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सेवा, साधना और साहित्य—एक जीवन दृष्टि

 सेवा, साधना और साहित्य—एक जीवन दृष्टि

साक्षात्कारकर्ता: आज हमारे बीच हैं संगीता जड़िया जी—एक ऐसा व्यक्तित्व, जिनके जीवन में गणित की तर्कशीलता, कला की कोमलता, आध्यात्म की गहराई और सेवा का समर्पण एक साथ प्रवाहित होता है। आपका हार्दिक स्वागत है।

संगीता जड़िया: धन्यवाद। यह मेरे लिए आत्मसंवाद जैसा अवसर है।

प्रश्न १. आप एक ऐसे परिवार से आती हैं जहाँ कला विरासत में मिली है। क्या यह विरासत आपके जीवन का आधार बनी?

उत्तर: "बिलकुल। जब किसी बच्चे की आँखें रंगों, रेखाओं और भावों के बीच खुलती हैं, तो संवेदनशीलता उसका स्वभाव बन जाती है। मेरे दादाजी, विश्व-विख्यात चित्रकार श्री बद्रीलाल जी, मेरे लिए प्रेरणा नहीं बल्कि दिशा रहे।

कला ने मुझे देखना सिखाया—केवल आँखों से नहीं, मन से। यही दृष्टि आगे चलकर सेवा, साहित्य और साधना में परिवर्तित हो गई।"

प्रश्न २. "आपने गणित जैसे तर्कप्रधान विषय में एम.एससी. किया, फिर भी आध्यात्म और साहित्य की ओर आपका झुकाव स्पष्ट है। यह संतुलन कैसे बना?"

उत्तर: "मैं मानती हूँ कि गणित और अध्यात्म विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। गणित ने मुझे 'अनुशासन और स्पष्टता' दी, और अध्यात्म ने 'अर्थ और उद्देश्य'। जब तर्क और संवेदना एक साथ चलें, तब जीवन संतुलित बनता है। पाठक भी यदि अपने जीवन में विवेक और संवेदना—दोनों को स्थान दें, तो बहुत कुछ सहज हो सकता है।"

प्रश्न ३. आपकी आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ बचपन से ही हुआ। आज के युवाओं के लिए इसमें क्या संदेश है?

उत्तर: "आध्यात्म कोई पलायन नहीं है, बल्कि अंदर की यात्रा है। आर्य समाज, वैदिक हवन-संध्या और साहित्य ने मुझे यह सिखाया कि ईश्वर बाहर नहीं, हमारे आचरण में प्रकट होता है।

आज का युवा यदि दिन में कुछ क्षण 'स्वयं से संवाद' के लिए निकाल ले—तो वह तनाव से भी बचेगा और लक्ष्य से भी नहीं भटकेगा।"

प्रश्न ४. आपने कोरोना काल में सेवा को सबसे बड़ा पुण्य बताया। सेवा ने आपको क्या सिखाया?

उत्तर: "सेवा ने मुझे 'मैं' से 'हम' की ओर ले जाना सिखाया। जब किसी के चेहरे पर आपकी वजह से राहत आती है, तब जीवन का उद्देश्य स्वतः स्पष्ट हो जाता है।

मेरा मानना है—हर व्यक्ति रोज़ एक छोटा-सा सेवा कर्म अपनाए, तो समाज अपने आप बदलने लगेगा।"

प्रश्न ५. कुंडलिनी जागरण और आध्यात्मिक अनुभव—ये विषय आम पाठक को जटिल लग सकते हैं। इसे सरल कैसे समझें?

उत्तर: "सरल शब्दों में कहूँ तो—जब आप अपने विचार, कर्म और भाव को शुद्ध करने लगते हैं, तो भीतर की ऊर्जा जागृत होने लगती है। कुंडलिनी कोई चमत्कार नहीं, बल्कि चेतना का अनुशासन है।

पाठक अपने लिए इतना ही अपनाएँ कि 'नकारात्मकता छोड़कर सकारात्मकता चुनें'—यही पहला चरण है।"

प्रश्न ६. आप साहित्य को 'जीवन की पगडंडी' कहती हैं। लेखन आपके लिए क्या है?

उत्तर: "लेखन मेरे लिए आत्मा की भाषा है।

जब ब्रह्मांड से कोई विचार उतरता है और शब्द बनकर काग़ज़ पर आता है, तो वह केवल रचना नहीं रहती—वह एक जिम्मेदारी बन जाती है।

मैं चाहती हूँ कि पाठक भी लिखें—डायरी में, मन में, या जीवन में। लेखन व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है।"

प्रश्न ७. आप बाल मनोविज्ञान, पारिवारिक नक्षत्र और ट्विन फ्लेम परामर्श से भी जुड़ी हैं। इनका मूल उद्देश्य क्या है?

उत्तर: "इन सभी का मूल एक ही है—' रिश्तों की समझ'। जब व्यक्ति स्वयं को समझ लेता है, तो रिश्ते स्वतः सुधरने लगते हैं।

मेरा प्रयास है कि लोग दोषारोपण से हटकर आत्मनिरीक्षण की ओर बढ़ें।"

प्रश्न ८. आज के पाठक, विशेषकर महिलाएँ, आपके जीवन से क्या अपनाएँ?

उत्तर : "तीन बातें—स्वयं को कम न आँकें, सीखना कभी बंद न करें तथा सेवा और साधना को जीवन में स्थान दें।

महिला जब स्वयं से जुड़ जाती है, तो पूरा परिवार संतुलित हो जाता है।"

अंतिम प्रश्न: यदि आपको अपने जीवन का सार एक पंक्ति में कहना हो?

उत्तर: “सेवा से संस्कार, संस्कार से साधना और साधना से साहित्य—यही मेरी जीवन यात्रा है।”

✨ संपादकीय टिप्पणी

यह साक्षात्कार केवल संगीता जड़िया जी का परिचय नहीं, बल्कि 'एक जीवन-पद्धति' का निमंत्रण है।

पाठक यदि इसमें से 'एक विचार', 'एक अभ्यास' या 'एक सकारात्मक दृष्टि' भी अपना लें—तो यह संवाद सफल माना जाएगा।

सूचना स्रोत 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 


प्रतिक्रिया १

आत्मा की आवाज को आपने शब्दों में लिखकर अति उत्तम बना दिया, दिल की गहराइयों में जो भाव थे वे सचमुच में आज कागज पर उतार दिए l

तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया अदा करती हूं। ❤️ 

आदरणीय दीदी, आपने मुझे इसके लिए चुना यह मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है, आपका आशीर्वाद हमेशा बना रहे।

इसमें कहीं कोई कमी नहीं है श्रेष्ठतम! 

मेरी जिंदगी का पहला साक्षात्कार 🥰🙏🏻✨🌟🫶🏻🪷👏🏻🤞🏻💕

डॉ संगीता जड़िया 

प्रतिक्रिया २

आदरणीय छाया दीदी प्रणाम🙏🏻🥰

हार्दिक धन्यवाद करती हूं आपको, जीवन यात्रा में आपसे मुलाकात मेरे लिए सौभाग्यदायक रही है।

आपकी छत्रछाया में कार्य करती रहूंगी, इस नई विद्यार्थी को आशीर्वाद प्रदान करें। एक बार फिर से दिल से शुक्रिया।

🙏🏻🫶🏻🥰✨🍫🌟

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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