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अपनी बात बनी सबकी बात

भूमिका

एक कलाकार का विजन बहुत व्यापक होता है और कला दीर्घा के इस कार्यक्रम का यदि आकलन करें तो पाएंगे कि यह कार्यक्रम कितने नियोजित तरीके से आरंभ हो पाया। इसका अवलोकन पाठक तटस्थ भाव से यदि करें तो पाएंगे कि कलाकार के समस्त प्रयास हित रहे।

दिल्ली की कला दीर्घा में सृजन की प्रस्तुति

तीन सौ प्रकार के वेस्ट मैटीरियल से निर्मित गणेश जी की 3000 कलाकृतियाँ बनीं आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की प्रतिष्ठित ऑल इंडिया आर्ट एंड क्राफ्ट सोसाइटी की कला दीर्घा में एक अनोखी और विचारोत्तेजक कला प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ है। इस प्रदर्शनी में अपशिष्ट पदार्थों से निर्मित भगवान गणेश की लगभग 3000 कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जिनका निर्माण 300 से अधिक प्रकार के वेस्ट मटेरियल से किया गया है।

इस अवसर पर प्रदर्शनी के कलाकार श्री राजेश कुमार डेढ़ा ने कहा कि यह उनकी गणेश कलाकृतियों की प्रथम एकल प्रदर्शनी है, जो उनकी लगभग चालीस वर्षों की कला यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शनी 9 जनवरी से 15 जनवरी 2026 तक आमजन के अवलोकन हेतु खुली रहेगी।

श्री डेढ़ा ने कहा, “मेरी सभी कलाकृतियाँ पूर्णतः अपशिष्ट पदार्थों से निर्मित हैं। इनमें प्लास्टिक के ढक्कन, तार, लकड़ी का छिलका, चावल, खराब पेन, पराली, कांच सहित अनेक ऐसे पदार्थों का प्रयोग किया गया है, जिन्हें सामान्यतः बेकार समझकर फेंक दिया जाता है। मेरा उद्देश्य कला के माध्यम से यह संदेश देना है कि अपशिष्ट भी सृजन का माध्यम बन सकता है।”

इस अद्भुत कला प्रदर्शनी का उद्घाटन श्री आलोक कुमार, अध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद, द्वारा किया गया। उद्घाटन अवसर पर कला प्रेमियों, समाजसेवियों एवं पर्यावरण के प्रति सजग नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

प्रदर्शनी न केवल कला सौंदर्य का उदाहरण है, बल्कि रीसाइक्लिंग, पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मक सोच का सशक्त संदेश भी देती है। कला प्रेमियों के लिए यह प्रदर्शनी एक दुर्लभ और प्रेरणादायक अनुभव सिद्ध हो रही है।

झलकियाँ (क्रमवार झांकी)

















शुभारंभ

09.01.2026

भूमिका

एक कलाकार के भागीरथ प्रयासों का आईना है प्रस्तुत आत्मकथ्य जिसमें कलाकार श्री राजेश कुमार डेढ़ा ने अपने मन को परत दर परत खोलकर रख दिया है। अपनी बात, अपना मन और जनमानस के संग अंतर्संबंध स्थापना की दिशा में प्रयास अपनी तरह का एक अनूठा प्रयास है। जानिए एक कलाकार के अंतर्तम को।

अपनी बात (कलाकार का आत्मकथ्य)

मैं, राजेश कुमार डेढ़ा, एक कलाकार होने के नाते अपने भावों, अनुभवों और जीवन-दृष्टि को रंगों, रेखाओं और रूपों के माध्यम से व्यक्त करने का निरंतर प्रयास करता रहा हूँ। कला मेरे लिए केवल दृश्य सौंदर्य की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज, समय और मनुष्य के अंतर्मन से संवाद का माध्यम है। मेरे जीवन की प्रत्येक अनुभूति—संघर्ष, संवेदना, आशा और प्रश्न—किसी न किसी रूप में मेरी कृतियों में स्थान पाती रही है।

इन्हीं अनुभूतियों और रचनात्मक यात्राओं को साझा करने के उद्देश्य से मेरी एकल कला प्रदर्शनी (Solo Art Exhibition) का आयोजन 9 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक ऑल इंडिया फाइन आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स सोसाइटी (AIFACS), 1 रफी मार्ग, नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 9 जनवरी 2026 को दोपहर 2:30 बजे होगा। यह आयोजन साहित्य प्रेमी मंडल के सहयोग से संभव हो रहा है, जिसके लिए मैं संस्था का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

मेरी इस एकल प्रदर्शनी में प्रदर्शित कृतियाँ मेरे रचनात्मक सफर की साक्षी हैं। इनमें जीवन की जटिलताओं, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और आत्ममंथन की झलक देखने को मिलेगी। मैं यह मानता हूँ कि कला तभी सार्थक होती है जब वह दर्शक के मन में प्रश्न भी जगाए और संवेदना भी उत्पन्न करे। मेरी प्रत्येक कृति उसी संवाद की एक विनम्र कोशिश है।

यह प्रदर्शनी प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे से सायं 7:30 बजे तक सभी कला प्रेमियों के लिए खुली रहेगी। मेरा विनम्र आग्रह है कि कला, साहित्य और संस्कृति में रुचि रखने वाले सभी बंधु इस प्रदर्शनी में पधारें, कृतियों से संवाद करें और अपने भाव साझा करें। दर्शकों की सहभागिता ही किसी कलाकार की सच्ची उपलब्धि होती है।

मैं आशा करता हूँ कि यह एकल कला प्रदर्शनी न केवल मेरे रचनात्मक प्रयासों को समझने का अवसर प्रदान करेगी, बल्कि समकालीन भारतीय कला के प्रति रुचि और संवेदनशीलता को भी और अधिक सशक्त बनाएगी।

निमंत्रण तथा गंतव्य अवलोकन






सूचना स्रोत 

राजेश कुमार डेढ़ा 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 




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