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प्रेरणादायी साक्षात्कार : तस्दीक अहमद खान ‘तस्दीक’

प्रेरणादायी साक्षात्कार : तस्दीक अहमद खान ‘तस्दीक’

भूमिका 

साहित्य जगत के ऐसे हस्ताक्षर, जिनकी लेखनी न केवल भावनाओं को शब्द देती है बल्कि पीढ़ियों को प्रेरणा भी प्रदान करती है, वे हैं तस्दीक अहमद खान ‘तस्दीक’। जन्म 5 अगस्त 1957 को हुआ और पिता मरहूम हाजी रफीक अहमद खान से संस्कार प्राप्त हुए। विज्ञान एवं तकनीक की शिक्षा (बी.एस.सी., बी.टेक, एम.टेक., उर्दू आदिब कामिल) लेने के बावजूद, उनकी आत्मा साहित्य से जुड़ी रही। लेखन की साधना ने उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान दिलाए। 'साहित्य श्री' से लेकर 'शाख अदब लाइफ टाइम एचीवमेंट एवार्ड' और 'डॉ. सआदत अदबी अवार्ड' तक की उनकी उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि जुनून और समर्पण के साथ की गई साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती। प्रस्तुत है, उनसे एक प्रेरणादायी संवाद।



प्रश्नोत्तर

प्रश्न १. तस्दीक साहब, सबसे पहले हम जानना चाहेंगे कि आपके साहित्यिक जीवन की प्रेरणा कहाँ से मिली?

उत्तर : "साहित्य की प्रेरणा मुझे घर के वातावरण और अपने भीतर उमड़ते जज़्बातों से मिली। पिता की सीख और समाज की स्थितियों ने हमेशा सोचने-समझने के लिए प्रेरित किया। विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई करने के बाद भी मन कलम की ओर खिंचता रहा और वही मेरी असली पहचान बन गया।"

प्रश्न २. विज्ञान और तकनीकी पृष्ठभूमि से साहित्य की ओर यह सफ़र कैसा रहा?

उत्तर : "यह सफ़र बहुत रोचक और चुनौतीपूर्ण रहा। पढ़ाई ने मुझे तार्किक सोच दी और साहित्य ने मुझे संवेदनशीलता दी। दोनों के संगम ने मेरी लेखनी को गहराई दी। मैं मानता हूँ कि शिक्षा केवल रोज़गार तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मा को व्यक्त करने का माध्यम भी है।"

प्रश्न ३. आपकी उपलब्धियों की सूची काफी लंबी है। “साहित्य श्री” से लेकर “लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड” तक — आप इन सम्मान को कैसे देखते हैं?

उत्तर : "हर सम्मान मेरे लिए समाज की स्वीकृति और पाठकों के प्रेम का प्रतीक है। ये अवार्ड मेरे प्रयासों की नहीं बल्कि साहित्य की विजय हैं। मुझे हमेशा लगता है कि यह ज़िम्मेदारी भी है कि आगे और बेहतर लिखा जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा छोड़ी जाए।"

प्रश्न ४. आपको कई अलग-अलग संस्थाओं और मंचों से सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें से कौन-सा आपके दिल के सबसे करीब है?

उत्तर : "सच कहूँ तो हर पुरस्कार की अपनी अहमियत है। लेकिन “साहित्य श्री” (2018) मेरा पहला बड़ा सम्मान था, जिसने मुझे आत्मविश्वास दिया। और “शाख अदब लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड” (2025) इस सफ़र की सार्थकता का अहसास कराता है।"

प्रश्न ५. आप कई प्रतियोगिताओं में भी सफल रहे हैं, जैसे माँ कविता प्रतियोगिता, काव्य रश्मि सम्मान आदि। इन क्षणों का अनुभव कैसा रहा?

उत्तर : "प्रतियोगिताएँ मुझे हमेशा एक नए दृष्टिकोण से सोचने के लिए प्रेरित करती हैं। जब मैंने माँ पर कविता लिखी और उसमें सम्मान पाया, तो लगा कि मेरी लेखनी ने माँ के चरणों में एक छोटा-सा नमन कर दिया। ऐसे अवसर दिल को छू जाते हैं।"

प्रश्न ६. आज की पीढ़ी को आप साहित्य की ओर आकर्षित करने के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर : "मैं यही कहना चाहूँगा कि साहित्य केवल किताबों तक सीमित नहीं, यह जीवन जीने का तरीका है। नई पीढ़ी मोबाइल और तकनीक में व्यस्त है, लेकिन यदि वे थोड़ा समय लेखन और पठन को देंगे, तो उनकी सोच और जीवन दोनों ही समृद्ध होंगे।"

प्रश्न ७. इतने पुरस्कार और सम्मान प्राप्त करने के बाद भी आगे आपकी क्या आकांक्षाएँ हैं?

उत्तर : "मेरी आकांक्षा बस यही है कि मैं अपने शब्दों से समाज को कुछ दिशा दे सकूँ। पुरस्कार और सम्मान तो आते-जाते रहेंगे, पर असली मक़सद लोगों के दिलों में जगह बनाना है। मैं चाहता हूँ कि मेरी रचनाएँ आने वाली पीढ़ी के लिए भी उतनी ही जीवंत रहें।"

प्रश्न ८. अंत में, साहित्य की दुनिया में अपने पाठकों और श्रोताओं के लिए आपका संदेश?

उत्तर : "मैं पाठकों और श्रोताओं से यही कहना चाहूँगा कि साहित्य को जीवन का हिस्सा बनाइए। यह हमें न सिर्फ़ सोचने की शक्ति देता है बल्कि मानवीयता की भी शिक्षा देता है। प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता — यही साहित्य की असली आत्मा है।"

👉 यह संवाद हमें यह सिखाता है कि शिक्षा, परिश्रम और संवेदनशीलता का संगम इंसान को ऊँचाइयों पर ले जाता है। तस्दीक अहमद खान ‘तस्दीक’ की साहित्य यात्रा इसका सशक्त उदाहरण है।

सूचना स्रोत


पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 







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