सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

उपलब्धि

ग्रेटर नोएडा। साहित्यिक एवं वैचारिक मासिक पत्र उलझन सुलझन की ग्रेटर नोएडा लेडीज़ विंग की स्थानीय सम्पादिका डॉ. नाज़ परवीन के मार्गदर्शन में अध्ययनरत उनकी छात्रा राखी नागर ने शैक्षणिक एवं बौद्धिक क्षेत्र में सराहनीय उपलब्धि अर्जित की है।


श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर (ग्रेटर नोएडा) में एम.ए. प्रथम सेमेस्टर की छात्रा राखी नागर ने यूनिवर्सिटी स्तर पर आयोजित डिबेट प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त कर न केवल स्वयं को, बल्कि अपने शिक्षकों और संस्थान को भी गौरवान्वित किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस प्रतियोगिता के लिए पहले महाविद्यालय स्तर पर चयन प्रक्रिया हुई, जिसमें श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज से एक छात्र शशांक और दो छात्राएँ अनामिका एवं राखी नागर भाषण प्रतियोगिता के लिए तथा तीन छात्राएँ; रोबिना व सायमा खान व आशु शर्मा; काव्य पाठ के लिए चयनित की गईं। इसके उपरांत विभिन्न महाविद्यालयों से चयनित प्रतिभागियों के बीच विश्वविद्यालय स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें राखी नागर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए तृतीय स्थान अर्जित किया।

इस अवसर पर डॉ. नाज़ परवीन ने अपनी छात्रा के प्रति विशेष भाव व्यक्त करते हुए कहा—

“राखी नागर की यह उपलब्धि उसकी अध्ययन के प्रति गंभीरता, निरंतर परिश्रम और विचारों की स्पष्टता का परिणाम है। वह केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विषय को समझने, सोचने और उसे प्रभावी रूप में अभिव्यक्त करने की ईमानदार कोशिश करती है। एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा संतोष कुछ नहीं कि उसकी छात्रा सही दिशा में आगे बढ़ रही हो।”

डॉ. नाज़ ने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी में यदि राखी जैसी छात्राएँ अध्ययन के साथ-साथ संवाद, तर्क और विचार-विमर्श में सक्रिय हैं, तो यह समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे विचारशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार होते हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस के अवसर पर राखी नागर को इस उपलब्धि के लिए औपचारिक रूप से पुरस्कृत किया जाएगा। प्रेरणा और विचारशीलता के प्रतीक इस दिवस पर छात्रा का सम्मान होना उसकी सफलता को और भी अर्थपूर्ण बनाता है।

उलझन सुलझन परिवार एवं लेडीज़ विंग नोएडा की ओर से राखी नागर को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं तथा यह विश्वास व्यक्त किया गया कि वह आगे भी शिक्षा और विचार के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को स्पर्श करेगी।

सूचना स्रोत 

डॉ नाज परवीन 

स्थानीय सम्पादिका 

उलझन सुलझन (लेडीज विंग)

नोएडा

प्रस्तुति


 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...