फिर से बचपन जी रहे हैं हम
आज से 27 वर्ष पहले, 1999 में, जब हमारे विद्यालय में हमारी फेयरवेल पार्टी हुई थी, तो हम बहुत उत्साहित थे। उस दिन विद्यालय में हमारा अंतिम दिन था। हमें विद्यालय छोड़ने का दु:ख भी था और उत्सव मनाने की खुशी भी। मन के भीतर दोनों भाव एक साथ चल रहे थे। इसके साथ-साथ परीक्षा की तैयारी का दबाव भी था, परंतु फेयरवेल पार्टी के दिन हम सब कुछ भूल गए थे। हमें केवल अपनी फेयरवेल पार्टी ही याद थी।
हम सारी सहेलियाँ आपस में चर्चा कर रही थीं कि हम क्या पहनेंगे, कैसे दिखेंगे और टीचर्स के साथ फोटो खिंचवाएँगे। अपने जीवन में पहली बार मैंने 12वीं कक्षा की फेयरवेल पार्टी में साड़ी पहनी थी। मैंने वह साड़ी पिताजी से छुपकर पहनी थी; कहीं यदि उन्होंने देख लिया तो बहुत ज़ोर से डाँट पड़ जाती। वह साड़ी भी बड़ी मिन्नतों के बाद अपनी बड़ी बहन से माँगी थी, जिनकी तभी शादी हुई थी।
फेयरवेल पार्टी का दिन कितना रोमांचक था! हमारे विद्यालय में विदाई समारोह का प्रारंभ माँ शारदे की वंदना से हुआ और फिर रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसके बाद हमने सभी टीचर्स को टाइटल दिए।
फेयरवेल पार्टी के बाद 12वीं कक्षा की मेरी वे सहेलियाँ फिर मुझे कभी नहीं मिलीं; अब यादों के रूप में सिर्फ उनकी तस्वीरें ही मेरे पास हैं। इसलिए जब भी हमारे विद्यालय में बच्चे फेयरवेल पार्टी के बारे में बातें करते हैं, तो मैं उन्हें कभी मना नहीं करती। मैं जानती हूँ कि इस पार्टी का उनके जीवन में कितना महत्व है।
इसके बाद इन सभी बच्चों के कंधों पर ज़िम्मेदारी आ जाती है; फिर वे इस तरह खिलखिलाकर और बेफ़िक्री से नहीं जी पाते। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, व्यक्ति के ऊपर ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ती जाती हैं और उसका बचपन वे ज़िम्मेदारियाँ खा जाती हैं। विद्यालय की पढ़ाई के बाद बच्चों को नौकरी और व्यावसायिक शिक्षा की चिंता सताने लगती है। वे अपने जीवन में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, अध्यापक बनना चाहते हैं, इसलिए अलग-अलग तरह के प्रोफेशनल कोर्स चुनते हैं।
हर कोई किसी अलग कॉलेज में प्रवेश लेता है, या बहुत-से बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी शादियाँ हो जाती हैं या जिनकी पढ़ाई रुक जाती है। अभी तक इन सब बच्चों की ज़िंदगी एक-सी चल रही होती है, परंतु जैसे ही ये बच्चे बड़े होते हैं, सभी के जीवन में अलग-अलग तरह के बदलाव आते हैं और इन बदलावों से वे जूझते हैं। ऐसे में खुशी के ये पल उनके जीवन को संबल प्रदान करते हैं। छोटी-छोटी खुशियाँ व्यक्ति के जीवन में खुशहाली भर देती हैं।
रचनाकार
अनिता चेची
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति




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