मैंने अपने जीवन में एक बात गहराई से महसूस की है—गाँव की बेटियाँ जब भी अपने गाँव लौटती हैं, तो केवल स्मृतियाँ नहीं लातीं, संस्कार और जिम्मेदारी भी साथ लाती हैं।
कल गाजियाबाद जिले के गाँव गनौली में जग के शुभ अवसर पर गाँव की ही दो बेटियाँ—प्रमिला और उर्मिला, सुपुत्रियाँ स्वर्गीय श्री राजन बैसला—अपने मायके पहुँचीं। यह मेरे लिए गर्व और भावुकता का क्षण था।
इन दोनों बहनों ने अपने गाँव के प्रति जो संवेदनशीलता दिखाई, वह अनुकरणीय है। उन्होंने गाँव गनौली की निःशुल्क लाइब्रेरी के लिए ₹2,100/- दान देकर शिक्षा के दीप को और उज्ज्वल करने का संकल्प लिया। साथ ही उन्होंने प्राचीन शिव मंदिर, बाबा धूनीनाथ और गौशाला के लिए भी ₹1,100/- ₹1,100/- और ₹1,100/- का दान देकर धार्मिक और सामाजिक चेतना को भी सशक्त किया।
टीम ग्राम पाठशाला की ओर से मैं हृदय से बहन प्रमिला जी और उर्मिला जी का आभार व्यक्त करता हूँ और उनके बच्चों के लिए सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ करता हूँ।
मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूँ कि आज गाँवों में जो पुस्तकालय बन रहे हैं, जो बच्चों के सपनों को पंख मिल रहे हैं—वह आप जैसे जागरूक साथियों के छोटे-छोटे दानों से ही संभव हो रहा है।
इसी भाव से मैं आप सभी से विनम्र आग्रह करता हूँ कि अपने परिवार के हर खुशी के अवसर पर अपने गाँव के पुस्तकालय के लिए सांकेतिक दान अवश्य दें। यही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे सशक्त विरासत होगी। 🙏
सूचना स्रोत
श्री लालबहार


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