भूमिका
खास अवसर जिसको जानने और समझने की आवश्यकता सभी को है क्योंकि वेदव्रत आर्य आपके और हमारे मध्य की ही शख्सियत है। कृषि क्षेत्र में पूर्व में भी अपनी नवाचारी प्रकृति के कारण और गन्ना उत्पादन में अव्वल रहने के कारण पुरस्कृत किए जा चुके हैं। इसका अध्ययन करने से अनेकानेक लोगों को प्रेरणा के साथ साथ राह भी मिल सकती है।
खास मौके पर आत्मकथ्य — वेदव्रत आर्य
जब किसी किसान के हाथों में मिट्टी की सौंधी खुशबू के साथ सम्मान का शिखर आकर टिक जाए, तब वह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रह जाती—वह समूचे कृषि समाज की आशा बन जाती है। अटल फाउंडेशन द्वारा अटलश्री सम्मान से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना मेरे जीवन का ऐसा ही क्षण है, जिसे मैं आज भी अपने खेतों की मेड़ों पर खड़े होकर अनुभव करता हूँ।
भारत के विविध क्षेत्रों—स्वास्थ्य, सामाजिक कार्य, सेवा, व्यवसाय, कृषि एवं अन्य क्षेत्रों—में विशिष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं में से पूरे भारत से केवल एक चयन किया जाना, और इस वर्ष कृषि क्षेत्र के लिए मेरा चयन होना, मेरे लिए गर्व के साथ-साथ उत्तरदायित्व का विषय भी है। यह सम्मान केवल मेरे नाम नहीं, बल्कि उस सोच के नाम है जो किसान को प्रयोगशील, जागरूक और आत्मनिर्भर बनते देखने का स्वप्न देखती है।
इस सम्मान के अंतर्गत मुझे प्रमाण-पत्र, शील्ड तथा भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा प्रदान की गई। यह कार्यक्रम महाराष्ट्र सदन, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की गरिमा उस समय और भी बढ़ गई जब भारत सरकार की कृषि राज्य मंत्री एवं राज्यसभा सांसद श्रीमती गीता शाक्य, अटल फाउंडेशन के वरिष्ठ पदाधिकारी—जिनमें वर्तमान व पूर्व सांसदों की सहभागिता रही—की उपस्थिति ने इसे राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया।
यद्यपि यह आयोजन मूलतः प्रधानमंत्री संग्रहालय में प्रस्तावित था, परंतु आकस्मिक कारणों से वहाँ अन्य कार्यक्रम निर्धारित हो जाने के कारण इसे महाराष्ट्र सदन में आयोजित किया गया। स्थान बदला, पर सम्मान की ऊँचाई और उद्देश्य की गरिमा यथावत रही।
कृषि मेरे लिए केवल आजीविका नहीं, संकल्प और साधना है। नवाचार को आत्मसात करते हुए उत्पादन बढ़ाना, वैज्ञानिक पद्धतियों को खेत तक पहुँचाना और परंपरा के साथ आधुनिकता का संतुलन बनाना—यही मेरी कार्यदिशा रही है। इसी क्रम में गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश स्तर पर सर्वाधिक उपज प्राप्त करने वाली प्रतिभा के रूप में पूर्व में मुझे सम्मानित किया जा चुका है। वह उपलब्धि मेरे आत्मविश्वास की नींव बनी, और आज का राष्ट्रीय सम्मान उसी यात्रा की अगली कड़ी है।
मैं मानता हूँ कि किसान यदि प्रयोग से डरना छोड़ दे, तो कृषि कभी पिछड़ा क्षेत्र नहीं रह सकती। यह सम्मान मुझे इसी विश्वास को और दृढ़ करने की प्रेरणा देता है कि आने वाला समय नवाचारशील किसान का है—जो खेत में केवल बीज नहीं बोता, बल्कि भविष्य भी गढ़ता है।
अंत में, मैं इस सम्मान को अपने परिवार, सहयोगी कृषक साथियों और उस मिट्टी को समर्पित करता हूँ, जिसने मुझे पहचान दी। अटलश्री सम्मान मेरे लिए उपलब्धि से अधिक एक वचन है—कि मैं कृषि के क्षेत्र में नवाचार, उत्पादन और प्रेरणा की यह यात्रा निरंतर जारी रखूँगा।
सूचना स्रोत
वेदव्रत सिंह
प्रविष्टि पात्रता सिद्धि
झलकियाँ

















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