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साहित्य की विविध धाराओं में पहचान बनाने वाले श्री गंगाधर शर्मा जी

भूमिका

भारतीय साहित्य की विविध धाराओं में गंगा धर शर्मा ‘हिन्दुस्तान’ का नाम अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। पिलानी (राजस्थान) में 10 अक्तूबर 1970 को जन्मे साहित्यकार ने अंग्रेज़ी एवं हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर अपने लेखन को गहराई और व्यापकता दी। कविता, कहानी और आलेख जैसी विधाओं में उनकी सतत सक्रियता उन्हें एक बहुमुखी रचनाकार बनाती है। उनकी रचनाएँ जहाँ पारंपरिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं, वहीं डिजिटल मंचों पर भी निरंतर पाठकों तक पहुँचीं। साहित्य साधना में उनके योगदान को कई संस्थाओं ने सम्मानित किया है, विशेष रूप से 1990 में नई दिल्ली की फाउंडेशन फॉर एमिटी एंड नेशनल सोलिडेरिटी द्वारा कहानी लेखन हेतु प्रदान किया गया स्वर्ण पदक उनकी उपलब्धियों का मील का पत्थर है। प्रस्तुत है साहित्यकार गंगाधर शर्मा ‘हिन्दुस्तान’ से विशेष बातचीत।


प्रश्न 1 : सबसे पहले हमारे पाठकों को अपने बारे में संक्षेप में बताइए।

उत्तर : मेरा नाम गंगाधर शर्मा ‘हिन्दुस्तान’ है। मेरा जन्म 10 अक्टूबर 1970 को राजस्थान के पिलानी नगर में हुआ। मेरे पिता श्री गिरधारी लाल शर्मा और माता श्रीमती देवकी देवी शर्मा हैं। परिवार से ही मुझे संस्कार और अध्ययन की प्रेरणा मिली।

प्रश्न 2 : आपकी शैक्षिक यात्रा कैसी रही?

उत्तर : मैंने स्नातकोत्तर स्तर तक अध्ययन किया है। अंग्रेज़ी साहित्य और हिन्दी साहित्य—दोनों ही विषयों में मैंने परास्नातक की उपाधि प्राप्त की। इन दोनों धाराओं ने मुझे भाषा, भाव और विचार की गहराई से परिचित कराया।

प्रश्न 3 : साहित्य लेखन की ओर आपका झुकाव कैसे हुआ?

उत्तर : साहित्य मेरे लिए केवल लेखन नहीं, बल्कि जीवन की अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। छात्र जीवन से ही मुझे लेखन का शौक रहा। कविताएँ लिखते-लिखते धीरे-धीरे कहानियाँ और आलेख भी लिखने लगा। समय के साथ यह शौक साधना में बदल गया।

प्रश्न 4 : आपकी रचनाएँ किन-किन माध्यमों में प्रकाशित हुई हैं?

उत्तर : मेरी कविताएँ, कहानियाँ और आलेख विभिन्न मासिक, पाक्षिक तथा दैनिक पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहे हैं। इसके अलावा अनेक अंतर्जालीय (ऑनलाइन) साहित्यिक पत्रिकाओं ने भी मेरी रचनाओं को स्थान दिया है। इस प्रकार परम्परागत और आधुनिक—दोनों ही मंचों पर पाठकों तक पहुँचने का अवसर मिला।

प्रश्न 5 : साहित्य की कौन-सी विधाएँ आपको अधिक प्रिय हैं?

उत्तर : कविता मेरे हृदय के सबसे निकट है। उसमें संवेदना और कल्पना के लिए सबसे अधिक अवसर मिलता है। साथ ही कहानी और आलेख लिखते हुए भी मुझे गहरा आनंद मिलता है, क्योंकि इनके माध्यम से समाज और जीवन की सच्चाइयों को प्रतिबिंबित किया जा सकता है।

प्रश्न 6 : आपके लेखन को समाज ने किस प्रकार स्वीकार किया?

उत्तर : पाठकों से लगातार मिलती सराहना और सुझाव ही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार हैं। हाँ, औपचारिक रूप से भी मुझे विभिन्न साहित्यिक संगठनों द्वारा सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है। विशेष रूप से 1990 में ‘फाउंडेशन फॉर एमिटी एंड नेशनल सोलिडेरिटी, नई दिल्ली’ द्वारा कहानी लेखन हेतु स्वर्ण पदक प्राप्त करना मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा।

प्रश्न 7 : आज के समय में साहित्यकार की भूमिका आप किस रूप में देखते हैं?

उत्तर : आज साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण है। साहित्यकार का दायित्व है कि वह अपने शब्दों से संवेदनशीलता जगाए, मूल्यों को जीवित रखे और पाठकों को सोचने के लिए विवश करे। बदलते समय में यह भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

प्रश्न 8 : युवा पीढ़ी के लिए आपका संदेश क्या होगा?

उत्तर : युवाओं से मैं यही कहना चाहूँगा कि साहित्य से जुड़ें, क्योंकि यह मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाता है। लेखन हो या पठन—दोनों ही व्यक्तित्व को गहराई और दृष्टि देते हैं।

👉 यह साक्षात्कार गंगाधर शर्मा ‘हिन्दुस्तान’ के व्यक्तित्व, साहित्यिक यात्रा और विचारों को सम्पूर्ण रूप से सामने लाता है।

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