पथिक जयंती पर सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता प्रस्तावित
(संवाद, संवेदना और पत्र लेखन की पुनर्स्थापना के संदर्भ में)
संवाद-सम्प्रेषण और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम पत्र रहे हैं। इतिहास साक्षी है कि पत्रों ने केवल व्यक्तिगत भावनाओं को ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय जागरण और जनसंवाद को भी दिशा दी है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय अनेक क्रांतिकारियों और राष्ट्रनायकों ने अपने विचारों को जनमानस तक पहुँचाने के लिए पत्र, लेख और समाचार-पत्रों का प्रभावी उपयोग किया।
राजस्थान की धरती विशेष रूप से विजय सिंह पथिक के योगदान को सदैव स्मरण करती है। उनका मूल नाम भूप सिंह था और उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र राजस्थान रहा। वे विशेष रूप से बिजौलिया किसान आंदोलन के कारण प्रसिद्ध हुए, जहाँ उन्होंने किसानों को संगठित करने, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने और अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश पत्रों के माध्यम से दिया। प्रारंभिक जीवन में वे क्रांतिकारी मार्ग के समर्थक थे, किन्तु बाद में महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर अहिंसात्मक विचारधारा की ओर उन्मुख हुए।
पथिक जी राष्ट्रवादी लेखक, निर्भीक पत्रकार, किसान नेता और समाज-सुधारक थे। उनका साहित्य मनोरंजन प्रधान न होकर जागरण प्रधान था। उन्होंने लेखों, पुस्तकों और निबंधों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और तथ्यपरक थी, जिसमें शोषित वर्ग की पीड़ा का सशक्त चित्रण तथा देशभक्ति और सामाजिक न्याय की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी प्रसिद्ध कृति *What Are Indian States?* भारतीय रियासतों की वास्तविक स्थिति को उजागर करने वाली एक महत्त्वपूर्ण कृति है, जिसमें उन्होंने सामंती व्यवस्था की आलोचना करते हुए जनता को संगठित होने का संदेश दिया।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने समाचार-पत्रों को जनजागरण का सशक्त हथियार माना। उनके संपादकीय लेखों का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक अन्याय और शोषण के विरुद्ध जागरूकता तथा राष्ट्रीय एकता का प्रचार था। उन्होंने अपने लेखन में किसानों, मजदूरों और आम जनता की समस्याओं को प्रमुखता दी। उनकी निर्भीक पत्रकारिता अंग्रेजी शासन और सामंती शक्तियों के लिए चुनौती सिद्ध हुई।
वर्तमान समय में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण संवाद की आत्मीयता और संवेदनात्मक अभिव्यक्ति में कमी अनुभव की जा रही है। परिवार और समाज में संवाद का स्थान संक्षिप्त संदेशों ने ले लिया है, जिससे भावनात्मक निकटता प्रभावित हुई है। ऐसे परिदृश्य में पत्र लेखन पुनः मानवीय संबंधों को सुदृढ़ करने, संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने तथा रचनात्मक लेखन को विकसित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री सूरज सिंह नेगी तथा उनकी पत्नी डॉ. मीना सिरोला (प्रोफेसर, शिक्षा संकाय, वनस्थली विद्यापीठ) ने 5 सितम्बर 2018, शिक्षक दिवस के अवसर पर “पाती अपनों को” मुहिम का शुभारंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य लुप्त होती पत्र लेखन परंपरा को पुनर्जीवित करना, रचनात्मक लेखन को प्रोत्साहित करना, संवेदनात्मक अभिव्यक्ति को विकसित करना तथा रिश्तों में संवाद को बढ़ावा देना है।
इस मुहिम का प्रभाव व्यापक रहा है और देश-विदेश से पत्र प्राप्त होने लगे हैं। अब तक तेईस विषयों पर पत्र लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा चुका है तथा पत्रों के आधार पर पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। लगभग सवा तीन लाख पत्र लिखवाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग ढाई लाख पत्र स्कूली विद्यार्थियों द्वारा लिखे गए हैं। इस अभियान से साहित्यकारों, विज्ञान लेखकों, शिक्षकों और आमजन की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित हुई है।
इन पत्रों की विषय-वस्तु केवल पारिवारिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जीव संरक्षण, सामाजिक सरोकार, राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों जैसे व्यापक विषयों को भी समाहित करती है। “प्रहरी की पाती मानव के नाम”, “गौरैया को पाती”, “युवाओं को पाती”, “पानी और जवानों को पाती”, “लेखकों को पाती” तथा “बापू की बिट्टी (मेरी जुबानी)” जैसी विषयगत पहलें इस अभियान की संवेदनशीलता और सामाजिक उपयोगिता को स्पष्ट करती हैं।
पथिक जी की जयंती (27 फरवरी) के अवसर पर यह प्रतियोगिता उनके पत्रों, लेखन, पत्रकारिता और जनजागरण की विरासत को समझने तथा पत्र लेखन की परंपरा को पुनर्जीवित करने की प्रेरणा प्रदान करती है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि संगठित चेतना, साहित्य, पत्रकारिता और संवाद के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन संभव है तथा अन्याय के विरुद्ध सजग रहना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
भाग १ : विजय सिंह पथिक संबंधी प्रश्न
इस भाग के प्रश्नों के सृजन में समग्र प्रयास विजय सिंह पथिक की अंग्रेजी में सृजित पुस्तक के अनुवादक श्री नरेंद्र नागर जी का था तो उनको साधुवाद इसलिए भी क्योंकि उन्होंने अपने व्यस्ततम समय में भी इस काम को तीव्र गति से (मात्र दो दिन में छप्पन प्रश्नोत्तर तथा इनकी सहायतार्थ पाठ्य भी) यदि अंजाम दे दिया तो यह प्रश्नोत्तरी तैयार हो सकी। ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिनका उपयोग इस प्रयास के अंतर्गत नहीं किया जा सका है तो उनका सदुपयोग भी भविष्य में निश्चित रूप से किया जाएगा।
श्री नरेंद्र सिंह जी ने श्री विजय सिंह पथिक जी पर बेहद आकर्षक एक वेबसाइट का सृजन भी किया है जो श्री विजय सिंह पथिक जी जैसे कर्मयोगियों को ध्यान में रखकर किए जाने वाले शोधों में सहायक हो सकेगी।
प्रश्न १. विजय सिंह पथिक जी का मूल नाम क्या था?
(अ) रामसिंह
(ब) भूप सिंह
(स) हरिसिंह
(द) श्याम सिंह
प्रश्न २. विजय सिंह पथिक जी का प्रमुख कार्यक्षेत्र कौन सा क्षेत्र रहा?
(अ) पंजाब
(ब) बंगाल
(स) राजस्थान
(द) असम
प्रश्न ३. पथिक जी किस आंदोलन से सर्वाधिक प्रसिद्ध हुए?
(अ) चंपारण आंदोलन
(ब) बिजौलिया किसान आंदोलन
(स) दांडी मार्च
(द) खेड़ा आंदोलन
प्रश्न ४. पथिक जी प्रारंभ में किस मार्ग के समर्थक थे?
(अ) अहिंसा
(ब) संवैधानिक सुधार
(स) क्रांतिकारी मार्ग
(द) विदेशी सहयोग
प्रश्न ५. बाद में पथिक जी किस विचारधारा की ओर उन्मुख हुए?
(अ) समाजवाद
(ब) अहिंसा
(स) साम्यवाद
(द) पूंजीवाद
प्रश्न ६. पथिक जी किस महापुरुष के विचारों से प्रभावित हुए?
(अ) सुभाषचंद्र बोस
(ब) महात्मा गांधी
(स) भगत सिंह
(द) चंद्रशेखर आजाद
प्रश्न ७. पथिक जी का लेखन मुख्यतः किस क्षेत्र से संबंधित था?
(अ) विज्ञान
(ब) गणित
(स) साहित्य एवं पत्रकारिता
(द) चिकित्सा
प्रश्न ८. पथिक जी ने समाचार-पत्रों का उपयोग मुख्यतः किस उद्देश्य से किया?
(अ) मनोरंजन के लिए
(ब) व्यापार प्रचार के लिए
(स) राष्ट्रीय चेतना और जनजागरण के लिए
(द) व्यक्तिगत प्रसिद्धि के लिए
प्रश्न ९. पथिक जी की पत्रकारिता का प्रमुख विषय क्या था?
(अ) खेल समाचार
(ब) किसानों और शोषित वर्ग की समस्याएँ
(स) फिल्म समीक्षा
(द) फैशन
प्रश्न १०. पथिक जी किस प्रकार के पत्रकार माने जाते थे?
(अ) सरकार समर्थक
(ब) निर्भीक और राष्ट्रवादी
(स) तटस्थ
(द) व्यावसायिक
प्रश्न ११. पथिक जी ने अपने पत्रों और लेखों के माध्यम से मुख्यतः किसके विरुद्ध आवाज उठाई?
(अ) शिक्षा व्यवस्था
(ब) सामाजिक अन्याय और शोषण
(स) भाषा विवाद
(द) खेल नीति
प्रश्न १२. पथिक जी की प्रसिद्ध कृति What Are Indian States? का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(अ) साहित्यिक मनोरंजन
(ब) भारतीय रियासतों की वास्तविक स्थिति को उजागर करना
(स) विज्ञान का प्रचार
(द) व्यापारिक जानकारी देना
भाग २ : पाती अभियान संबंधी प्रश्न
इस भाग के प्रश्नों के सृजन में एकल प्रयास पाती अपनों की के सृजक डॉ श्री सूरज सिंह नेगी जी दंपति का था तो उनको साधुवाद
प्रश्न १. ‘पाती अपनों को’ मुहिम का मूल उद्देश्य क्या है?
(अ) लुप्त होती पत्र लेखन परंपरा को पुनर्जीवित करना
(ब) केवल मित्रों को पत्र लिखवाना
(स) मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित करना
(द) प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराना
प्रश्न २. ‘पाती अपनों को’ मुहिम की शुरुआत किसके द्वारा की गई?
(अ) डॉ. सूरज सिंह नेगी
(ब) डॉ. मीना सिरोला
(स) डॉ. सूरज सिंह नेगी एवं डॉ. मीना सिरोला
(द) डॉ. रमेश शर्मा
प्रश्न ३. इस मुहिम की औपचारिक शुरुआत कब हुई?
(अ) 5 सितम्बर 2017
(ब) 5 सितम्बर 2018
(स) 5 सितम्बर 2019
(द) 5 सितम्बर 2020
प्रश्न ४. इस अभियान के अंतर्गत अब तक कितनी पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है?
(अ) 10
(ब) 12
(स) 15
(द) 20
प्रश्न ५. अब तक लगभग कितने पत्र लिखवाए जा चुके हैं?
(अ) लगभग 50 हजार
(ब) लगभग 1 लाख
(स) लगभग सवा तीन लाख
(द) लगभग 5 लाख
प्रश्न ६. लिखवाए गए पत्रों में से अधिकतर पत्र किनके द्वारा लिखे गए हैं?
(अ) अधिकारियों द्वारा
(ब) साहित्यकारों द्वारा
(स) स्कूली विद्यार्थियों द्वारा
(द) पत्रकारों द्वारा
प्रश्न ७. पाती मुहिम का एक प्रमुख लक्ष्य क्या है?
(अ) तकनीकी ज्ञान बढ़ाना
(ब) रचनात्मक लेखन का विकास
(स) केवल औपचारिक शिक्षा
(द) खेल प्रशिक्षण
प्रश्न ८. इस अभियान में पत्रों की विषय-वस्तु किन विषयों को समाहित करती है?
(अ) केवल पारिवारिक संबंध
(ब) केवल राजनीति
(स) पर्यावरण, सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्य
(द) केवल विज्ञान
प्रश्न ९. ‘गौरैया को पाती’ जैसी पहल किस प्रकार की रचनात्मक अभिव्यक्ति का उदाहरण है?
(अ) वैज्ञानिक शोध
(ब) पत्र लेखन आधारित संवेदनात्मक अभिव्यक्ति
(स) नाटक लेखन
(द) समाचार रिपोर्टिंग
प्रश्न १०. पाती मुहिम का सामाजिक प्रभाव क्या है?
(अ) संवाद और संवेदनाओं को सुदृढ़ करना
(ब) केवल प्रतियोगिता आयोजित करना
(स) व्यावसायिक लाभ कमाना
(द) तकनीकी प्रशिक्षण देना
प्रश्न ११. यह मुहिम मुख्य रूप से किस मूल्य को पुनर्स्थापित करने का प्रयास करती है?
(अ) प्रतिस्पर्धा
(ब) संवाद और संवेदना
(स) औद्योगिक विकास
(द) मनोरंजन
प्रश्न १२. पत्र लेखन को वर्तमान समय में पुनः प्रासंगिक क्यों माना जा रहा है?
(अ) क्योंकि यह सस्ता माध्यम है
(ब) क्योंकि यह भावनात्मक अभिव्यक्ति और आत्मीय संवाद को सशक्त बनाता है
(स) क्योंकि यह अनिवार्य विषय है
(द) क्योंकि यह केवल औपचारिक परंपरा है
प्रश्न १३. पाती मुहिम का व्यापक उद्देश्य क्या है?
(अ) रचनात्मक लेखन में सुधार
(ब) भावनात्मक अभिव्यक्ति को विकसित करना
(स) रिश्तों में संवाद को बढ़ावा देना
(द) उपरोक्त तीनों
प्रश्न १४. पथिक जयंती पर पत्र आधारित प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य क्या है?
(अ) केवल ऐतिहासिक जानकारी देना
(ब) पत्र लेखन, जनजागरण और राष्ट्रीय चेतना को समझना
(स) मनोरंजन करना
(द) पुरस्कार वितरण करना
उत्तरमाला
भाग १
1–ब, 2–स, 3–ब, 4–स, 5–ब, 6–ब, 7–स, 8–स, 9–ब, 10–ब, 11–ब, 12–ब
भाग २
1–अ, 2–स, 3–ब, 4–स, 5–स, 6–स, 7–ब, 8–स, 9–ब, 10–अ, 11–ब, 12–ब, 13–द, 14–ब
प्रेस वार्ता हेतु आह्वान पाठ्य
पथिक जयंती पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता
सादर नमस्कार।
पथिक जयंती के पावन अवसर पर महान जननायक विजय सिंह पथिक के व्यक्तित्व और कृतित्व को केंद्र में रखते हुए एक विशेष “पत्रों एवं सामान्य ज्ञान आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता” का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बालकों में जागरूकता, संवेदनशीलता, संवादशीलता और राष्ट्रीय चेतना का विकास करना है।
पथिक जी ने अपने जीवन में लेखन, पत्रकारिता और जनजागरण के माध्यम से समाज को संगठित चेतना का संदेश दिया। उनके विचार आज भी हमें यह प्रेरणा देते हैं कि जागरूक नागरिक बनने की शुरुआत ज्ञान, विचार और संवेदनशील अभिव्यक्ति से होती है। इसी प्रेरणा को बाल पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए यह प्रतियोगिता एक रचनात्मक माध्यम के रूप में आयोजित की जा रही है।
इस पहल को राजस्थान में चल रहे “पाती अभियान” की भावना से भी जोड़ा गया है, जिसका मूल उद्देश्य पत्र लेखन के माध्यम से संवाद, संवेदना और मानवीय मूल्यों को पुनर्जीवित करना है। आज के समय में जब संवाद संक्षिप्त और औपचारिक होता जा रहा है, तब बच्चों को विचारपूर्ण अभिव्यक्ति और संवेदनात्मक लेखन से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
यह प्रतियोगिता पूर्णतः ऐच्छिक (वैकल्पिक) है और इसका उद्देश्य किसी प्रकार की प्रतिस्पर्धात्मक दबाव की भावना उत्पन्न करना नहीं, बल्कि स्वैच्छिक सहभागिता के माध्यम से सीखने का वातावरण तैयार करना है। आयोजन समिति का स्पष्ट उद्देश्य है कि अधिक से अधिक बालक इस प्रश्नोत्तरी में भाग लेकर पथिक जी के जीवन, जनजागरण, पत्र लेखन और सामाजिक मूल्यों से परिचित हों।
विशेष रूप से यह भी सूचित किया जाता है कि जिन विद्यालयों के अधिकाधिक छात्र सही उत्तर देकर सक्रिय सहभागिता प्रदर्शित करेंगे, उन विद्यालयों के प्रबंधन को सम्मानित करने का भी प्रस्ताव आयोजन समिति के स्तर पर रखा गया है। यह सम्मान किसी प्रतिस्पर्धा की भावना से नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों द्वारा जागरूक, संवेदनशील और विचारशील विद्यार्थियों के निर्माण में निभाई जा रही सकारात्मक भूमिका के प्रति कृतज्ञता के रूप में होगा।
विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकगण और अभिभावकों से विनम्र निवेदन है कि वे इसे एक शैक्षिक एवं संस्कारपरक अवसर के रूप में देखें और बालकों को स्वेच्छा से इसमें सहभागी बनने के लिए प्रेरित करें। यह पहल विद्यार्थियों में अध्ययन रुचि, सामान्य ज्ञान, लेखन संवेदना और सामाजिक समझ को विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह आयोजन किसी प्रकार की औपचारिक बाध्यता नहीं, बल्कि एक जनजागरण आधारित शैक्षिक प्रयास है। इसका मूल भाव है—
ज्ञान के माध्यम से जागरूकता,
पत्रों के माध्यम से संवेदना,
और सहभागिता के माध्यम से संस्कार।
अतः सभी विद्यालयों, बालकों और शिक्षा से जुड़े सभी वर्गों से सादर आह्वान है कि वे इस ऐच्छिक पहल से जुड़ें, पथिक जी की प्रेरणादायी विरासत को समझें और संवाद व संवेदना से युक्त शिक्षण संस्कृति को सशक्त बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें।
आपकी स्वैच्छिक सहभागिता ही इस पहल की वास्तविक सफलता होगी।
धन्यवाद।
आरंभिक आयोजन की प्रेस विज्ञप्ति
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता २०२६
साहित्य मंच -टोडारायसिंह जिला टोंक के तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी जयपुर डा. सूरज सिंह नेगी साहब की अनूठी मुहिम, पाती अपनों को, के तहत महात्मा गांधी राजकीय स्कूल, माली खेड़ा, चन्द्रशेखर आजाद नगर, भीलवाड़ा में स्कूली विद्यार्थियों को शिवराज कुर्मी, संयोजक साहित्य मंच द्वारा विलुप्त होती पत्र विधा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पोस्ट कार्ड, अन्तर्देशीय पत्र एवं लिफाफा के बारे में जानकारी देकर अपने रिश्तेदारों को पत्र लेखन के लिए प्रेरित किया गया। किसी के जन्मदिन, वर्षगांठ, शिक्षक दिवस, मातृ-पितृ पूजन दिवस आदि अवसरों पर पत्र लिखे जा सकते हैं।
पत्र विधा वह विधा है जिसमें कोई भी व्यक्ति अपने मन के विचार लिपिबद्ध कर सकता है। बच्चों को मोबाइल द्वारा बधाई संदेश भेजने की जगह पत्र लेखन को कहा गया। मन की भावनाएं व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है पत्र।
इसके अतिरिक्त स्कूली विद्यार्थियों को गौरैया संरक्षण एक पहल अभियान के बारे में अवगत कराया गया। गौरैया बचाव हेतु नियमित रूप से छत पर एक मुट्ठी दाना एवं पानी का पात्र रखने के लिए प्रेरित किया गया।आने वाला मौसम गौरैया चिड़िया का प्रजनन काल होगा। इस हेतु अपने मकान या आस-पास में खाली डिब्बे को गौरैया का घोंसला बना कर लटका सकते हैं।आपकी छोटी सी पहल सार्थक होगी। बच्चों को गौरैया चिड़िया के पोस्टर भी दिखाए गये।
स्वतंत्रता सेनानी एवं निर्भीक पत्रकार, बिजौलिया आन्दोलन के सूत्रधार स्व. विजय सिंह पथिक की आने वाली जयन्ती के अवसर पर स्कूली विद्यार्थियों से लिखित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित करवाई गई।
इसमें प्रथम स्थान पर मीनांसी राठौर, द्वितीय स्थान निशा बलाई एवं तृतीय स्थान पर नीतू मेघवंशी रही। विजेताओं को मौके पर ही पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
अन्त में संस्था प्रधान श्री भैरु लाल जाट ने पाती मुहिम एवं गौरैया संरक्षण पहल का स्वागत करते हुए इस दिशा में बच्चों से कार्य करवाने का विश्वास दिलाया।
कार्यक्रम में शाला परिवार के अंजना, सीमा वर्मा का सहयोग प्राप्त हुआ।
झलकियाँ
विजेता बालिकाएं जिनको लॉटरी द्वारा प्रथम, द्वितीय और तृतीय तय किया गया अन्यथा तो इन समेत कई अन्य बालिकाएं प्रथम स्थान ही को डिजर्व करती थीं। ये सब भी शत प्रतिशत सही उत्तर देने वाली प्रथम आई बालिकाएं ही हैं।
आरंभिक कार्यक्रम की रिपोर्ट
'पत्रों आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता' एवं 'पत्र लेखन जनजागरण पहल'
(पथिक जयंती के अवसर पर संकल्पना एवं कार्यक्रम-आधारित प्रतिवेदन)
संवाद, संवेदना और पत्र लेखन की गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने की व्यापक संकल्पना के अंतर्गत पथिक जयंती (27 फरवरी) के उपलक्ष्य में “पत्रों आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता” का आयोजन एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक पहल के रूप में संपन्न किया गया। इस पहल का मूल उद्देश्य जनसामान्य, विशेषकर विद्यार्थियों को पत्र लेखन की आत्मीय परंपरा, राष्ट्रीय चेतना और विचारशील अभिव्यक्ति से जोड़ना रहा।
इस वृहद संकल्पना के निर्माण और वैचारिक आधार में ‘उलझन सुलझन’ टीम की रचनात्मक दृष्टि, श्री नरेंद्र नागर का समन्वयकारी मार्गदर्शन तथा वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. सूरज सिंह नेगी की प्रेरणास्पद मुहिम “पाती अपनों को” का विशेष योगदान रहा। साथ ही, कार्यक्रम के जमीनी क्रियान्वयन में संयोजक श्री शिवराज कुर्मी की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही, जिन्होंने संकल्पना को व्यवहारिक रूप देकर विद्यार्थियों तक इसकी सार्थक पहुँच सुनिश्चित की।
इतिहास साक्षी है कि पत्र केवल शब्दों का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं, विचारों और जनचेतना के वाहक रहे हैं। महान जननायक विजय सिंह पथिक ने अपने पत्रों, लेखन और पत्रकारिता के माध्यम से समाज, किसानों और राष्ट्र में जागरण का कार्य किया। उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए यह प्रतियोगिता केवल सामान्य ज्ञान तक सीमित न रहकर संवाद, जनजागरण और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक सार्थक प्रयास बनी।
संकल्पना के व्यावहारिक अभ्यास स्वरूप साहित्य मंच, टोडारायसिंह जिला टोंक के तत्वावधान में महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, माली खेड़ा, चन्द्रशेखर आजाद नगर, भीलवाड़ा में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्कूली विद्यार्थियों को विलुप्त होती पत्र विधा के महत्व से अवगत कराया गया। पोस्टकार्ड, अन्तर्देशीय पत्र एवं लिफाफे की उपयोगिता समझाते हुए बच्चों को अपने परिजनों, शिक्षकों एवं समाज के विभिन्न वर्गों को पत्र लिखने के लिए प्रेरित किया गया। जन्मदिन, वर्षगाँठ, शिक्षक दिवस एवं मातृ-पितृ पूजन दिवस जैसे अवसरों पर पत्र लेखन की परंपरा को पुनः अपनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि डिजिटल युग में संवाद की गति तो बढ़ी है, परन्तु उसकी आत्मीयता कम होती जा रही है। छोटे संदेशों के स्थान पर भावपूर्ण पत्र लेखन मन की संवेदनाओं को व्यक्त करने का अधिक प्रभावी माध्यम है। इसी भावभूमि पर विद्यार्थियों को पत्रों के माध्यम से अपने विचार, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता सेनानी एवं निर्भीक पत्रकार विजय सिंह पथिक की जयंती के उपलक्ष्य में लिखित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की, जिसमें प्रथम स्थान मीनांसी राठौर, द्वितीय स्थान निशा बलाई तथा तृतीय स्थान नीतू मेघवंशी ने प्राप्त किया। विजेताओं को तत्काल पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया, जिससे विद्यार्थियों में उत्साह एवं प्रेरणा का संचार हुआ।
इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को गौरैया संरक्षण अभियान से भी अवगत कराया गया। उन्हें नियमित रूप से छत पर दाना-पानी रखने, घोंसले हेतु सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित किया गया। गौरैया चिड़िया के पोस्टरों के माध्यम से पर्यावरण चेतना का संदेश भी प्रभावी रूप से दिया गया।
संस्था प्रधान श्री भैरूलाल जाट ने “पाती अपनों को” मुहिम, पत्र लेखन जागरण एवं गौरैया संरक्षण पहल का स्वागत करते हुए भविष्य में विद्यार्थियों के माध्यम से इन गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का विश्वास व्यक्त किया। कार्यक्रम में शाला परिवार की अंजना एवं सीमा वर्मा का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ।
समग्र रूप से यह संयुक्त पहल केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक सशक्त सामाजिक-शैक्षिक अभियान के रूप में उभरकर सामने आई, जिसने विद्यार्थियों में संवाद, संवेदना, रचनात्मक लेखन, पर्यावरण चेतना और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित की।
मीडिया एवं समाज के सभी वर्गों से अपेक्षा है कि वे इस अभिनव पहल को जन-जन तक पहुँचाने में सहयोग करें, ताकि पत्र लेखन की आत्मीय संस्कृति, सामाजिक संवाद और मानवीय संबंधों की परंपरा पुनः सुदृढ़ हो सके। यह अभियान नई पीढ़ी को विचारशील, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में एक विनम्र किन्तु प्रभावशाली प्रयास है।
समीक्षा
यह प्रथम प्रयास था। अतः इसको समझने और समझाने की दिशा ही में प्रयास करने पड़े। यद्यपि आंशिक सफलता ही मिल सकी लेकिन सीखने के पर्याप्त अवसर मिले जो कि भविष्य में हम लोगों के लिए सुविधाजनक माहौल बना देंगे।
प्रस्तुति
















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