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प्रधानाचार्य श्री प्रवेन्द्र दहिया का आत्मकथ्य

प्रस्तावना

किसी भी शैक्षणिक संस्था के लिए विद्यार्थियों का भविष्य सर्वोपरि होता है। शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन और कैरियर की दिशा वही निर्धारित करती है जहाँ विद्यार्थी अवसरों से परिचित हो सकें। होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा में आयोजित एजुकेशन एंड कैरियर फेयर-2025 इस दृष्टि से अत्यंत मील का पत्थर सिद्ध हुआ। प्रधानाचार्य श्री प्रवेन्द्र दहिया द्वारा इस आयोजन की तैयारी, उनकी दूरदृष्टि, और विद्यार्थियों के हित में किया गया उनका चिंतन इस आत्मकथ्य में प्रस्फुटित होता है।

प्रधानाचार्य श्री प्रवेन्द्र दहिया का आत्मकथ्य

जब मुझे होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा में एजुकेशन एंड कैरियर फेयर आयोजित करने का प्रस्ताव और निमंत्रण मिला—तभी से मेरे मन में एक गहरी जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न हुआ। ग्रामीण परिवेश में पढ़ने वाले विद्यार्थी अक्सर जानकारी के अभाव में अपने कैरियर के सही विकल्पों तक नहीं पहुँच पाते। यह अवसर केवल एक आयोजन नहीं था, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने वाला अवसर था।

मैंने स्वयं से कई प्रश्न पूछे—क्या इस मेले में बच्चों को वह मार्गदर्शन मिल पाएगा जिसकी उन्हें आवश्यकता है? क्या विश्वविद्यालयों और काउन्सलरों तक हमारी पहुँच बनेगी? क्या यह आयोजन उनके भीतर नई आकांक्षाएँ जगा पाएगा? इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढते हुए मेरे भीतर एक दृढ़ निश्चय जागा कि यह आयोजन केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि इसे उत्कृष्ट रूप से होना चाहिए।

आयोजन की तैयारियों में जब मैंने अपने स्टाफ और विद्यार्थियों के साथ चर्चा की, तो सभी की आँखों में उत्साह था। यह देखकर विश्वास और बढ़ा कि हम एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहे हैं। निमंत्रण में उल्लिखित अतिथियों—शिक्षक विधायक श्रीचन्द्र शर्मा, प्रो-वाइस चान्सलर डॉ. जयानन्द, डॉ. समी सक्सेना, कैरियर काउन्सलर ज्योति लुथरा, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. रणवीर सिंह, और अन्य सम्मानित शिक्षाविदों—की उपस्थिति इस आयोजन को सार्थक बनाएगी, यह मैं भली-भाँति समझ रहा था।

04 दिसम्बर 2025 का वह गुरुवार मेरे लिए किसी पर्व से कम नहीं था। दीप प्रज्ज्वलन के साथ जैसे ही कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ, मुझे लगा कि हमारी मेहनत और मंथन एक दिशा पा रहे हैं। 15 विख्यात विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और काउन्सलरों को एक मंच पर एकत्र देखकर मन गर्व से भर उठा। यह वह दृश्य था जिसकी कल्पना मैंने निमंत्रण मिलने के दिन ही कर ली थी—और आज वह साकार हो रहा था।

लगभग 350 विद्यार्थियों को विभिन्न कैरियर विकल्पों पर मार्गदर्शन प्राप्त करते देख मेरे भीतर एक संतोष जन्मा कि हम वास्तव में उनके भविष्य के लिए कुछ सार्थक कर पा रहे हैं। विद्यार्थियों के चेहरों पर जिज्ञासा, उत्साह और आत्मविश्वास—मेरे आज का सबसे बड़ा प्रतिफल था।

मुख्य अतिथियों द्वारा दिए गए विचार—शिक्षा के महत्व से लेकर कैरियर निर्णयों की स्पष्टता तक—विद्यार्थियों के लिए निश्चित रूप से प्रेरणादायक रहे। जब डॉ. जयानन्द, डॉ. रणवीर सिंह और डॉ. राजीव कुमार ने शिक्षा और कैरियर संबंधी दिशा पर विचार रखे, तो मुझे लगा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक नई सोच की शुरुआत है।

ग्रामीण क्षेत्र में पहली बार ऐसे कैरियर मेले का आयोजन होना स्वयं में ऐतिहासिक क्षण था। जब विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य—अनिल शास्त्री, संजय राणा, विनोद कुमार, निर्वेश प्रजापति, मोहित सिंघल, अनंग सिंघल, रचना सिंह और अंकित चौधरी—ने कार्यक्रम की सराहना की, तो मुझे लगा कि हमारा प्रयास सही दिशा में है।

इस आयोजन ने मुझे यह विश्वास दिलाया कि जब विद्यालय, समाज और शिक्षा जगत एक साथ सोचते हैं, तो परिणाम केवल सफल ही नहीं, बल्कि प्रेरणादायक भी होते हैं। मेरे लिए यह आयोजन केवल एक कर्तव्य का निर्वाह नहीं था, यह एक शिक्षक और प्रधानाचार्य होने के अर्थ को और भी गहराई से महसूस कराने वाला अनुभव था।

सूचना स्रोत 

श्री प्रवेंद्र दहिया जी 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 




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