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कचरे को कंचन बनाने का हुनर

भूमिका

नवाचार वह प्रक्रिया है जो असंभव को संभव बनाती है और साधारण में असाधारण देखने की दृष्टि प्रदान करती है। वर्तमान समय में जब पर्यावरण प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी चुनौतियाँ वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन चुकी हैं, तब युवाओं को इस दिशा में जागरूक करना और उन्हें सृजनात्मक समाधान प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करना अत्यंत आवश्यक है।

एम.एम.एच. कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद का इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन सेल और इको क्लब इस दिशा में निरंतर कार्यरत हैं। उनका यह प्रयास कि विद्यार्थी “वेस्ट” को “वैल्यू” में परिवर्तित करना सीखें, केवल शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक सामाजिक दायित्व का निर्वाह भी है।

“कचरे को कंचन बनाने का हुनर सीखा” शीर्षक से आयोजित यह प्रतियोगिता इसी सोच का सजीव उदाहरण है — जहाँ विद्यार्थियों ने प्रयोग, रचनात्मकता और पर्यावरणीय चेतना का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है — यह समझाने के लिए कि सृजनशीलता तभी सार्थक है जब वह समाज और प्रकृति के हित में प्रयुक्त हो।

ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम न केवल नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि युवाओं में यह विश्वास भी जगाते हैं कि परिवर्तन की शुरुआत विचारों से होती है, और विचार तभी फलदायी होते हैं जब उन्हें कर्म में रूपांतरित किया जाए।

कचरे को कंचन बनाने का हुनर सीखा

एम.एम.एच. कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद में वेस्ट मैनेजमेंट पर अंतर्विद्यालय प्रतियोगिता संपन्न

आज एम.एम.एच. कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद में इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन सेल एवं इको क्लब के संयुक्त तत्वावधान में “वेस्ट मैनेजमेंट के सृजनात्मक आयाम” विषय पर अंतर्विद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता और कचरे के पुनः उपयोग की सृजनात्मक समझ को विकसित करना था।

प्रतियोगिता में स्नातक एवं परास्नातक स्तर के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जनपद ग़ाज़ियाबाद के प्रमुख महाविद्यालयों — शम्भूदयाल डिग्री कॉलेज, एल.आर. कॉलेज, वी.एम.एल.जी. कॉलेज, रॉयल कॉलेज, रामा कॉलेज और साहिबाबाद कॉलेज — से कुल 87 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

प्रतिभागियों ने अपशिष्ट सामग्री से आकर्षक, उपयोगी और रचनात्मक मॉडल प्रस्तुत कर यह सिद्ध किया कि “कचरा” सही दृष्टिकोण और कल्पनाशक्ति से “कंचन” बन सकता है। इन मॉडलों का मूल्यांकन प्रोफेसर श्रीमती आलोक जी और प्रोफेसर जौहरी (आई.टी.एस., मोहन नगर) ने किया। कार्यक्रम के अंत में दोनों निर्णायकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

इको क्लब की संयोजक डॉ. रीमा उपाध्याय ने वेस्ट मैनेजमेंट के सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर विचार रखे, वहीं आई.आई.सी. की संयोजक प्रो. अपर्णा मल्होत्रा ने एम.एम.एच. कॉलेज की इनोवेशन सेल की उपलब्धियों एवं नवाचार की दिशा में हो रहे सतत प्रयासों पर प्रकाश डाला।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय सिंह ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट न केवल पर्यावरण संतुलन का आधार है, बल्कि यह सृजनात्मक सोच और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

कार्यक्रम का संचालन कर रही एकता कसाना ने प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित कर आयोजन को जीवंत और सहभागितापूर्ण बना दिया।

अंत में इनोवेशन सेल के कोऑर्डिनेटर डॉ. राकेश राणा ने सभी अतिथियों, निर्णायकों, प्रतिभागियों और सहयोगी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे —

प्रथम स्थान: पारुल (रॉयल कॉलेज ऑफ लॉ)

द्वितीय स्थान: रिया (एल.आर. कॉलेज)

तृतीय स्थान: आकांक्षा एवं रूपम (एम.एम.एच. कॉलेज)

सांत्वना पुरस्कार बी.कॉम वर्ग की छात्राओं गुनगुन, आकांक्षा और हिना (एम.एम.एच. कॉलेज) तथा प्रियांश (रॉयल कॉलेज) को प्रदान किए गए।

प्राचार्य प्रो. संजय सिंह ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएँ युवाओं में पर्यावरणीय चेतना के साथ-साथ नवाचार और उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करती हैं। उन्होंने सभी सक्रिय शिक्षकों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों के उत्साह और रचनात्मकता की प्रशंसा की।






सूचना स्रोत


पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 




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