पन सिंह गेला"। 

हिन्दवी स्वराज की शपथ लेकर मुगलों को घुटना टेकने पर मजबूर कर देने वाले शिवाजी ने भारत में पहली बार 'गोरिल्ला युद्ध' अर्थात 'छापा मार' युद्ध का आरंभ किया। वे 'पहाड़ी चूहा' के नाम से मशहूर थे। वह संस्कृति और हिंदू राजनीतिक परंपराओं का विस्तार चाहते थे इसलिए फारसी के स्थान पर मराठी और संस्कृत भाषा को उन्होंने राजकाज की भाषा बनाया। उनका संपूर्ण जीवन स्वतंत्रता और संघर्ष का प्रतीक है। वे राजनीति और कूटनीति में मंझे हुए खिलाड़ी थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज को नौसेना के जनक के रूप में जाना जाता है। बाद में यही शक्तिशाली स्वदेशी नौसेना की नींव भारतीय नौसेना के विकास में काम आई। नौसेना के झंडे में भी शिवाजी का प्रतीक चिन्ह शामिल किया गया है।

मां तुलजा भवानी के उपासक ने 'जय भवानी' का नारा दिया। उनका कहना था कि कोई भी कार्य करने से पहले उसका परिणाम सोच लेना चाहिए क्योंकि हमारी आने वाली पीढ़ी उसी का अनुसरण करती है। उनकी वीरता लोगों को हमेशा हिम्मत देती रहे इसीलिए हर साल उनकी जयंती को उत्सव के रूप में गाजे-बाजे के साथ मनाकर उन्हें याद किया जाता है। शिवाजी जयंती पर महाराष्ट्र में राजकीय अवकाश होता है और पर्व की तरह हर तरफ उल्लास छाया होता है।

हर मराठा पागल है ... स्वराज का .....शिवाजी राजे का...

सूचना स्रोत 

विजया डालमिया 

राष्ट्रीय संयोजिका 

उलझन सुलझन (लेडीज लेखिका विंग)

हैदराबाद (तेलंगाना)

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 






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