स्वविवेचनात्मक वक्तव्य— शिवराज कुर्मी
संयोजक, साहित्य मंच, टोडारायसिंह
पर्यावरण केवल हमारे चारों ओर उपस्थित प्रकृति नहीं है, बल्कि यह हमारे अस्तित्व, हमारी संस्कृति और हमारे भविष्य की आधारशिला है। आज पीएम श्री राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, टोडारायसिंह की बालिकाओं द्वारा आयोजित यह पर्यावरण रैली इस सत्य की सजीव अभिव्यक्ति है कि जब चेतना शिक्षा से जुड़ती है, तब समाज को नई दिशा मिलती है।
इन बालिकाओं के हाथों में बने चित्र और उनके मुख से निकले नारे यह स्पष्ट करते हैं कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल पुस्तकों का विषय नहीं रहा, बल्कि यह उनके जीवन-मूल्यों का हिस्सा बन चुका है। यह देखकर संतोष और आशा दोनों होती है कि आने वाली पीढ़ी प्रकृति के प्रति इतनी सजग, संवेदनशील और उत्तरदायी है।
मेरा मानना है कि पर्यावरण की रक्षा किसी एक दिवस या आयोजन तक सीमित नहीं हो सकती। यह एक निरंतर चलने वाली साधना है, जिसमें छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन का कारण बनते हैं। आज इन बालिकाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सोच सही दिशा में हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
विद्यालय परिवार के समस्त शिक्षकगणों का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूँ, जिन्होंने इन बालिकाओं में पर्यावरण के प्रति समझ और जिम्मेदारी का भाव विकसित किया। ऐसे प्रयास ही समाज को यह संदेश देते हैं कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, संवेदनशील और सार्थक बनाना है।
मैं आशा करता हूँ कि यह रैली प्रत्येक नागरिक को यह सोचने के लिए प्रेरित करेगी कि हम अपने स्तर पर प्रकृति के संरक्षण हेतु क्या कर सकते हैं। यदि आज हम जागरूक हुए, तो कल की पृथ्वी स्वयं हमें धन्यवाद देगी।
झलकी



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें