आत्मघोषणा
आकाशवाणी रेडियो एफ. एम.गोल्ड साक्षात्कार से
“मैं तेज सिंह भाटी बोल रहा हूँ।
जीवन ने मुझे बहुत कुछ दिया—अनुभव, संवेदना और मनुष्यता को समझने का अवसर। मैंने हमेशा यह माना है कि जीवन केवल अपने लिए नहीं, समाज और मानवता के लिए भी होता है।
"परहित सरिस धर्म नही भाई।
पर पीडा सम नही अधमाई। "
इसी भाव के साथ मैंने यह निर्णय लिया है कि मेरी मृत्यु के पश्चात मेरी देह दधीची देह दान संस्था के माध्यम से मेडिकल रिसर्च के लिए दान की जाएगी। यह कोई असाधारण कार्य नहीं, बल्कि जीवन से मिले ऋण को लौटाने का एक छोटा-सा प्रयास है।
यदि मेरी देह किसी विद्यार्थी के अध्ययन, किसी शोध या किसी अन्य के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक बन सके, तो मैं उसे अपने जीवन की सार्थक पूर्णता मानूँगा।
मैने देह दान के अतिरिक्त ब्रेन डेड के केस मे अंग दान भी किया हुआ है जैसे मेरी आंखो से किसी को नेत्र ज्योति मिल जाए। मेरी किडनी से किसी को जीवन मिल जाए तो अपने जीवन को कृतार्थ समझुंगा।
मैं चाहता हूँ कि यह निर्णय किसी को बाध्य न करे, बल्कि सोचने को प्रेरित करे—कि हम जाते-जाते भी समाज के काम आ सकते हैं।
यदि मेरी यह घोषणा किसी एक व्यक्ति के मन में भी सेवा और समर्पण का बीज बो सके, तो यही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
सूचना स्रोत




टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें