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अद्भुत प्रदर्शन

भूमिका 

हरियाणा के एक साधारण से गांव की मिट्टी से उठकर विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाने वाली किशोरी आरती आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। आर्थिक संघर्ष, सीमित संसाधन और रोज़मर्रा की चुनौतियों के बीच उसने न केवल अपने सपनों को थामा बल्कि उन्हें साकार करने का साहस भी दिखाया। विश्व एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप, लीमा (पेरू) में 10,000 मीटर रेस वॉक में कांस्य पदक जीतकर आरती ने यह साबित कर दिया कि हौसले मजबूत हों तो हालात छोटे पड़ जाते हैं। यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उस हर सपने की जीत है जो छोटी-सी झोपड़ी में पलकर भी आसमान छूने की हिम्मत रखता है।

अद्भुत प्रदर्शन

यह हरियाणा की किशोर रेस वॉकर आरती के लिए एक समयपूर्व जन्मदिन का जश्न था, जिसने पेरू के लीमा में 27 से 31 अगस्त के बीच आयोजित विश्व एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10,000 मीटर रेस वॉक स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर अपने सीजन का समापन किया।

आरती अगले सप्ताह (6 सितंबर) को 18 वर्ष की हो जाएगी, यह बताते हुए उसके पिता जगत भड़ाना ने दिल्ली से सटे फरीदाबाद से फोन पर खुशी जताई। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी, साधारण परिवार से आने वाली इस किशोरी ने पूरी मेहनत के साथ महिला 10,000 मीटर रेस वॉक में 44 मिनट 39.39 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता, जो कि राष्ट्रीय अंडर-20 रिकॉर्ड भी बना है।

फरीदाबाद के बाहरी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली आरती के पिता एक स्थानीय अस्पताल में एम्बुलेंस ड्राइवर के रूप में काम करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं।

आरती ने अपनी बड़ी बहन भारती के पदचिह्नों पर चलते हुए रेस वॉकिंग अपनाई। भारती महिला 20 किलोमीटर रेस वॉक में राष्ट्रीय स्तर की पदक विजेता रह चुकी हैं। आरती ने रेस वॉकिंग शुरू करने के सिर्फ ढाई साल में ही उल्लेखनीय प्रगति की है।

इस साल अप्रैल में दुबई में आयोजित एशियाई अंडर-20 प्रतियोगिता में भी उसने कांस्य पदक जीता था। इससे पहले पिछले वर्ष उसने ताशकंद में हुई एशियाई युवा प्रतियोगिता 2023 में 5,000 मीटर रेस वॉक में कांस्य पदक प्राप्त किया था।

लीमा में विश्व अंडर-20 में मिला कांस्य पदक अब भड़ाना परिवार को राज्य तथा केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले नकद प्रोत्साहन के रूप में वित्तीय सहायता दिला सकता है। "इनामी राशि हमारे परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा होगी और इससे आरती को अपना प्रदर्शन और बेहतर करने में मदद मिलेगी," जगत भड़ाना ने कहा।

उत्तम प्रदर्शन की तैयारी के लिए आरती फरीदाबाद से रोहतक चली गई और एक किराए के मकान में रहने लगी। वहां का मासिक खर्च करीब 20,000 रुपये से अधिक है, जिसमें खेल किट और रेस वॉकिंग के जूते शामिल नहीं हैं।

रेस वॉकिंग के एक अच्छे जोड़े जूते की कीमत 10,000 से 15,000 रुपये तक होती है, और 10,000 मीटर रेस की रोज़ की कठोर अभ्यास दिनचर्या के चलते ये जूते दो महीने के भीतर घिस जाते हैं। किराए का घर, पौष्टिक आहार पर खर्च और अन्य ज़रूरी जरूरतें मिलाकर लगभग 20,000 रुपये प्रति माह अतिरिक्त खर्च होता है।इसके अलावा कोचिंग फीस भी देनी होती है।

"मेरे जैसे व्यक्ति के लिए अपनी बेटी के अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने के सपने को पूरा करना बहुत बड़ी चुनौती है," आरती के पिता ने कहा।

हरियाणा सरकार की ओर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देने की नीति है, लेकिन भड़ाना परिवार को अभी तक पूरा हक नहीं मिला है। "फरीदाबाद के हरियाणा खेल विभाग ने अभी तक नहीं बताया कि आरती को कितना मिलेगा। हम इंतज़ार कर रहे हैं," उन्होंने कहा।



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