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एक प्रेरणास्पद व्यक्तित्व है डॉ. शशि नागर

🌸 एक प्रेरणास्पद व्यक्तित्व

डॉ. शशि नागर से विशेष बातचीत

“जहाँ शिक्षा, सेवा और संकल्प एक साथ चलते हैं वहाँ परिवर्तन निश्चित होता है।”

डॉ. शशि नागर, दिल्ली सरकार में लेक्चरार (राजनीति विज्ञान) के पद पर कार्यरत एक बहुमुखी प्रतिभा की धनी महिला हैं। पाँच विषयों में स्नातकोत्तर और पीएच.डी. जैसी उच्च शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त करने के साथ-साथ, वे एक समाजसेविका, पर्यावरण कार्यकर्ता और बिज़नेस वुमन भी हैं। वे नारी सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समानता के क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य कर रही हैं।

आज हम उनसे संवाद कर रहे हैं, उनके अनुभवों, विचारों और कार्यों को जानने के लिए—

प्रश्न 1. डॉ. शशि जी, आपने शिक्षा, समाजसेवा और व्यवसाय तीनों क्षेत्रों में अद्वितीय कार्य किया है। इस बहुआयामी सफर की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर: "मेरे जीवन की शुरुआत एक साधारण परिवार से हुई, लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे हमेशा खुले मन से सपने देखने की आज़ादी दी। शिक्षा के प्रति मेरा झुकाव प्रारंभ से ही था। पढ़ाई के साथ-साथ मुझे समाज की स्थितियाँ और असमानताएँ विचलित करती थीं। यहीं से मेरे अंदर बदलाव लाने की ललक जगी और धीरे-धीरे मैंने शिक्षा, सेवा और आत्मनिर्भरता को अपने जीवन का मार्ग बना लिया।"

प्रश्न 2. आपने पाँच विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। यह प्रेरणादायक है। इस अकादमिक यात्रा में सबसे बड़ा प्रेरक तत्व क्या रहा?

उत्तर: "ज्ञान की प्यास और आत्मविकास की आकांक्षा मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही। मुझे लगता है कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का साधन नहीं, बल्कि सोचने, समझने और समाज को बेहतर बनाने की क्षमता देती है। हर विषय को पढ़ते-पढ़ते मेरी दृष्टि व्यापक होती गई और मैंने हर डिग्री को एक सामाजिक ज़िम्मेदारी की तरह लिया।"

प्रश्न 3. आप गर्ल्स स्कूल में पढ़ा रही हैं। वहाँ की छात्राओं के साथ आपका अनुभव कैसा रहता है?

उत्तर: "अद्भुत। वहाँ मैं केवल एक अध्यापिका नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, मित्र और प्रेरक के रूप में रहती हूँ। जब मैं देखती हूँ कि मेरी एक सलाह, एक कहानी या एक व्याख्यान किसी छात्रा के जीवन को दिशा दे रहा है, तो मुझे अपार संतोष मिलता है। मेरा प्रयास रहता है कि हर छात्रा अपने भीतर की शक्ति को पहचान सके।"

प्रश्न 4. आपके लिए ‘महिला सशक्तिकरण’ का वास्तविक अर्थ क्या है?

उत्तर: "महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि सोच की आज़ादी, निर्णय लेने की क्षमता और आत्म-सम्मान का निर्माण है। हर महिला जब अपने फैसले खुद लेने लगे, जब उसे किसी भी भूमिका में खुद को सीमित न करना पड़े, तब वह सशक्त कहलाएगी।"

प्रश्न 5. आप पर्यावरण-संवेदनशील NGOs की सक्रिय सदस्य हैं। शिक्षा के साथ पर्यावरण से जुड़ाव कैसे हुआ?

उत्तर: "प्रकृति हमारी प्राथमिक शिक्षक है। यदि हम उसे नहीं बचा पाए तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल किताबों में वृक्ष और नदियाँ पढ़ेंगी। मैं चाहती हूँ कि मेरी छात्राएँ केवल पढ़ें नहीं, प्रकृति को जियें और उसकी रक्षा करें। मैंने देखा है कि जब बच्चों को प्रकृति से जोड़ते हैं, तो उनमें जिम्मेदारी और करुणा का बीज स्वयं बोया जाता है।"

प्रश्न 6. समाज में जेंडर आधारित भेदभाव को लेकर आपका क्या दृष्टिकोण है?

उत्तर: "यह भेदभाव एक मानसिक रुग्णता है। इसे केवल कानून या नारेबाज़ी से नहीं, बल्कि शिक्षा और संवेदना से दूर किया जा सकता है। हमें अपने घरों, पाठशालाओं और समाज के हर स्तर पर समानता की सोच रोपनी होगी।"

प्रश्न 7. आपकी व्यावसायिक यात्रा के बारे में कुछ बताइए। शिक्षा और व्यापार—क्या ये दो अलग दुनिया नहीं हैं?

उत्तर: "बहुत लोग ऐसा सोचते हैं, लेकिन मेरे लिए व्यवसाय आत्मनिर्भरता का माध्यम है। मैंने व्यापार को कभी लालच या प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखा, बल्कि यह एक और मंच है जहाँ मैं महिला उद्यमियों को प्रेरित कर सकती हूँ। शिक्षा ने मुझे विचार दिए, और व्यापार ने उन्हें ज़मीनी हकीकत में बदलने की ताक़त।"

प्रश्न 8. आपके कार्यों में परिवार की क्या भूमिका रही?

उत्तर: "परिवार मेरे हर संघर्ष में ढाल बनकर खड़ा रहा। मेरे माता-पिता और परिजन मेरे हर निर्णय में मेरे साथ रहे। उन्होंने न केवल मुझे अवसर दिए, बल्कि मुझ पर विश्वास भी जताया। उस विश्वास ने ही मुझे उड़ान दी।"

प्रश्न 9.आज की युवा पीढ़ी को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: "स्वयं पर विश्वास करें, सीखने की लालसा रखें और समाज के प्रति जिम्मेदार बनें। जीवन केवल स्वयं तक सीमित नहीं है, हमें समाज के लिए भी जीना सीखना होगा। जो भी करें, उसमें संवेदना और उद्देश्य अवश्य हो।"

प्रश्न 10. अंत में, आपका दीर्घकालिक सपना क्या है?

उत्तर: "मेरा सपना है एक ऐसा समाज जहाँ शिक्षा सबकी पहुँच में हो, महिलाएँ सशक्त हों, पर्यावरण सुरक्षित हो और हर नागरिक जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी हो। यदि मेरे प्रयास से उस दिशा में एक छोटा सा भी बदलाव आए, तो मैं अपने जीवन को सफल मानूंगी।"

✨ समापन टिप्पणी

डॉ. शशि नागर जैसे व्यक्तित्व समाज की वह जीवंत ऊर्जा हैं, जो हर दिशा में उजाला फैलाने की क्षमता रखते हैं। उनका जीवन स्वयं में एक संदेश है—यदि उद्देश्य साफ़ हो, तो रास्ते अपने आप बनते जाते हैं।

सूचना स्रोत

ज्योति भड़ाना
स्थानीय संपादिका, उलझन सुलझन
लेडीज विंग, फरीदाबाद (हरियाणा) 
पाठ्य स्वरूप परिवर्तन और विस्तार
चैट जी.पी.टी. 
प्रस्तुति


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