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जन्मदिवस बना सेवा और संस्कार का संकल्प


१. भूमिका 

किसी भी मानव संपदा का जन्मदिवस एक विशेष अवसर होता है जिसको चिरकालिक बनाया जा सकना हमारे वश में है और प्रत्येक जन्मदिवस हमारी और हमारे प्रयासों की गाथा बन सकता है। एक ऐसे ही भाव से संपन्न हुए जन्मदिवस कार्यक्रम का विवरण यहाँ पर आपके सम्मुख प्रस्तुत किया जा रहा है जो एक आदर्श प्रयास का उदाहरण है।

जन्मदिवस बना सेवा और संस्कार का संकल्प

मेरठ में वर्ष 1976 से विधि क्षेत्र में निरंतर प्रैक्टिस कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्री हरिदत्त वर्मा का जन्मदिवस इस 03 जनवरी को अत्यंत सादगी, गरिमा और सामाजिक संवेदना के साथ मनाया गया। यह आयोजन पारंपरिक उत्सव तक सीमित न रहकर एक सार्थक स्मृति दिवस के रूप में सामने आया।

इस अवसर पर उनके सुपुत्र डॉ. उपदेश वर्मा ने अपने पिता के जन्मदिवस को व्यक्तिगत आनंद से ऊपर उठाकर सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय सरोकार से जोड़ने का निश्चय किया। इसी भावना के अनुरूप जन्मदिवस को एक स्मृति के रूप में मनाते हुए निराश्रित बालकों को शैक्षिक पुस्तकें वितरित की गईं, ताकि शिक्षा के माध्यम से उनके जीवन में आशा और दिशा का संचार हो सके।

कार्यक्रम में डॉ. उपदेश वर्मा के साथ उनके हितैषी एवं सम्मानित गणमान्यजन उपस्थित रहे।

विशेष रूप से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के डायरेक्टर (रिसर्च) प्रोफेसर वीरपाल जी, जो नींव संस्था के उपाध्यक्ष भी हैं, चीफ इंजीनियर श्री मनीष मिश्रा जी, तथा परिवारजन और शुभेच्छुजन की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक अर्थपूर्ण बना दिया।

इस अवसर पर उपस्थित हितैषियों ने श्री हरिदत्त वर्मा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 

"उन्होंने अपने दीर्घकालीन विधिक जीवन में न्याय, नैतिकता और सेवा को सदैव प्राथमिकता दी। उन्हीं मूल्यों का प्रतिबिंब आज उनकी अगली पीढ़ी में दिखाई देता है, जो जन्मदिवस को सेवा और संवेदना से जोड़कर मनाने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।"

डॉ. उपदेश वर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि

“पिता का जन्मदिवस केवल केक काटने का दिन नहीं, बल्कि उनके जीवन-मूल्यों को याद कर उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर है। यदि इस दिन किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान आ जाए, तो वही सच्ची श्रद्धांजलि है।”

निराश्रित बालकों को पुस्तकें वितरित कर यह संदेश दिया गया कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो अभावों के अंधकार से निकालकर उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाती है।

इस प्रकार श्री हरिदत्त वर्मा का जन्मदिवस एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया, जहाँ स्मृति, परिवार, समाज और सेवा—चारों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

ऐसे आयोजन न केवल व्यक्तिगत संस्कारों को उजागर करते हैं, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं।

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