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डॉ. नाज़ परवीन का आत्मकथ्य

भूमिका 

ज्ञान, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व—इन तीनों के समन्वय के बिना किसी भी शिक्षण संस्थान का उद्देश्य पूर्ण नहीं होता। श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर, ग्रेटर नोएडा के शिक्षकगण सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर समाज की नब्ज़ को भी समझते हैं और उसे स्वस्थ बनाने की दिशा में प्रयासरत रहते हैं। इन्हीं प्रयासों की कड़ी में “साइबर अपराध और उससे बचाव” जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित सामाजिक जागरूकता अभियान, न केवल वर्तमान समय की ज़रूरत है बल्कि भविष्य की सुरक्षित नींव भी है। इस आयोजन के अनुभवों और संदेशों को डॉ. नाज़ परवीन अपने आत्मकथ्य के रूप में साझा करती हैं, जिसमें वह समाज के प्रति शिक्षक की व्यापक भूमिका को स्पष्ट करती हैं।

डॉ. नाज़ परवीन का आत्मकथ्य

श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर, ग्रेटर नोएडा की शिक्षिका होने के नाते मैं सदैव यह मानती हूँ कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य समाज को जागरूक और सशक्त बनाना है। इसी भावना के साथ, हमारे बी.बी.ए. और बी.सी.ए. विभागों द्वारा आयोजित “साइबर अपराध और उससे बचाव” विषयक सामाजिक जागरूकता अभियान में शामिल होना मेरे लिए एक प्रेरणादायी अनुभव रहा। भट्टा ग्राम में आयोजित इस कार्यक्रम ने मुझे पुनः यह एहसास कराया कि समाज और शिक्षा—दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच सेतु का कार्य शिक्षक को ही निभाना होता है।

कार्यक्रम में हमारी बी.सी.ए. विभागाध्यक्ष एवं संयोजिका श्रीमती शशि नागर जी ने साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष श्री अमित नागर जी ने गांव में फैले प्रदूषण और उसके दुष्परिणामों को सरल भाषा में समझाया, जिससे उपस्थित ग्रामीणों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न हुई। समाजशास्त्र विभाग से डॉ. राजीव पांडेय जी ने नशे की प्रवृत्ति से समाज में होने वाले विघटन की ओर ध्यान आकर्षित किया।

ए.आई. के प्रभाव पर मिस काजल कपासिया के विचार अत्यंत महत्वपूर्ण थे। उन्होंने बताया कि तकनीक जितनी सुविधा देती है, उतनी ही सावधानी की भी मांग करती है, क्योंकि फेक न्यूज़ और डिजिटल धोखाधड़ी आज के समय के सबसे बड़े खतरे हैं। हिंदी विभाग की डॉ. कोकिल अग्रवाल जी ने बाल विवाह की रोकथाम और उचित आयु में विवाह के लाभों पर प्रकाश डालकर सामाजिक विकास को एक नई दिशा दी।

इस अवसर पर मुझे भी इतिहास विषय की प्राध्यापिका के रूप में अपने विचार रखने का अवसर मिला। मैंने उपस्थित ग्रामीणों विशेषकर बुजुर्गों से अनुरोध किया कि वे गांव के मार्गदर्शक हैं, इसलिए उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत का भविष्य तभी मजबूत होगा जब उसके गांव सशक्त होंगे—और इसके लिए हर पीढ़ी का मार्गदर्शन आवश्यक है।

महाविद्यालय के विद्यार्थियों—हिमांशी, अंशिका, बादल और फैजल—द्वारा प्रस्तुत विचारों ने इस तथ्य को और भी स्पष्ट कर दिया कि युवा वर्ग सामाजिक चेतना को समझ रहा है और जिम्मेदारी से निभाना भी चाहता है।

मुझे विशेष प्रसन्नता हुई कि भट्टा ग्राम के कई सम्मानित जनों—श्री महावीर सूबेदार, श्री देवेंद्र मुखिया, श्री हरवीर सिंह, श्री सूरजपाल, श्री रामपाल, श्री राजवीर, श्री यशपाल, श्री मनोज कुमार सेजवार, श्रीमती मालवती, श्रीमती उर्मिला देवी, श्रीमती पूनम देवी, श्रीमती जगपाली देवी, बबीता देवी, देवेंद्री देवी, मूर्ति देवी, धर्मवती सहित अनेक ग्रामवासी—ने अपनी उपस्थिति और सहयोग से इस अभियान को सफल बनाया।

इस पूरी पहल ने मुझे एक बार पुनः यह विश्वास दिलाया कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह समाज के बीच जाकर लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। इस अभियान में मेरी सहभागिता मेरे लिए एक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि समाज के प्रति एक नैतिक कर्तव्य का निर्वहन भी था।

सूचना स्रोत 

डॉ नाज परवीन 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 




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