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गुर्जर सामाजिक जागरूकता संकल्प

भूमिका

सब समझेंगे तो जग बदलेगा और जग बदलेगा तो जीवन सरल, सहज और मौलिक होगा तथा मौलिकता ही वह विशिष्ट है जो सबके जीवन को संवार कर उसको अर्थपूर्ण बनाने में मददगार हो सकती है तो आइए पढ़ते हैं चिंतक डॉ. रोशन लाल छोकर जी के विचारों को।

गुर्जर सामाजिक जागरूकता संकल्प

**“समरस समाज ही समृद्ध समाज का आधार”**


**डॉ. रोशन लाल छोकर (आत्मकथ्य)**


मैंने अपने जीवन के अनुभवों, समाज के उतार–चढ़ाव और पीढ़ियों की आकांक्षाओं को बहुत निकट से देखा है। इन्हीं अनुभवों ने मुझे यह विश्वास दिया है कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी धन-संपदा या भौतिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उसके भीतर बहती **समरसता, संवाद और आपसी सम्मान** की धारा में होती है।


आज जब मैं गुर्जर समाज की ओर देखता हूँ, तो मुझे गर्व भी होता है और चिंता भी।

गर्व इसलिए कि हमारे पास इतिहास है, सामर्थ्य है, संख्या है और संघर्षशील चेतना है—

और चिंता इसलिए कि कहीं हम आपसी दूरी, संवादहीनता और बिखराव के कारण अपनी ही शक्ति को कमजोर न कर दें।


मेरा दृढ़ विश्वास है कि **समरस समाज ही समृद्ध समाज का आधार** होता है।

यदि समाज में धैर्य, आत्मसमर्पण, स्नेह, लगाव और आत्मविश्वास नहीं होगा, तो चाहे वह कितना भी सम्पन्न क्यों न हो, उसकी प्रगति का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा।


इसी भावभूमि पर मैं अपने समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक से यह संकल्प साझा करता हूँ—


**1. संगठन ही समाज की रीढ़ है**


हमें अपने जातीय संगठनों को मजबूत करना होगा।

स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक जो भी सामाजिक नेतृत्व कार्य कर रहा है, उसे सहयोग, मार्गदर्शन और नैतिक समर्थन देना हमारा कर्तव्य है।

बिखरा हुआ समाज कमजोर होता है, संगठित समाज अजेय।


**2. परस्पर सहयोग और आत्मीयता का विस्तार**


मैं चाहता हूँ कि हमारे पारिवारिक और सामाजिक विवाद न्यायालयों में नहीं, संवाद और परामर्श की मेज पर सुलझें।

एक-दूसरे की सफलता को अपनी सफलता समझना ही सच्ची सामाजिक समृद्धि है।


**3. परिवार मिलान और क्षेत्रीय बैठकों की परंपरा**


हर क्षेत्र में नियमित सामाजिक बैठकें हों।

परिवार मिलान समारोह केवल रिश्ते तय करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का सशक्त मंच बनें।


**4. विवाह संवाद में पारदर्शिता और सम्मान**


विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, दो परिवारों और विचारों का मिलन है।

रिश्ते “धन” या “दबाव” पर नहीं, बल्कि **सम्मान, संवाद और विचार–मेल** पर आधारित हों—यही मेरी कामना है।


**5. शिक्षा को सामाजिक प्राथमिकता बनाना होगा**


हर गाँव, कस्बे और शहर में शिक्षा जागरूकता अभियान चलें।

बेटा और बेटी—दोनों को समान रूप से उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करना सामाजिक धर्म बने।


**6. सामूहिक शिक्षण सहयोग केंद्र (SSECs)**


समाज के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए स्थानीय स्तर पर सहयोग समूह बनें।

शिक्षक, प्रोफेसर और वरिष्ठ विद्यार्थी मिलकर “शैक्षिक संघटन” तैयार करें—ताकि कोई भी प्रतिभा संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे।


 **7. राजनीतिक स्तर पर सुनियोजित सामाजिक नीति**


गुर्जर समाज को भावनाओं से नहीं, नीति और रणनीति से आगे बढ़ना होगा।

समाज के हितों के लिए एकजुट राजनीतिक दृष्टि विकसित करनी होगी।


**नारा स्पष्ट हो:**

*“गुर्जर का हित – हर दल में दिखे स्पष्ट नीतिगत समर्थन”*


मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूँ—

गुर्जर समाज के पास सब कुछ है,

अब आवश्यकता है केवल

**संगठन, संवाद, शिक्षा, संस्कार और सुनियोजित सामाजिक नीति** की।


आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि आने वाली पीढ़ियों को हम

एक **आत्मनिर्भर, शिक्षित, संगठित और सशक्त गुर्जर समाज** सौंपेंगे—

यही हमारा उत्तरदायित्व है, यही हमारा भविष्य।

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