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फिफ्टी प्लस – द टैलेन्ट शो की योजना

फिफ्टी प्लस – द टैलेन्ट शो

स्मृतियों  और विचारों का विहंगमावलोकन

किसी भी सामाजिक पहल के पीछे केवल एक कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि उसके भीतर अनुभव, संवेदनाएँ और समाज के प्रति एक गहरी जिम्मेदारी छिपी होती है। मेरा वजूद फाउंडेशन के चेयरमैन श्री प्रवेंद्र दहिया के मन में भी फिफ्टी प्लस – द टैलेन्ट शो का विचार इसी भावभूमि से जन्मा प्रतीत होता है।

जब फाउंडेशन की मासिक बैठक में इस आयोजन की रूपरेखा सामने आई, तो यह केवल एक प्रतियोगिता की घोषणा भर नहीं थी, बल्कि जीवन के उस पड़ाव को सम्मान देने का प्रयास था, जिसे समाज अक्सर अनुभव का खजाना मानते हुए भी मंच नहीं दे पाता। पचास वर्ष की आयु पार कर चुके अनेक लोग अपने भीतर प्रतिभा, कला और जीवन अनुभवों का विशाल भंडार लिए हुए होते हैं, परंतु परिस्थितियाँ, जिम्मेदारियाँ और अवसरों की कमी के कारण उनका हुनर अक्सर घर की चौखट तक ही सीमित रह जाता है।

ऐसी ही स्थितियों पर विचार करते हुए श्री प्रवेंद्र दहिया के मन में यह भाव उभरा होगा कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। जीवन के इस पड़ाव पर भी व्यक्ति उतना ही सृजनशील और प्रेरणादायक हो सकता है जितना युवावस्था में। यही सोच फिफ्टी प्लस – द टैलेन्ट शो जैसे मंच की प्रेरणा बनी।

उनकी दृष्टि में यह कार्यक्रम केवल कला प्रदर्शन का अवसर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास को पुनर्जीवित करने का उत्सव है। गायन, नृत्य, योग, साहित्य, फोटोग्राफी, पत्रकारिता, खेल या सामाजिक नेतृत्व जैसे बाईस विभिन्न वर्गों को शामिल करना इस बात का प्रमाण है कि फाउंडेशन हर प्रकार की प्रतिभा को सम्मान देना चाहता है। यह विचार इस विश्वास को भी प्रकट करता है कि समाज की वास्तविक शक्ति उन अनुभवी व्यक्तियों में निहित है जिन्होंने जीवन की लंबी यात्रा तय करते हुए अपने भीतर विविध क्षमताएँ विकसित की हैं।

संभवतः अपने अनुभवों और समाज के अनेक ऐसे प्रतिभाशाली लोगों से मुलाकातों को स्मरण करते हुए ही दहिया जी ने सोचा होगा कि यदि इन लोगों को एक मंच दिया जाए, तो वे न केवल अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करेंगे बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेंगे।

यही कारण है कि इस आयोजन को पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि आर्थिक कारण किसी भी प्रतिभा के मार्ग में बाधा न बन सके।

इस दृष्टि से “फिफ्टी प्लस – द टैलेन्ट शो” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संदेश है—

कि जीवन की आधी सदी पार करना अंत नहीं, बल्कि अनुभव और प्रतिभा के नए अध्याय का आरंभ भी हो सकता है।

मेरा वजूद फाउंडेशन का यह प्रयास समाज को यह याद दिलाने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है कि हर व्यक्ति का “वजूद” उसकी उम्र से नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे हुनर और आत्मविश्वास से बनता है।

आइडिया

 
श्री प्रवेंद्र सिंह
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 






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