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विज्ञान और इंजीनियरिंग के संतुलन को प्रस्तुत करता दंपति

भूमिका 

ज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार जब एक ही परिवार में संवाद करते हैं, तो उनका प्रभाव समाज तक गहराई से पहुँचता है। डॉ. रंजना भाटी, जो एल्गल बायोटेक्नोलॉजी और शैवाल आधारित जैवईंधन के क्षेत्र में उच्च स्तरीय शोध कर चुकी हैं, और सुनील खटाना, एक मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में तकनीकी समाधान और व्यावहारिक सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं—दोनों मिलकर विज्ञान और इंजीनियरिंग के उस संतुलन को प्रस्तुत करते हैं, जिसकी आज के युग में अत्यंत आवश्यकता है। 

एल्गल बायोटेक्नोलॉजी एवं जैव ईंधन शोधकर्ता डॉ. रंजना भाटी

प्रश्न १. सबसे पहले आप अपने शैक्षणिक सफर के बारे में बताइए।

उत्तर : "मेरा शैक्षणिक सफर विज्ञान के प्रति जिज्ञासा से शुरू हुआ। मैंने वनस्थली विद्यापीठ, जयपुर से एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोटेक्नोलॉजी में एम.एससी. की। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर से एल्गल बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी पूरी की, जहाँ सूक्ष्म शैवाल के औद्योगिक और पर्यावरणीय उपयोगों पर गहन शोध किया। आगे जेएनयू, दिल्ली के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज़ से शैवाल आधारित जैव ईंधन पर पोस्ट-डॉक्टरेट किया।"

प्रश्न २. एल्गल बायोटेक्नोलॉजी को आपने अपना शोध-क्षेत्र क्यों चुना?

उत्तर : "शैवाल भविष्य की सतत ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त माध्यम हैं। वे कम संसाधनों में अधिक उत्पादन क्षमता रखते हैं और जैवईंधन, पोषक तत्व, औषधि तथा कार्बन अवशोषण जैसे अनेक क्षेत्रों में उपयोगी हैं। इसी बहुआयामी संभावना ने मुझे इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया।"

प्रश्न ३. आपके शोध का समाज के लिए क्या महत्व है?

उत्तर : "मेरा शोध स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरणीय संतुलन और वैकल्पिक संसाधनों के विकास से जुड़ा है। शैवाल आधारित जैव ईंधन जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटा सकता है और ग्रामीण-औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।"

प्रश्न ४. विज्ञान में करियर बनाने वाली युवतियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर : "आत्मविश्वास रखें, निरंतर सीखते रहें और असफलताओं से न डरें। विज्ञान में धैर्य और अनुशासन बहुत आवश्यक है। यदि उद्देश्य स्पष्ट हो, तो राह स्वयं बनती जाती है।"

यांत्रिक अभियंता – मैकेनिकल इंजीनियरिंग श्री सुनील खटाना

प्रश्न १. आपने मैकेनिकल इंजीनियरिंग को ही करियर के रूप में क्यों चुना?

उत्तर : "मशीनों, संरचनाओं और प्रणालियों को समझने की रुचि मुझे शुरू से रही है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग एक ऐसा क्षेत्र है जो ऊर्जा, निर्माण, ऑटोमोबाइल और उत्पादन—हर जगह अपनी उपयोगिता सिद्ध करता है। इसी व्यावहारिकता ने मुझे इस विषय की ओर प्रेरित किया।"

प्रश्न २. एक मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में आपकी सोच क्या है?

उत्तर : "मेरा मानना है कि इंजीनियरिंग का मूल उद्देश्य समस्याओं का समाधान करना है—कम लागत, अधिक दक्षता और टिकाऊ तकनीक के साथ। आज के समय में ऊर्जा संरक्षण और स्मार्ट डिजाइन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।"

प्रश्न ३. विज्ञान और इंजीनियरिंग के समन्वय को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर : "विज्ञान सिद्धांत देता है और इंजीनियरिंग उसे व्यवहार में बदलती है। यदि दोनों का समन्वय हो, तो नवाचार की गति कई गुना बढ़ जाती है—चाहे वह जैव ईंधन हो, मशीन डिज़ाइन हो या औद्योगिक समाधान।"

प्रश्न ४. युवा इंजीनियरों के लिए आपका संदेश?

उत्तर : "केवल डिग्री नहीं, कौशल विकसित करें। तकनीक लगातार बदल रही है, इसलिए सीखने की प्रक्रिया कभी रुकनी नहीं चाहिए। व्यावहारिक अनुभव और नैतिकता—दोनों समान रूप से आवश्यक हैं।"

सूचना स्रोत 

श्री तेजपाल भाटी जी

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 





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