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डॉ. महीपाल का आत्मकथ्य

 डॉ. महीपाल का आत्मकथ्य

(ग्राम प्रबंधन विशेषज्ञ)

जब मैं किवाना ग्राम पंचायत पहुँचा, तो मेरे मन में एक ही भाव था—क्या हम संविधान के 73वें संशोधन को केवल काग़ज़ों तक सीमित रखेंगे या उसे गाँव की ज़मीन पर साकार कर पाएँगे? किवाना में आयोजित यह बैठक मेरे लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि पंचायती राज की आत्मा को पुनर्जीवित करने का एक जीवंत प्रयास थी।

सरपंच श्री चेनपाल छोकर की अध्यक्षता में ग्राम पंचायत प्लान फेसीलिटेशन टीम की यह बैठक इसलिए ऐतिहासिक रही क्योंकि यहाँ ग्राम विकास योजना 2026–27 को केवल औपचारिक दस्तावेज़ के रूप में नहीं, बल्कि ग्राम सभा की वास्तविक आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और विभिन्न योजनाओं के समन्वय से तैयार करने की गंभीर पहल की गई। मिशन 73–74 फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस बैठक में अध्यक्ष गौरव मलिक, प्रबंधक सोनिया और मेरे साथ अनेक जागरूक ग्रामीण सहभागी बने।

मैंने अपने प्रस्तुतीकरण में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि जीपीडीपी तभी प्रभावी होगी जब वह ग्राम सभा की आवाज़ से निकले, पंचायत के संसाधनों से जुड़े और राज्य व केंद्र सरकार की योजनाओं, पंचायत समिति तथा जिला परिषद के बजट के साथ अभिसरित हो। योजना बनाना केवल सूची तैयार करना नहीं, बल्कि गाँव को आत्मनिर्भर और उत्तरदायी शासन की दिशा में ले जाना है।

इस बैठक में पैंसठ ग्राम सभा सदस्य, बीस पंच, गाँव की विभिन्न समितियों से जुड़े बुद्धिजीवी, सरकारी सेवाओं व बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत प्रोफेशनल तथा सामाजिक कार्यकर्ता एक साथ बैठे। यह दृश्य अपने आप में बताता है कि जब ग्राम विकास को सामूहिक जिम्मेदारी माना जाता है, तब पंचायत केवल प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक नेतृत्व का केंद्र बन जाती है।

मिशन 73–74 फाउंडेशन का मूल उद्देश्य संविधान के 73वें संशोधन को उसकी वास्तविक भावना के साथ लागू कराना है—ऐसी पंचायती राज व्यवस्था जहाँ ग्राम पंचायतें वास्तव में स्वशासी संस्थाएँ हों। आज भी देश के अनेक राज्यों में योजना निर्माण, वित्तीय अधिकार और विभागीय समन्वय उस स्तर तक नहीं पहुँचा है जिसकी कल्पना संविधान निर्माताओं ने की थी। किवाना में हमारा प्रयास इसी अंतर को पाटने की दिशा में एक ठोस कदम है।

बैठक का सबसे निर्णायक और दूरगामी महत्व का निर्णय यह रहा कि अगली बैठक में संविधान की 11वीं अनुसूची के सभी उनतीस विभाग एक ही मंच पर उपस्थित होंगे। वे अपने-अपने आँकड़े, बजट और योजनाएँ लेकर आएँगे, ताकि किवाना ग्राम पंचायत का पहला पूर्णतः एकीकृत ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार की जा सके। मेरे लिए यह क्षण इसलिए विशेष था क्योंकि यह पहल हरियाणा में पहली बार हो रही है और यदि सफल हुई तो देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।

मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूँ कि किवाना ग्राम पंचायत का यह प्रयोग केवल एक गाँव की कहानी नहीं है। यह उस भारत की संभावना है जहाँ पंचायती राज व्यवस्था संविधान की भावना के अनुरूप सशक्त, सहभागी और जवाबदेह बन सके। यदि हर राज्य इस मॉडल से प्रेरणा ले, तो ग्रामीण शासन वास्तव में लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत कर सकता है।

झलकियाँ 








सूचना स्रोत 

डॉ. महीपाल
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 










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