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परीक्षा पर चर्चा

भूमिका 

शिक्षा के बदलते परिदृश्य में विद्यार्थियों के सामने परीक्षा को समझने, तनाव को नियंत्रित करने और सही करियर दिशा चुनने जैसी अनेक चुनौतियाँ उभरकर सामने आती हैं। ऐसे दौर में श्री द्रोणाचार्य पी. जी. कॉलेज, दनकौर का “परीक्षा पर चर्चा: परीक्षा और कैरियर को लेकर सही समझ कैसे बने” कार्यक्रम विद्यार्थियों को एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने का उत्कृष्ट प्रयास साबित हुआ। मेंटर–मेंटी समिति (IQAC) द्वारा आयोजित यह पहल न केवल परीक्षा संबंधी तकनीकी बारीकियों को स्पष्ट करती है, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और लक्ष्यबद्ध तैयारी की प्रेरणा भी जगाती है। शिक्षकों, विशेषज्ञों और प्रशासन की सक्रिय भागीदारी ने इस परिचर्चा को एक ऐसा सशक्त मंच बना दिया, जहाँ छात्र सीख सकते हैं कि परीक्षा केवल प्रश्नों का उत्तर देने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन-प्रबंधन, समझदारी और संतुलन का अभ्यास भी है।

परीक्षा पर चर्चा

श्री द्रोणाचार्य पी. जी. कॉलेज, दनकौर की मेंटर–मेंटी समिति (IQAC) द्वारा आयोजित “परीक्षा पर चर्चा: परीक्षा और कैरियर को लेकर सही समझ कैसे बने” कार्यक्रम की कार्ययोजना इस प्रकार गढ़ी गई कि विद्यार्थियों को परीक्षा के दबाव से मुक्त कर सकारात्मक दृष्टिकोण, स्पष्ट समझ और व्यवस्थित तैयारी की दिशा मिले। समिति की संयोजिका डॉ. नाज़ परवीन ने इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा तैयार की, जिसमें परीक्षा संबंधी चुनौतियों, करियर निर्माण की दृष्टि, मानसिक संतुलन, स्वास्थ्य और परीक्षा-प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी बारीकियों को समग्र रूप से शामिल किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य आदरणीय डॉ. गिरीश कुमार वत्स के द्वारा माँ सरस्वती पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई, जो न सिर्फ शुभारंभ था बल्कि विद्यार्थियों को यह संदेश देने का भी माध्यम कि शिक्षा प्रकाश का मार्ग है और अनुशासन उसकी आधारशिला। उन्होंने अपने संबोधन में सफलता को सरल तरीकों से परे रखते हुए विद्यार्थियों को बताया कि अनुशासन ही हर उपलब्धि का मूल तत्व है। यह संदेश उसी कार्ययोजना का प्रथम स्तंभ था जिसमें छात्रों के भीतर आत्मविश्वास जगाना और उनकी सोच को यथार्थवादी आधार देना शामिल था।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए उप प्राचार्या डॉ. रश्मि गुप्ता ने नए परीक्षा प्रारूप—ऑब्जेक्टिव प्रश्नों—के अनुरूप अभ्यास की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। यह सुनिश्चित किया गया था कि विद्यार्थी इस बदलाव से सहज हों और उनकी तैयारी व्यवहारिक तरीके से हो सके। इसी क्रम में डॉ. राजीव पाण्डेय ने प्रश्न हल करने की विधि, समय प्रबंधन और त्रुटि रहित उत्तर देने के कौशल पर विस्तार से जानकारी दी। उनकी प्रस्तुति का उद्देश्य छात्रों को परीक्षा के दौरान रणनीति बनाकर आगे बढ़ने की क्षमता विकसित करना था।

परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी पहलुओं को भी कार्ययोजना में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। श्री अजय कुमार ने छात्रों को सामर्थ पोर्टल की बारीकियाँ समझाते हुए यह सुनिश्चित किया कि वे अपने व्यक्तिगत डेटा को सावधानी से भरें और किसी त्रुटि से बचें। ओएमआर शीट से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश—जैसे उसे मोड़ना नहीं, गंदा नहीं करना, सही तरीके से गोले भरना और ब्लैक व ब्लू पेन का उचित प्रयोग—डॉ. अज़मत आरा, श्री प्रिंस त्यागी और डॉ. संगीता रावत द्वारा विद्यार्थियों को विस्तार से बताई गईं। कार्ययोजना का यह भाग परीक्षा परिणामों में गलतियों को न्यूनतम करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रखा गया था ताकि तकनीकी भूलों के कारण विद्यार्थियों का नुकसान न हो।

इसके साथ ही, कार्यक्रम में विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी कार्ययोजना का मूल घटक बनाया गया। श्री अमित नागर ने परीक्षा पूर्व स्वास्थ्य-सावधानियों पर जोर देते हुए बताया कि यदि शरीर स्वस्थ है तो मेहनत अधिक एकाग्रता और ऊर्जा के साथ की जा सकती है। श्रीमती सुनीता शर्मा द्वारा परिश्रम को सफलता की कुंजी बताते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती, बस उसे निरंतरता की आवश्यकता होती है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि विद्यार्थी एक ही मंच पर परीक्षा से जुड़े हर पहलू—भावनात्मक, तकनीकी, व्यावहारिक और भविष्य-निर्माण संबंधी—को समझ सकें। यही इस आयोजन की वास्तविक कार्ययोजना थी, जिसके तहत हर वक्ता को ऐसे विषय दिए गए जो छात्रों की तैयारियों को पूर्णता की ओर ले जाएँ। अंत में, कला संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. देवानंद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शांतिपूर्ण समापन हुआ।

विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों की सक्रिय उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सुविचारित, सार्थक और भविष्य-उन्मुख कार्ययोजना का सफल क्रियान्वयन था, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सही दिशा, सही समझ और सही तैयारी का विश्वास प्रदान करना था।

झलकियाँ 






सूचना स्रोत 

डॉ नाज़ परवीन

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 




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