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सेवानिवृत्त सांख्यिकी अधिकारी श्री वीरेन्द्र कुमार का विशेष साक्षात्कार

सेवानिवृत्त सांख्यिकी अधिकारी श्री वीरेन्द्र कुमार का विशेष साक्षात्कार

(सेवानिवृत्ति उपरांत सजातीय संगठन के सर्वेसर्वा के रूप में उनकी दृष्टि, अनुभव और सामाजिक योगदान पर केंद्रित)

भूमिका

सांख्यिकी केवल आँकड़ों का विज्ञान नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक स्थिति को समझने और नीति-निर्माण को दिशा देने का सशक्त माध्यम है। इसी दृष्टि को जीवनभर अपने कार्यों में अपनाने वाले वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी श्री वीरेन्द्र कुमार ने सेवा काल में तथ्यपरक निर्णय प्रणाली, डेटा की शुद्धता और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण को विशेष महत्व दिया। सेवानिवृत्ति के पश्चात वे अब एक सजातीय संगठन के सर्वेसर्वा के रूप में समाजिक नेतृत्व की नई भूमिका निभा रहे हैं। प्रस्तुत है उनसे विभिन्न आयामों पर आधारित एक विस्तृत साक्षात्कार।


बातचीत 

प्रश्न १. आपके अनुसार सांख्यिकी विभाग का मूल स्वरूप और वास्तविक महत्व क्या है?

उत्तर (वीरेन्द्र कुमार): "मेरे दृष्टिकोण से सांख्यिकी विभाग किसी भी व्यवस्था की रीढ़ के समान है। यह विभाग केवल आँकड़ों का संग्रह नहीं करता, बल्कि उन्हें सत्य, व्यवस्थित और विश्लेषित रूप में प्रस्तुत कर नीति-निर्माण की आधारशिला तैयार करता है। यदि आँकड़े सही हों तो योजनाएँ प्रभावी बनती हैं, और यदि आँकड़ों में त्रुटि हो तो निर्णय भी भटक सकते हैं। इसलिए सांख्यिकी का मूल उद्देश्य सत्य को संख्यात्मक रूप में प्रस्तुत करना है।"

प्रश्न 2: अपने सेवा काल के अनुभवों के आधार पर बताइए कि डेटा की विश्वसनीयता क्यों आवश्यक है?

उत्तर: "डेटा की विश्वसनीयता ही किसी भी योजना की सफलता का आधार होती है। मैंने अपने कार्यकाल में देखा है कि जब आँकड़े प्रमाणिक होते हैं, तो शासन की योजनाएँ अधिक लक्षित और परिणामोन्मुख होती हैं। गलत या अधूरे आँकड़े समाज की वास्तविक समस्याओं को छिपा देते हैं। इसलिए प्रत्येक सर्वेक्षण, जनगणना और रिपोर्ट में शुद्धता सर्वोपरि होनी चाहिए।"

प्रश्न ३. सांख्यिकी अधिकारी के रूप में आपके कार्य की सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?

उत्तर: "सबसे बड़ी चुनौती थी—विविध स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों का समन्वय और उनकी सत्यता सुनिश्चित करना। कई बार क्षेत्रीय स्तर पर आंकड़ों की भिन्नता, तकनीकी सीमाएँ और मानवीय त्रुटियाँ सामने आती थीं। इन चुनौतियों के बावजूद वैज्ञानिक पद्धति, अनुशासन और निष्पक्षता के साथ कार्य करना ही हमारी प्राथमिकता रही।"

प्रश्न ४. आज के डिजिटल युग में सांख्यिकी की भूमिका को आप किस रूप में देखते हैं?

उत्तर: "डिजिटल युग में सांख्यिकी का महत्व और भी बढ़ गया है। आज डेटा केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, बिग डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से व्यापक विश्लेषण संभव है। इससे नीति निर्माण अधिक सटीक और त्वरित हो गया है। परंतु तकनीक के साथ-साथ मानवीय विवेक भी उतना ही आवश्यक है।"

प्रश्न ५. एक उच्च स्तरीय अधिकारी के रूप में आपकी कार्यशैली का मुख्य सिद्धांत क्या रहा?

उत्तर: "मेरी कार्यशैली तीन सिद्धांतों पर आधारित रही—निष्पक्षता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता। मैंने सदैव यह प्रयास किया कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पूर्व आँकड़ों का बहुआयामी विश्लेषण किया जाए और निर्णय भावनाओं के नहीं, तथ्यों के आधार पर लिए जाएँ।"

प्रश्न ६. सेवानिवृत्ति के बाद सजातीय संगठन के सर्वेसर्वा के रूप में आपकी भूमिका कैसे भिन्न है?

उत्तर: "सेवा काल में मेरा दायित्व प्रशासनिक और विश्लेषणात्मक था, जबकि अब संगठनात्मक और सामाजिक नेतृत्व की भूमिका है। सजातीय संगठन में मेरा उद्देश्य समाज को एकजुट करना, शिक्षा, जागरूकता और सहयोग की भावना को बढ़ाना है। यहाँ भी मैं सांख्यिकीय दृष्टिकोण अपनाते हुए समाज की वास्तविक आवश्यकताओं का अध्ययन कर योजनाएँ बनाने का प्रयास करता हूँ।"

प्रश्न ७. क्या सांख्यिकीय दृष्टिकोण सामाजिक संगठन के संचालन में भी सहायक होता है?

उत्तर: "निस्संदेह। जब हम समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं, आवश्यकताओं और संसाधनों का डेटा-आधारित अध्ययन करते हैं, तो संगठन की गतिविधियाँ अधिक प्रभावी बनती हैं। इससे निर्णय भावनात्मक न होकर व्यावहारिक और संतुलित होते हैं।"

प्रश्न ८. युवा पीढ़ी के लिए सांख्यिकी क्षेत्र में क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर: "मैं युवाओं से यही कहना चाहूँगा कि सांख्यिकी केवल गणना का विषय नहीं, बल्कि विश्लेषण और विवेक का विज्ञान है। यदि वे इस क्षेत्र में ईमानदारी, धैर्य और वैज्ञानिक सोच के साथ कार्य करें, तो वे समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।"

प्रश्न ९. आपके अनुसार एक आदर्श सांख्यिकी अधिकारी में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?

उत्तर: "एक आदर्श सांख्यिकी अधिकारी में सूक्ष्म दृष्टि, निष्पक्ष सोच, विश्लेषण क्षमता, धैर्य और नैतिक प्रतिबद्धता का होना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उसे समाज की वास्तविकताओं को समझने की संवेदनशीलता भी होनी चाहिए।"

प्रश्न १०. भविष्य में अपने संगठन और समाज के लिए आपकी क्या दूरदर्शी योजना है?

उत्तर: "मेरा प्रयास रहेगा कि संगठन को केवल एक सामाजिक मंच न बनाकर उसे जागरूकता, शिक्षा और सहयोग का केंद्र बनाया जाए। डेटा-आधारित सामाजिक सर्वेक्षणों के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान हेतु ठोस पहल की जाएगी। मेरा विश्वास है कि संगठित समाज और तथ्यपरक सोच से ही सतत विकास संभव है।"

समापन टिप्पणी

श्री वीरेन्द्र कुमार का व्यक्तित्व यह दर्शाता है कि सांख्यिकी केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का वैज्ञानिक साधन है। सेवा से सेवानिवृत्ति के पश्चात भी उनका विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और सामाजिक प्रतिबद्धता उन्हें एक प्रभावशाली मार्गदर्शक एवं सजातीय संगठन के सक्षम सर्वेसर्वा के रूप में स्थापित करती है।

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