राजीव की ओर से वीरेंद्र जी के लिए —
(एक अनोखा, आत्मीय और स्मरणीय शब्द–अनुभव)
वीरेंद्र जी,
आज जब इन आमंत्रण–पत्रों को हाथ में लेकर मन ठहरता है, तो यह केवल कार्डों का एक सुंदर सेट नहीं लगता—यह जीवन के एक दायित्व–युग के पूर्ण होने का हस्ताक्षर लगता है।
इन कार्डों की सुघड़ता, सौंदर्य और त्रुटिरहित प्रस्तुति आपके व्यक्तित्व का मौन परिचय है। हर रेखा में जिम्मेदारी की सादगी है, हर शब्द में पिता का संतुलन, और हर डिज़ाइन में वह तसल्ली—कि कर्तव्य निभा दिया गया है, पूरे मन से।
पुत्र के विवाह के साथ अभिभावक मुक्त नहीं होते,
पर हाँ—
एक निश्चिंत मुस्कान ज़रूर उनके चेहरे पर उतर आती है।
वह मुस्कान आज आपके चेहरे पर साफ़ दिखती है।
यह आयोजन केवल एक पारिवारिक उत्सव नहीं,
बल्कि आपके जीवन की उस साधना का उत्सव है—
जिसमें आपने बिना शोर किए, बिना शिकायत किए,
अपने हिस्से का हर दायित्व पूरी गरिमा से निभाया।
और अब—
आप इस क्षण को और अधिक आनंदमय बनाने की जो कोशिश कर रहे हैं,
वह बताती है कि पिता कभी सेवानिवृत्त नहीं होता,
वह बस आशीर्वाद में बदल जाता है।
राजीव की ओर से बस इतना कहना है—
आज आप जिस सुकून के साथ खड़े हैं,
वह किसी उपलब्धि से कम नहीं।
इन कार्डों की भव्यता नहीं,
आपकी संतुष्टि सबसे सुंदर है।
इस नए अध्याय में
आपके लिए—
हल्कापन हो,
हँसी हो,
और यह एहसास हो कि
आपने बहुत अच्छा निभाया… बहुत खूबसूरती से।
सादर,
राजीव 🌿



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