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अवसर को भुनाने का आह्वान

अवसर को भुनाने का आह्वान

शैक्षणिक जगत में कुछ अवसर केवल औपचारिक निमंत्रण नहीं होते, वे व्यक्ति की विद्वत्ता, समर्पण और सामाजिक दृष्टि की सार्वजनिक स्वीकृति भी होते हैं। प्रख्यात समाजशास्त्री प्रोफेसर राकेश राणा को नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग अर्थात्  एनसीईआरटी द्वारा तीन दिवसीय कार्यशाला में संसाधन व्यक्ति के रूप में आमंत्रित किया जाना इसी स्वीकृति का सशक्त उदाहरण है।

टीम ‘उलझन सुलझन’ इस उपलब्धि को मात्र व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि समूचे शैक्षणिक समुदाय के लिए प्रेरणा के रूप में देखती है। यह निमंत्रण दर्शाता है कि सतत अध्ययन, समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण और ज्ञान के सार्थक प्रयोग से व्यक्ति शैक्षणिक परिदृश्य में विशिष्ट पहचान बना सकता है।

आज जब शिक्षा का स्वरूप निरंतर परिवर्तित हो रहा है, ऐसे में समाजशास्त्र जैसे विषय के विद्वानों की भूमिका और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है। प्रो. राणा की सहभागिता यह संदेश देती है कि गहन चिंतन, शोधपरक दृष्टि और व्यवहारिक समझ ही वह आधार है जो शिक्षण को जीवंत बनाती है।

यह उपलब्धि अन्य शिक्षाविदों के लिए भी एक नज़ीर है कि यदि वे अपने विषय में निरंतर निष्ठा, अनुशासन और सामाजिक सरोकारों के साथ कार्य करें, तो उनके अनुभव भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर सकते हैं। यह अवसर नवोदित शिक्षकों और शोधार्थियों को प्रेरित करता है कि वे केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित न रहें, बल्कि उसे समाजोपयोगी दिशा में विकसित करें।

अतः यह निमंत्रण केवल एक कार्यशाला में सहभागिता नहीं, बल्कि ज्ञान, समर्पण और शैक्षणिक उत्कृष्टता की उस यात्रा का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को सीखने, सोचने और आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्रदान करती है।

सूचना स्रोत 

प्रो. राकेश राणा

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 






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