आत्मकथ्य - श्री शिवराज जी कुर्मी
साहित्य मेरे लिए केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज से संवाद करने का एक सजीव माध्यम है। टोडारायसिंह की धरती पर साहित्य मंच के माध्यम से जिन संवेदनाओं, विचारों और मूल्यों को स्वर देने का प्रयास किया गया, उनमें अनेक साथियों का सहयोग और प्रेरणा निहित रही है।
आज गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर मंच के सक्रिय कवि दिनेश कुमार जैन को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक कार्यों के लिए उपखंड अधिकारी महोदय द्वारा सम्मानित होते देखना मेरे लिए अत्यंत संतोष और गौरव का विषय है। यह क्षण केवल एक सम्मान का नहीं, बल्कि उस सतत साधना की स्वीकृति है, जिसमें साहित्य को लोकमंगल और सामाजिक चेतना से जोड़ा गया।
दिनेश जी की लेखनी ने सदैव संवेदना, संस्कार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व को प्राथमिकता दी है। उनका यह सम्मान हम सभी के लिए प्रेरणा है कि जब उद्देश्य निष्कलुष हो और प्रयास निरंतर, तो साहित्य अपनी राह स्वयं बना लेता है।
मैं इसे साहित्य मंच, टोडारायसिंह की सामूहिक साधना की उपलब्धि मानता हूँ और आशा करता हूँ कि यह मंच आगे भी ऐसे ही सृजनशील, सामाजिक और मूल्यपरक साहित्य को दिशा देता रहेगा।
झलकी



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