भूमिका
लगभग सवा महीना अस्पताल में रहने के बाद जब रचनाकार घर लौटे, तब उनका मन जीवन के सच्चे अर्थों को और अधिक गहराई से समझ चुका था। बीमारी और पीड़ा के उन दिनों में उन्होंने अपने शरीर की कमजोरी के साथ-साथ अपने परिवार के प्रेम, सेवा और समर्पण को बहुत निकट से अनुभव किया। विशेष रूप से पुत्र मनीष की निस्वार्थ सेवा, चिंता और भावनात्मक लगाव ने उनके हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
अस्पताल के शांत वातावरण में बिताए गए क्षणों ने उन्हें यह एहसास कराया कि जीवन में धन-संपत्ति से बड़ा खजाना अपने अपनों का साथ और सेवा भाव होता है। जब वे स्वयं असहाय स्थिति में थे, तब परिवार के प्रत्येक सदस्य ने प्रेम, धैर्य और समर्पण के साथ उनका साथ निभाया। इसी अनुभव ने उनके भीतर कृतज्ञता, आशीर्वाद और आध्यात्मिक भावों की एक सशक्त धारा उत्पन्न की।
यह कविता केवल जन्मदिन की शुभकामना नहीं है, बल्कि एक पिता के हृदय की सच्ची अनुभूति है। इसमें पुत्र मनीष के सेवा भाव, परिवार की एकता, पुत्रवधू की देखभाल, पौत्र-पौत्रियों के स्नेह और पूरे परिवार के सहयोग के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया गया है। रचनाकार को ऐसा अनुभव हुआ कि कठिन समय में परिवार ही सबसे बड़ा सहारा बनता है और सेवा ही सच्ची भक्ति का रूप है।
कविता की प्रत्येक पंक्ति में आशीर्वाद, प्रेम, कृतज्ञता और जीवन के प्रति नई आशा का भाव झलकता है। यह रचना उस भावनात्मक स्थिति में लिखी गई है, जब रचनाकार ने मृत्यु के भय, पीड़ा और पुनः जीवन मिलने की अनुभूति को भीतर से महसूस किया। उन्हें लगा कि ईश्वर की कृपा और पुत्र की सेवा ने उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।
इस प्रकार यह कविता एक साधारण रचना नहीं, बल्कि एक पिता के कृतज्ञ हृदय से निकले आशीर्वादों का सरल, सच्चा और भावपूर्ण स्वर है, जिसमें परिवार के प्रति प्रेम, सेवा की महत्ता और जीवन के प्रति सकारात्मक विश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
रचना
प्रिय पुत्र मनीष के जन्मोत्सव दिनाक 15-2-26 पर उसके पापा के उद्गार एवं आशीर्वाद
मनीष तुम्हारे जन्मदिवस पर क्या क्या मैं आशीष बिखेरूं।
सेवा भावों में बन बैठे मुझको तो तुम उच्च सुमेरु।
कोई कहे सुत श्रवण जैसा इस जग में कैसा होता है?
तो मैं कहता पुत्र मेरे वो मनीष जैसा ही होता है।
देख मेरे तन-मन की पीड़ा उसको देखा चुप-चुप रोते।
उसके अन्तर के भावों को देखा मैंने धीरज खोते।
पितृ, ऋषि, और देव ऋणों संग मानव सदा जन्म लेता है।
कोई ऋणों को संग ले जाता कोई मुक्ति ले लेता है।
ऐसा लगता सभी ऋणों से तुमने तो मुक्ति पा ली है।
पर सेवा उपकार भाव से ईश्वर की भक्ति पा ली है।
नहीं तुम्हारा काम कोई भी निज जीवन में रुक पाएगा।
निश्छल भावों के कारण वो स्वतः ही होता जायेगा।
आशीषों के सिवा मेरे तो पास नहीं है कोई खजाना।
तुमको पाकर ऐसा लगता पास मेरे है महा खजाना।
सुखी रहो परिवार सहित तुम सभी कामना पूरी होवें।
ईश करे सन्तान तुम्हारे जैसी ही हर घर में होवे।
शैव्या छैल छबीली मेरी बाबा की है महा लाड़ली।
जीवन में हर सुख भोगेगी देवों ने हर पीर टाल दी।
सोनाक्षी के क्या गुण गाऊँ बाबा की सेवाकारी है।
सेवा से जो भी फल मिलता उसकी पूरी अधिकारी है।
पौत्र विनायक सदा-सदा से बाबा के हृदय का टुकड़ा।
सहमा सा उसको पाया है देख-देख बाबा का दुखड़ा।
गुण सारे पापा के उसमें सेवा करके खुश होता है।
रहे कहीं भी फिर भी देखा बाबा के संग में होता है।
मेरे घर के क्या कहने हैं घर है फूलों का गुलदस्ता।
इस घर को महकाने में ही रेनू को है मिली सफलता।
रेनू में भी सेवा संचित घर को रखती सदा संभाले।
पापा की सेवा में कोई कमी रहे न मार्ग निकाले।
आशीषों का महा खजाना तुम सबको अर्पित करता हूँ।
संकट नहीं कोई भी आवे ईश्वर से विनती करता हूँ।
मान और प्रतिष्ठा अपनी सदा बनायें जग में रखना।
प्यार सदा छोटों से करना मन से मान बड़ों का करना।
तेरी सुरलोकी मम्मी ने घर का उपवन किया था सृजित।
उसको मेरी पुत्रवधू ने बड़े प्रेम से रखा सुरक्षित।
ग्रह आई और लगा गई टल तुम सब की सेवा का फल है।
ये भी मिट जायेगी जल्दी जो कमजोरी की कल कल है।
अस्पताल में लगा था ऐसा मृत्यु ने आ मुझे पुकारा।
तब ही लगा मृत्यु को जैसे तुमने सेवा कर ललकारा।
देवों ने भी पुत्र तुम्हारा पूरा-पूरा साथ दिया था।
देव लोक से आकर जैसे मेरे सर रख हाथ दिया था।
छोटा बैठा दूर देश में बैठ मेरी चिंता करता है।
रश्मि के संग दिव्यांक भी कभी-कभी बातें करता है।
आशीष यही सुरलोकी मम्मी पीड़ा नहीं कोई भी घेरे।
रहो प्रेम से सदा सदा ही कभी न होवे तेरे मेरे।
मनीष तुम्हारे जन्मदिवस पर संजो दीदी है प्रफुल्लित।
करे ईश से यही प्रार्थना रहे सर्वदा भैया हर्षित।
शत्याधिक वर्षी पा जीवन स्वस्थ रहो जीवन में अपने।
मेरा है आशीष यही सब पूरे होंगे देखे सपने।
रचनाकार
श्री कृष्णदत्त शर्मा ' कृष्ण '
दिनांक 15-2-28

बहुत भावपूर्ण रचना। कृष्ण कांत जी को जन्मदिन पर अपने भावों को कविता के रूप में संवारने के लिए बहुत बहुत साधुवाद और ढेर सारी शुभकामनाएं।
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