साहस
आशा और विश्वास का इक ही ठिकाना!
डर और असुरक्षा सिखाते लक्ष्य से भटक जाना!🌹!
बुना है बुना हरी ने भावनाओं का ऐसा ताना- बाना!
खुद ही गर तूने ना जाना, तो क्या जाना!🌹!
साहस, निडरता देती कठिन को सरल बनाना!
अदम्यता की पूर्णता कर, ऐसे मिटे जैसे परवाना!🌹!
कलंदर भी आये, सिकंदर भी आये!
साहस से ही गया उनको पहचाना!🌹!
साहस से ही लिखा जाता इक नया तराना!
साहस ही है विजेताओं का अद्भुत गाना!🌹!
आमने - सामने खड़ी थी जब दो सेनाएं!
गाण्डीव धर धरा पर अर्जुन लड़खड़ाए!🌹!
बोले कान्हा से - गर मारना अपनों को ही!
तो नहीं चाहिए ऐसी जीत सफलतायें!🌹!
त्रिलोकी ने फिर वो भांत भांत से समझाये!
ना कोई जन्मा, ना मारा जाए!🌹!
भ्रम के भ्रम से जो वो भरमाए!
साहस से ही फिर रण को उकसाए!🌹!
साहस ही है जो कूद हनुमत लंक जराये!
जामवंत ने 'बजरंग' को कई कई रंग दिखाए!🌹!
साहस ही है जो असंभव को संभव बनाये!
तीर तरकश पे जिन जिन ने चढ़ाएं!🌹!
जुटा साहस लक्ष्य पर तीर जाए!
साहस से त्याग कि प्रतिमूर्ति बनी पन्ना धाय जैसी मायें!🌹!
साहस से ही लक्ष्मीबाई ने आंगल के छक्के छुड़ाये!
साहस ही है जो निहत्थे "गाँधी" टकराये!🌹!
पता है पता हमको, सब यहाँ आयें जायें!
पर साहस ही असल मुकाम तक पहुचाये!🌹!
फिर क्यूँ ना साहस को ही अपनाएं!
जो बनना है वह साहस ही तुझे बनाये!🌹!
कहत " खटाना धम्मू " होगी मन चाही!
बस कर इतना साहस को जुट जाए!🌹!
रचयिता
धर्मेंद्र खटाना "धम्मू "
दमदमा
प्रस्तुति

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