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आकाशवाणी रेडियो से मैं तेज सिंह भाटी बोल रहा हूँ

🎙️ आकाशवाणी रेडियो  एफएम गोल्ड (100.1 FM)

विशेष साक्षात्कार 

“आकाशवाणी रेडियो से मैं तेज सिंह भाटी बोल रहा हूँ”

संदर्भ - आकाशवाणी रेडियो



बातचीत

प्रश्न १. तेज सिंह भाटी जी, आकाशवाणी रेडियो के एफएम गोल्ड मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है। सबसे पहले आप श्रोताओं को अपने बारे में कुछ बताइए—आपकी यात्रा भारतीय रेलवे से गाँव की निशुल्क लाइब्रेरी तक कैसे पहुँची?

उत्तर : "बहुत-बहुत धन्यवाद सर। मैं उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के मायचा गाँव का निवासी हूँ। मैंने भारतीय रेलवे में जूनियर इंजीनियर के पद से सेवा प्रारम्भ की और विभागीय कॉम्पिटिशन द्वारा कई पद लांघकर अधिकारी बना (उदाहरणार्थ सब इंस्पेक्टर से सीधा ACP)और ग्रूप ए में प्रमोशन होते हुए विभिन्न पदों पर काम करते हुए डायरेक्टर मैकेनिकल के पद से सेवानिवृत्त हुआ। सेवाकाल के दौरान रेलवे में विभिन्न पदों तथा स्थानों पर काम करने का भगवान ने अवसर दिया। सेवा के दौरान नौकरी हमेशा यह सोचकर की कि सरकार हमें इतना देती है और बदले में हम सरकार को कितना देते हैं इसी पोजिटिव सोच के साथ कर्तव्यनिष्ठ बना रहा और अपने कार्य के अतिरिक्त अपनी सीमाओं में रहकर सामर्थ्य के अनुसार हमेशा लोगों का वेलफेयर करता रहा।  

हमारे गाँव में लगभग साठ साल पहले भी इंटरमीडिएट कालिज था लेकिन उसमें ना सांइस तब थी और न ही अब है। जिन बच्चो को भी डाक्टर, इंजीनियर या अन्य कोर्स जिनमे इंटर सांइस जरूरी होती थी वे दादरी या फिर सिकंदराबाद जाते थे।

 हम लोगो को मिहिर भोज इंटर कालेज दादरी जाना पडता था और जाने के लिए 3.5 किलोमीटर गाँव से अजायबपुर रेलवे स्टेशन फिर रेल से दादरी स्टेशन वहा से दो किलोमीटर कालिज पैदल जाते थे। 

मैं सेवानिवृत्त होकर ग्रेटर नोएडा में रह रहा था, लेकिन गाँव के लिए निस्वार्थ भाव से कुछ करने की टीस बरकरार थी। इसी बीच मुझे लाल बहार जी की ग्राम पाठशाला टीम का पता चला।

मैंने अपने गांव के प्रबुद्धजनों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और ग्राम पाठशाला की टीम को मंदिर परिसर में आमंत्रित करके पंचायत की। वहाँ पर लाइब्रेरी बनवाने की सबने सहमति दी। हमारा गाँव ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की आदर्श गांव बनवाने की सूची में है और प्राधिकरण द्वारा वहाँ उच्च स्तरीय मॉडर्न लाइब्रेरी बनाया  जाना है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। इसी बीच कुछ होनहार छात्र जो तैयारी के लिए दादरी की पेड लाइब्रेरी में जाते थे तो समय और पैसे की बर्बादी होती थी। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी के लिए मीटिंग तो आए दिन होती है। हमको धरना-प्रदर्शन के लिए प्राधिकरण कार्यालय भी ले जाते हैं लेकिन लाइब्रेरी बनाने की बात कोई नहीं करता। लड़कों की बात जायज थी और दिल को छूने वाली थी।

उसी समय मैंने एक प्रस्ताव रखा कि हमारी बैठक जिसमें तीन कमरे उनके सामने बरामदा, बाथरूम और आगे चौक बाहर चारदीवारी से घिरा हुआ अध्ययन के लिए उपयोगी और एकांत। मैं आज से ही लाइब्रेरी के लिए देता हू।

लालबहार जी और उनकी टीम तथा गाँव वालों ने देखा और उपयुक्त बताया। मैंने सभी सुविधाएं उपलब्ध कराकर बीस दिन में लाइब्रेरी चालू कर दी। अप्रैल 2022 से नि:शुल्क लाइब्रेरी चालू है।बहुत बच्चे पढ़कर पुलिस मे भर्ती हो चुके है। 

मुझे यह यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि हमारे पूर्वज (पडबाबा) मुकद्दम गोविंद सहाय ने लगभग सत्तर साल पहले चूने से बनी अपनी चौपाल लगभग 1000 वर्गमीटर अस्पताल के लिए दान दी थी तथा उस समय पूरे जिला बुलंदशहर में केवल दो गांवों में जिला परिषद का अस्पताल था। एक मायचा गाँव में और एक गांवों के गाँव में। चौपाल दान देकर प्रशासन के सहयोग से अस्पताल गाँव में लेकर भी है।"

प्रश्न २. आपके पैतृक आवास में बच्चों के लिए नि:शुल्क लाइब्रेरी बनाने का विचार कैसे आया?

उत्तर : "असल में गाँव के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी है तो संसाधनों की। मैंने देखा कि कई बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास न तो शांत जगह है, न किताबें और न ही मार्गदर्शन। तब लगा कि मेरी पैतृक बैठक अगर बच्चों के भविष्य का घर बन जाए, तो इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा। बस वहीं से नि:शुल्क लाइब्रेरी का विचार जन्मा।"

प्रश्न ३. इस लाइब्रेरी की खासियत क्या है? बच्चे यहाँ क्या-क्या सुविधाएँ पाते हैं?

उत्तर : "यह पूरी तरह नि:शुल्क है। बच्चे किसी भी समय आकर बैठ सकते हैं, पढ़ सकते हैं। इसका संचालन चाभी आदि उन्हीं के पास रहती है। यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें, सामान्य ज्ञान, वाई फाई सामग्री उपलब्ध है। सबसे बड़ी बात—यहाँ कोई दबाव नहीं, कोई डर नहीं। यह बच्चों का अपना स्थान है। लाल बहार जी की प्रेरणा से RWA (रोजगार विद अंकित) ने पचास प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें भी यहाँ उपलब्ध हैं।"

प्रश्न ४. आपका यह कार्य आज पूरे देश में आकाशवाणी के माध्यम से साझा किया जा रहा है। आपको यह सम्मान कैसा लग रहा है?

उत्तर : "यह मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। आकाशवाणी रेडियो जैसे प्रतिष्ठित मंच से मेरे छोटे से प्रयास को पहचान मिलना। दरअसल मैंने तो कुछ किया ही नहीं है सब भगवान ने कराया है। बस मुझे माध्यम बनाया है। वास्तव में, इसे एक व्यक्ति का नहीं, एक सामूहिक विचार का सम्मान बनाता है। अगर इससे देश के किसी कोने में कोई और व्यक्ति प्रेरित होता है, तो यही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।"

प्रश्न ५. ग्राम पाठशाला टीम ने आपके प्रयासों को निरंतर समर्थन दिया है। इस सहयोग को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर : "ग्राम पाठशाला टीम मेरे लिए तो प्रेरणा का स्रोत है। यह केवल एक टीम नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। इस विचारधारा से ही प्रेरित होकर महान शायर दुष्यंत कुमार जी के ग्रह जनपद बिजनौर के जिलाधिकारी महोदय ने जिले के प्रत्येक गाँव में लाइब्रेरी बनवाने की घोषणा की है। इसी विचारधारा से प्रेरित होकर यमुना प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के CEO ने प्राधिकरण के अधीन सभी गांवों मे लाइब्रेरी बनवाने का निर्णय लिया है।

अपने लिए तो पशु और पक्षी भी जीते हैं। मानव जीवन है तो दूसरों के लिए कुछ करना चाहिए। 

'परहित सरिस धर्म नही भाई।

पर पीडा सम नही अधमाई।' 

लालबहार जी में मैंने नेतृत्व के सच्चे गुण देखे हैं जो स्वयं आगे ना आकर अपनी टीम को आगे करते हैं। "मैं" से हटकर "हम" पर विश्वास करने वाले, सबको जोड़कर रखने वाले, मन, वचन और कर्म से समाज के समर्पित टीम ग्राम पाठशाला के सच्चे सिपाही हैं।

आकाशवाणी रेडियो और ग्राम पाठशाला ने गाँव, शिक्षा और संस्कार को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया है। मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।"

प्रश्न ६. आज के समाज के लिए, विशेषकर सेवानिवृत्त अधिकारियों और संपन्न वर्ग के लिए, आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर : "मेरा मानना है कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं रि-टायरिंग है। रेलवे की भाषा में पहिए के घिसे टायर को बदलकर नया टायर लगाना। यह नई शुरुआत सामाजिक कार्य करने की है। जहाँ नौकरी का टेंशन नहीं और उदर पूर्ति के लिए सरकार बिना टेंशन पेंशन देती है।

हर व्यक्ति अपने स्तर पर कुछ-न-कुछ कर सकता है—किसी को पढ़ाकर, किसी को मार्ग दिखाकर, नौजवान की कैरियर काउंसलिंग करके, अपने अनुभव को साझा करके आदि आदि समाज बदलने के लिए बहुत बड़ा साधन नहीं, बस एक सच्चा इरादा चाहिए।

'देश हमें देता है सब कुछ 

हम भी तो कुछ देना सीखें।

समाज का हित हो जिसमें

हम ऐसा कुछ करना सीखें।' "

प्रश्न ७. अंत में, मायचा गाँव के बच्चों और आकाशवाणी रेडियो के श्रोताओं के लिए आपका कोई विशेष संदेश?

उत्तर : "मेरे गाँव के बच्चों से बस इतना कहना है—सपने देखो, और! उन्हें पाने की तैयारी पूरे मन से करो।

पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर ए . पी.जे. कलाम के अनुसार,

'सपने वे सच नहीं होते जो रात में सोते में देखते हैं, बल्कि सपने वे सच होते हैं जो रात मे सोने नहीं देते।' 

नकारात्मक विचार कभी भी मन में नहीं आने दें। लॉ ऑफ अट्रैक्शन कहता है जैसा सोचोगे वैसा बन जाओगे। देश भर के श्रोताओं से यही आग्रह है कि यदि आपके पास देने के लिए समय, ज्ञान या संसाधन हैं, तो उन्हें समाज के लिए अवश्य लगाइए। यही सच्ची राष्ट्रसेवा है।"

समापन 

धन्यवाद तेज सिंह भाटी जी, आपने न केवल शब्दों से, बल्कि कर्म से भी प्रेरणा दी।

श्रोताओ, आप सुन रहे थे—

“आकाशवाणी रेडियो से मैं तेज सिंह भाटी बोल रहा हूँ।”

एक प्रेरक संवाद, एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ता कदम।

सूचना स्रोत

श्री लालबहार और श्री तेज सिंह भाटी जी

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 




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