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भंवरी देवी ‘छीपा’ हैं एक प्रेरक व्यक्तित्व

 भूमिका

श्रीमती भंवरी देवी ‘छीपा’ एक समर्पित शिक्षिका, संवेदनशील साहित्यकार और सतत सक्रिय रचनाकार के रूप में हमारे सामने उभरती हैं। 15 सितंबर 1957 को अजमेर में जन्मी भंवरी देवी जी ने एम.ए., बी.एड. करने के बाद व्याख्याता के रूप में अपना दीर्घ सेवामय जीवन बिताया और सेवानिवृत्ति के बाद पूरी निष्ठा से स्वतंत्र लेखन को अपनाया। छंद, कविता, आलेख, तथा शैक्षिक-सहशैक्षणिक गतिविधियों में उनकी निरंतर भागीदारी ने उन्हें साहित्यिक दुनिया में विशिष्ट पहचान दी। कुसुम छंद शाला, शब्द सागर संस्था तथा नामदेव अभिप्रेरणा चेरिटेबल ट्रस्ट जैसे प्रतिष्ठित मंचों द्वारा सम्मानित उनकी कृतियाँ साझा संकलनों और प्रतियोगिताओं में भी सराही गईं। यह साक्षात्कार उनके व्यक्तित्व, साधना और उपलब्धियों का एक सुन्दर आईना है, जो पाठकों को प्रेरणा और संवेदनशीलता की नई दिशा प्रदान करता है।

बातचीत

श्रीमती भंवरी देवी ‘छीपा’

एक प्रेरक व्यक्तित्व : साक्षात्कार

**प्रश्न 1: आपका जन्म एवं प्रारंभिक जीवन किन अनुभवों से जुड़ा रहा?**

**उत्तर:** मेरा जन्म 15 सितंबर 1957 को अजमेर में हुआ। एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी, लेकिन शिक्षा और संस्कार मेरे जीवन के सबसे मजबूत आधार रहे। परिवार से मिली प्रेरणा ने मुझे आगे बढ़ने का हौसला दिया।


**प्रश्न 2: आपने शिक्षा के क्षेत्र को ही अपनी कर्मभूमि क्यों चुना?**

**उत्तर:** एम.ए. और बी.एड. की डिग्री पूर्ण करने के बाद मुझे हमेशा लगा कि शिक्षा ही वह मार्ग है जिससे किसी भी समाज की वास्तविक उन्नति संभव है। इसी सोच ने मुझे व्याख्याता बनने के लिए प्रेरित किया। शिक्षण मेरा पेशा ही नहीं, बल्कि मेरा जुनून रहा।


**प्रश्न 3: लंबे समय तक व्याख्याता रहने के बाद सेवानिवृत्ति उपरांत स्वतंत्र लेखन की ओर रुझान कैसे बढ़ा?**

**उत्तर:** शिक्षण के दौरान साहित्य के प्रति मेरा प्रेम निरंतर बढ़ता रहा। जब सेवानिवृत्ति का समय आया तो मुझे लगा कि अब अपने विचारों और अनुभवों को शब्द देने का पूरा समय मिलेगा। स्वतंत्र लेखन मेरे लिए आत्मसंतोष और समाज से संवाद का माध्यम बन गया।


**प्रश्न 4: साहित्यिक गतिविधियों में आपकी प्रमुख अभिरुचियाँ क्या-क्या रहीं?**

**उत्तर:** मैं सदैव साहित्यिक समूहों से जुड़ी रही हूँ। छंद, कविता और आलेख लेखन मेरा प्रिय क्षेत्र रहा। इसके साथ शैक्षिक व सहशैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेना मुझे हमेशा ऊर्जा देता रहा। साहित्यिक विमर्श और विचार-सृजन ने मेरे व्यक्तित्व को समृद्ध किया है।


**प्रश्न 5: आपके लेखन और सामाजिक भागीदारी को किन-किन मंचों पर सम्मान मिला?**

**उत्तर:** मुझे कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया, जिनमें कुसुम छंद शाला से प्राप्त सम्मान पत्र और शब्द सागर संस्था से मिला प्रशस्ति-पत्र प्रमुख हैं। मेरे लेखन को साझा संकलनों में स्थान मिला तथा कविता लेखन प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत होने का अवसर भी मिला। नामदेव अभिप्रेरणा चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सम्मानित किया जाना मेरे लिए विशेष महत्व रखता है।


**प्रश्न 6: लेखन में प्रेरणा का स्रोत क्या रहा है?**

**उत्तर:** मेरा जीवन, मेरे अनुभव, अपने समाज और परिवार के प्रति मेरा लगाव—ये सभी मेरी लेखनी की प्रेरणा हैं। मेरे स्वर्गीय पति श्री लक्ष्मीनारायण ‘छीपा’ का मार्गदर्शन और प्रोत्साहन हमेशा मेरे साथ रहा, जिसने मुझे आगे बढ़ने की शक्ति दी।


**प्रश्न 7: आप आज की पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहेंगी?**

**उत्तर:** मैं यही कहना चाहूँगी कि शिक्षा और संवेदनशीलता — दोनों जीवन की असली पूँजी हैं। सीखते रहना और अपने विचारों को सकारात्मक दिशा देना ही जीवन को सार्थक बनाता है। साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने से व्यक्तित्व परिष्कृत होता है, इसलिए हर युवा को रचनात्मकता अपनानी चाहिए।


**प्रश्न 8: आगे के लिए आपकी साहित्यिक योजनाएँ क्या हैं?**

**उत्तर:** मैं लेखन को और गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहती हूँ। कविताओं और आलेखों का एक स्वतंत्र संग्रह प्रकाशित करने का विचार है। साथ ही मैं चाहती हूँ कि मेरे लेखन के माध्यम से समाज में संवेदना और जागरूकता को नई दिशा मिले।

टिप्पणियाँ

  1. आदरणीया मेम
    साक्षात्कार के माध्यम से साहित्य जगत में मेरी पहचान बनाने का आपने जो सराहनीय कार्य किया है उसके लिए आपको अनेकानेक धन्यवाद। मुझे लेखन हेतु प्रेरित कर मेरा उत्साहवर्धन किया है। आपका ये उत्तम प्रयास सभी नवीन रचनाकारों के लिए उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।आपको तहेदिल से धन्यवाद और आभार 🙏

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    1. उलझन सुलझन की स्थानीय संपादिका की ओर से आभार

      हटाएं

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